Summary: गर्भवती महिला के लिए जरूरी टेस्ट
गर्भावस्था में ये 5 जरूरी टेस्ट मां और शिशु दोनों की सेहत के लिए बेहद अहम होते हैं, जानिए इनकी अहमियत।
Essential Pregnancy Test during Pregnancy: गर्भावस्था के दौरान मां और बच्चे दोनों के सेहत का ख्याल रखना जरूरी है। गर्भ में पल रहे शिशु तथा मां के सेहत को सुनिश्चित करने के लिए गर्भावस्था के दौरान गर्भवती महिला के कुछ टेस्ट करवाना बहुत जरूरी है, इन मेडिकल टेस्ट का समय पर जांच करवाने से न सिर्फ संभावित समस्याओं का शुरुआती पता चल पाता है, बल्कि सही समय पर उसका इलाज और देखभाल भी किया जा सकता है। आइए इस लेख में जानते हैं, वह कौन से पांच मेडिकल टेस्ट है जो गर्भावस्था के दौरान महिला को करवाना जरूरी है।
ब्लड ग्रुप और आरएच फैक्टर टेस्ट
ब्लड ग्रुप और आरएच फैक्टर टेस्ट महिला के ब्लड ग्रुप के जांच अर्थात महिला किस ब्लड ग्रुप की है (A, B, AB, O) और आरएच फैक्टर टेस्ट महिला के ब्लड ग्रुप के बारे में बताता है ब्लड ग्रुप पॉजिटिव है या नेगेटिव।
क्यों जरूरी है यह टेस्ट: गर्भावस्था के दौरान अगर मां का आरएच फैक्टर नेगेटिव है और बच्चे का पॉजिटिव तो ऐसी स्थिति में मां का इम्यून सिस्टम बच्चों के खिलाफ एंटीबॉडी तैयार कर सकता है, जिससे भविष्य में दोबारा गर्भधारण करने में परेशानी हो सकती है। यही कारण है कि समय रहते आरएच फैक्टर के बारे में जान लेना जरूरी है, ताकि मां के अंदर एंटी-डी इंजेक्शन द्वारा एंटीबॉडी बनने की प्रक्रिया को रोका जा सके।

सीबीसी टेस्ट (कंपलीट ब्लड काउंट टेस्ट)
सीबीसी टेस्ट शरीर में खून की मात्रा, हीमोग्लोबिन का स्तर तथा खून में पाए जाने वाले सभी कोशिकाओं की जानकारी देता है।
क्यों जरूरी है यह टेस्ट: गर्भवती महिला के अंदर खून की कमी होना एक आम समस्या है। गर्भावस्था के दौरान एनीमिया मां और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य को प्रभावित करता है, इसके अलावा प्रसव को भी जटिल बनता है। इन सभी परेशानियों से बचने के लिए सीबीसी टेस्ट करवाया जाता है ताकि समय रहते उपचार किया जा सके।
थाइरॉएड फंक्शन टेस्ट
थाइरॉएड फंक्शन टेस्ट द्वारा t3 और t4 हार्मोन लेवल की जांच की जाती है।
क्यों जरूरी है यह टेस्ट: गर्भावस्था के दौरान थायराइड हार्मोन में असंतुलन के कारण गर्भपात, शिशु में मानसिक और शारीरिक विकृतियों के होने की संभावना बढ़ जाती है। यह टेस्ट गर्भावस्था के पहले तीन महीने में करवाना जरूरी है।
ग्लूकोज टोलरेंस टेस्ट
यह टेस्ट गर्भ अवस्था में होने वाले मधुमेह की जांच के लिए किया जाता है। ग्लूकोज टोलरेंस टेस्ट गर्भवती महिला के पहले-दूसरे महीने में किया जाता है।
क्यों जरूरी है यह टेस्ट: गर्भावस्था के दौरान होने वाला मधुमेह एक सामान्य स्थिति है, लेकिन अगर इसे कंट्रोल न किया जाए तो यह शिशु में अधिक वजन, प्रसव के समय परेशानी तथा मां के अंदर भविष्य में टाइप-टू डायबिटीज के खतरे को बढ़ाता है।
अल्ट्रासाउंड स्कैन
एक गर्भवती महिला को अपने गर्भावस्था के दौरान समानता तीन से चार अल्ट्रासाउंड करवाना चाहिए। आइए जानते हैं कब-कब,
पहली तिमाही में: गर्भधारण के बाद यह पहला अल्ट्रासाउंड होता है जो गर्भ की पुष्टि और गर्भ में भ्रूण की स्थिति को जांचने के लिए किया जाता है।
NT स्कैन (11 से 14 सप्ताह में ): यह अल्ट्रासाउंड डाउन सिंड्रोम जैसे क्रोमोजोमल विकारों को जांचने के लिए किया जाता है।
अनामॉली स्कैन (18 से 22सप्ताह में ): यह अल्ट्रासाउंड बच्चों के अंगों का विकास देखने के लिए होता है।
ग्रोथ स्कैन (28 से 36 सप्ताह में ): यह स्कैन गर्भ में बच्चे की वृद्धि और स्थिति देखने के लिए होता है।
अल्ट्रासाउंड स्कैन के द्वारा शिशु के विकास, हार्टबीट, अंगों की स्थिति, एमनियोटिक फ्लूड की मात्रा आदि के बारे में जांचा जाता है।
