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दास्तान-ए-रूमाल: Hindi Vyang
Dastan-e-Rumal

Hindi Vyang: बड़े आकार का रूमाल ठंड और धूप से बचाव करता है। यदि आप मास्क लगाना भूल गए हैं तो अपना रूमाल निकालिए और बांध लीजिए नाक, मुंह पर।

मेरे घर पर किटी पार्टी थी, पार्टी की थीम गुलाबी रंग पर रखी थी। सभी महिलाओं की उपस्थिति से बैठक कक्ष और मौसम गुलाबी-गुलाबी नजर आ रहा था। गेम्स, खाना-पीना, मौज-मस्ती और गप-शप के बीच तीन घंटे कैसे बीत गए पता ही नहीं चला। जाते समय सभी महिलाओं ने मेरी मेजवानी की बहुत तारीफ की। तारीफ सुनकर मैं खुशी से फुली नहीं समा रही थी और मेरी थकान भी गायब हो गई थी।
फैला हुआ सामान व्यवस्थित करते समय कमरे में मुझे एक रूमाल दिखाई दिया। रूमाल भी गुलाबी रंग का ही था। किसी के रूमाल को पहचानना नामुमकिन होता है। मैंने उस रूमाल को उठाकर टीवी के पीछे रख दिया और सोचा कि जिसका होगा वह आकर ले जाएगी।
मैं शाम को कालोनी के गार्डन में टहलने के लिए जाती हूं। एक शाम मेरी किटी पार्टी की सदस्या मिसेस ग्रोवर मुझे गार्डन में मिली, मुझे देखते ही वे बोलीं, ‘शीला किटी पार्टी के दिन मेरा रूमाल तुम्हारे घर पर रह गया था।’
मैंने कहा, ‘हां, मुझे मिला था। मैंने उसे बहुत अच्छे से संभाल कर रख दिया है।’
घर पर आकर मैंने टीवी के पीछे देखा, रूमाल वहां से गायब था। मैंने सोचा सफाई करते वक्त किसी ने रूमाल को कहीं और रख दिया होगा। मैं दूसरे कार्य में व्यस्त हो गई और रूमाल को खोजने की बात मेरे दिमाग से निकल गई।
दूसरे दिन मिसेस ग्रोवर से गार्डन में पुन: मुलाकात हुई, उनसे बात-चीत करके ऐसा प्रतीत हो रहा था कि वे आज गार्डन में सिर्फ अपना रूमाल मुझ से लेने के लिए आई थीं। मेरे मुंह से रूमाल न मिलने की बात सुनकर वे काफी दु:खी लग रही थीं।
गार्डन से घर लौटते वक्त मैं सोच रही थी कि रूमाल कुछ इंच का कपड़े का टुकड़ा ही तो होता है और मिसेस ग्रोवर उसके लिए इतना दु:खी क्यों हुईं? खैर, उनके दु:खी होने का कारण तो मैं न समझ सकी, पर रूमाल पर गहराई से विचार किया तो एक रूमाल की अहमियत क्या होती है ये जरूर समझ में आ रहा था।
मेरे दिमाग में रूमाल के गुण-धर्म को लेकर उथल-पुथल हो रही थी। सर्दी से ग्रस्त व्यक्ति का सबसे अच्छा साथी रूमाल ही तो होता है, वह तो एक-दो नहीं बल्कि कई-कई रूमालों का इस्तेमाल कर डालता है एक दिन में। छोटे बच्चे की मां को हर समय रूमाल अपने पास में रखना होता है, बच्चे की लार, आंसू, नाक और मुंह पोंछने में रूमाल ही तो अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है।
बड़े आकार का रूमाल ठंड और धूप से बचाव करता है। यदि आप मास्क लगाना भूल गए हैं तो अपना रूमाल निकालिए और बांध लीजिए नाक, मुंह पर। कोरोना काल में रूमाल की बहुत उपयोगिता बढ़ गई है। रूमाल को लेकर एक प्रश्न मेरे मन में बार-बार उठता है कि पुरुषों के लिए बड़े आकार के रूमाल और स्त्रियों के लिए छोटे आकार के रूमाल ही क्यों बनाए जाते हैं? क्या पुरुषों के बड़े आकार के रूमाल उनके वर्चस्व को दर्शाते हैं?
कुछ वर्ष पूर्व रूमाल फैशन का आधार था। लड़कियां सुंदर से रूमाल को अपनी चोटी में बांधती थी और लड़के गले में बांधते थे। साड़ी पहनने वाली महिलाओं की कमर में लटका खूबसूरत-सा रूमाल महिलाओं की कमर में चार-चांद लगा देता था। पहले नई दुल्हन के साथ हाथ से बने सुंदर रूमाल रखे जाते थे जिन पर कढ़ाई, क्रोशिया वर्क, मोती वर्क और पेंटिंग की जाती थी इन्हें देखकर लोग दुल्हन के हुनर को परखते थे।
बहनें रूमाल के महत्व को ज्यादा समझती हैं। रक्षाबंधन और भाई दूज जैसे त्यौहार हमारे यहां रूमाल के बिना अधूरे से लगते हैं। वेनेजुएला एक ऐसा देश है जहां रूमाल का उपहार नहीं लिया जाता है।
किसी रोते हुए व्यक्ति के प्रति संवेदना जताना हो तो बढ़ी दीजिए उसकी ओर अपना रूमाल और बन जाइए उसके करीबी। कुछ पति अपने काम पर जाते वक्त अपना रूमाल नहीं लेते, याद आने पर पत्नि को आवाज देकर कहते हैं जरा मेरा रूमाल तो देना, तब पत्नि जी दौड़ते हुए पति के सम्मुख रूमाल पेश करती है। शायद पत्नि का सानिध्य पाने के लिए पति ऐसा करते हैं।
खेलों में भी रूमाल का बड़ा महत्व है। रूमाल के द्वारा कई खेल खेले जाते हैं, आंखों में रूमाल की पट्टïी बांध कर साथियों को छूने का खेल या गोल में बैठ कर पीछे रूमाल डालने का खेल बच्चों द्वारा बहुत खेला जाता है। खेलते समय यदि चोट लग जाए तो यही रूमाल पट्टïी बनकर जख्म को सहलाता है। यदि आपके सर में दर्द हो रहा है तो आप एक रूमाल बांध लीजिए, सर दर्द में आराम भी होगा और लोगों की सहानुभूति भी आप पा सकेंगे।
कुछ नृत्य में रूमाल का उपयोग किया जाता है। भांगड़ा नृत्य में रूमाल को हाथों में बांधा जाता है, तो नागिन नृत्य में रूमाल बीन बन जाता है। धाॢमक कार्यों में भी रूमाल बहुत काम आता है, गुरुद्वारा और मस्जिद में रूमाल सर पर बांध कर टोपी की कमी को पूरा कर लिया जाता है। लोग रूमाल में प्रसाद भी रख लेते हैं। शादी के समय दूल्हे को नारियल रूपी गणपति रूमाल में ही बांध कर दिए जाते हैं।
आजकल तो कागज के रूमाल (पेपर नेपकिन) का जमाना है। चेहरा व पसीना पोंछने के लिए तरह-तरह के फ्लेवर के सेटेड पेपर नेपकिन बाजार में उपलब्ध हैं। लड़कियां अपने पर्स में ये पेपर नेपकिन जरूर रखती है। रूमाल को लेकर इतने सारे ख्याल मेरे मन में कौंध उठे थे।
एक दिन मैं रसोई में व्यस्त थी तभी फोन की घंटा घन-घना उठी। मेरे हलो बोलते ही दूसरी तरफ से मिसेस ग्रोवर की आवाज आई, ‘शीला मेरा रूमाल मिला क्या?’
मैंने कहा, ‘नहीं, आपका वह रूमाल तो नहीं मिला, पर मैं आपको दूसरा नया रूमाल दे दूंगी।’
मिसेस ग्रोवर बोलीं, ‘अरे नहीं-नहीं शीला, मुझे तो वही मेरा वाला रूमाल चाहिए था’, फिर वे बात को साफ करते हुए कहने लगीं, ‘शीला हमारे यहां ऐसी मान्यता है कि रूमाल गुमना नहीं चाहिए, रूमाल गुम हो जाता है तो घर में झगड़ा होता है और दरअसल आज ही मेरा अपने पति देव से झगड़ा हो गया है।’
मैंने कहा, ‘अच्छा, यह बात है! तो मैं आज फिर से उस रूमाल को ढूंढूंगी।’
उस दिन रोजमर्रा के काम से फुरसत मिलते ही मैंने सारे घर में रूमाल खोजना प्रारंभ किया। सारी अलमारी देखी, पलंग के नीचे, लाफ्ट पर, फ्रिज में, कूलर में, बाथरूम में, किचन की ट्रालियों में, ड्रेसिंग टेबल में और न जाने कहां-कहां। घर के प्रत्येक सदस्य से उस रूमाल के विषय में कई-कई बार पूछा, वे भी अब खीझ उठे थे।
इस तरह रूमाल खोजते-खोजते एक सप्ताह बीत गया पर वह नहीं मिला। अब मुझे शॄमदगी महसूस होने लगी थी कि मिसेस ग्रोवर का सामना मैं कैसे करूंगी।
एक दिन मैं अखबार पढ़ रही थी, बच्चे पास में ही बैठे अपने खिलौने का बड़ा बॉक्स लिए खेल रहे थे, तभी मेरी नजर उस बॉक्स पर पड़ी उसी में एक गुलाबी रूमाल मुझे दिखाई दिया, यह वही रूमाल था जो मुझे किटी पार्टी के दिन मिला था। रूमाल को देखते ही मेरे मुंह से चीख निकल पड़ी, ‘अरे मिल गया, मिल गया।’
मेरे पति देव जो कि शेविंग कर रहे थे, दौड़ते हुए आए और बोले, ‘शीला ऐसा कौन-सा खजाना तुम्हें मिल गया जो इतना चीख रही हो।’
मैंने कहा, ‘अरे मिसेस ग्रोवर का रूमाल मिल गया।’
रूमाल मिलने की बात सुन कर मेरे पतिदेव ने भी चैन की सांस ली क्योंकि उसी रूमाल के कारण हमारे घर में कुछ दिनों से कोहराम मचा हुआ था। मिसेस ग्रोवर को रूमाल मिलने की खुशखबरी सुनाने हेतु तुरंत फोन किया, किंतु उनका फोन स्विच ऑफ था। यह खुशखबरी मैं उन्हें तुरंत नहीं सुना पाई।
शाम को जब मैं पार्क में गई तो मैंने मिसेस ग्रोवर को रूमाल दूर से ही दिखाया, रूमाल देखते ही वे मेरी ओर दौड़ पड़ीं, अचानक उनका पैर मुड़ गया और वे गिर गईं, उनके पैर में हल्की मोच आ गई, पर रूमाल मिलने से वे मोच का दर्द भूल गईं और बहुत खुश हुईं। रूमाल ढूंढने के लिए मुझे लाख-लाख धन्यवाद दे रही थीं। ठ्ठ

किसी रोते हुए व्यक्ति के प्रति संवेदना जताना हो तो बढ़ी दीजिए उसकी ओर अपना रूमाल और बन जाइए उसके करीबी। कुछ पति अपने काम पर जाते वक्त अपना रूमाल नहीं लेते, याद आने पर पत्नि को आवाज देकर कहते हैं जरा मेरा रूमाल तो देना, तब पत्नि जी दौड़ते हुए पति के सम्मुख रूमाल पेश करती है। शायद पत्नि का सानिध्य पाने के लिए पति ऐसा करते हैं।

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