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बालमन की कहानियां
Holi ka Uphar-Balman ki Kahaniyan

भारत कथा माला

उन अनाम वैरागी-मिरासी व भांड नाम से जाने जाने वाले लोक गायकों, घुमक्कड़  साधुओं  और हमारे समाज परिवार के अनेक पुरखों को जिनकी बदौलत ये अनमोल कथाएँ पीढ़ी दर पीढ़ी होती हुई हम तक पहुँची हैं

तीन दिन बाद होली है। गोलू, भोलू और नीलू कब से मुंह लटकाए बैठे थे। तीनों बहुत देर से सोच रहे थे कि इस कोरोना काल में होली की हुड़दंग कैसे हो? होली कैसे मनाई जाए? इस बार होली में मजा नहीं आएगा।

“चलो, हम लोग कहीं दूर बगीचे में नई तरकीब ढूढ़ें।”

सभी ने एक स्वर में कहा। तभी रमेश के दादा जी दिखाई पड़ गए, तो गोलू ने कहा-“चलो दादा जी के पास। हमलोग उन्हीं से सलाह ले लें।”-नीलू ने कहा।

“दादा जी क्या सलाह देंगे? उनके पास कुछ भी तो नया आइडिया नहीं होगा। हम लोग नए जमाने के बच्चे और वे पुराने जमाने के बुजुर्ग।”-भोलू ने मुंह बिचकाते हुए कहा।

“अरे भाई! हम लोग चलें तो सही। इसमें कोई रुपये-पैसे तो लगते नहीं हैं? एक बार उनसे पूछने में कोई बुराई है क्या? -नीलू ने कहा।

तो, सभी मिलकर दादा जी के पास चल दिए।

तीनों बच्चों को अपनी ओर आते हुए देखकर दादा जी मुस्कुराने लगे। उन्होंने बच्चों से पूछा-“क्या बात है नन्हें मित्रों!”

सभी बच्चे खिलखिलाने लगे!

“बहुत देर से मैं तुम बच्चों की परेशानी देख रहा हूँ। कुछ तो बोलो। मुंह तो खोलो। बताओ तो, क्या परेशानी है?

-दादा जी ने प्रेम से पूछा।

“हाँ दादा जी, हम लोग सचमुच बहुत परेशान हैं। होली आने वाली है। कोरोना काल चल रहा है। होली में हम बच्चे होली कैसे मनाएंगे दादाजी?”-नीलू ने मासूमियत से पूछा।

बच्चों की बात सुनकर दादाजी पुराने ख्यालों में खो गए।

उन्होंने कहा-“मैं भी बचपन में होली अपने दोस्तों के साथ मिलकर धूमधाम से मनाया करता था। मन तो अभी भी करता है कि तुम लोगों के साथ होली मनाऊँ। झूम-झूमकर नाचूँ-गाऊँ। परंतु कोरोना के लॉकडाउन में होली उत्सव में मिलन समारोह भी नहीं करना है न! तो… चलो, क्यों न कुछ नया किया जाए! बच्चों, चलो बगीचे में… उन पेड़ों से बातें करते हैं।”

“वो कैसे दादा जी?”-तीनों बच्चे एक ही साथ बोल पडे।

“पहले चलो तो सही”-दादाजी ने कहा और तीनों दादाजी के पीछे-पीछे उछलते-कूदते आम के बगीचे की ओर चल पड़े।

पूरा आम का बगीचा गंदगी से भरा हुआ था।

“क्या करूँ? क्या ना करूँ? लॉकडाउन के कारण मजदूर भी नहीं आ रहे हैं।”-दादाजी ने बगीचे में घुसते ही कहा।

“दादा जी! दादा जी! क्या हम लोग आपकी सहायता कर सकते हैं? हमें बताइये तो सही, क्या करना चाहते हैं?”-गोलू ने कहा।

“हाँ दादा जी।” सभी ने एक साथ हाँ में हाँ मिलाई।

दादा जी के चेहरे पर होली की दमक, गुलाल की चमक लिए दिखने लगी थी।

फिर क्या था, सभी ने मिलकर आम के बगीचे के साथ-साथ पूरे बगीचे के फालतू जंगल और घास-फूस की साफ-सफाई कर दी।

आम का बगीचा खुश होकर चमकने लगा। फिर बगीचे वाले बोरिंग से आम के पेड़ों की सिंचाई की गई। आम का बगीचा मंजरियों से सुगंधित हो गया। कोयल कूकने लगी। बच्चे भी कोयल के साथ होली गीत गाते हुए चलने लगे।

दादाजी ने कहा- “हम सब मिलकर आम के बगीचे में ही होली मनाएंगे… इन पेड़ों के संग। फिर आम फलेंगे।”

“हाँ दादा जी! कोरोनाकाल भी नहीं रहेगा और हम ढेर सारे पेड़ भी लगाएंगे। पर्यावरण स्वच्छ रहेगा। कोरोनाकाल समाप्त हो जाएगा, तो फिर से धरती माँ खुश होकर हमें हरियाली देकर जमकर होली मनाएँगी।” -बच्चों ने एक सुर में कहा और गाने लगे-

“आम खाएंगे मीठे-मीठे।

कोरोना फिर नहीं आएगा।

चलो चलें सब मिलकर गाएं।

आई होली। आई होली।

गीत खुशी के गाते जाओ।

हंसते और हंसाते जाओ।”

इस बार की होली मजेदार हो गयी थी। गोलू, भोलू और नीलू दादाजी के साथ होली का त्योहार मनाकर बहुत खुश थे।

भारत की आजादी के 75 वर्ष (अमृत महोत्सव) पूर्ण होने पर डायमंड बुक्स द्वारा ‘भारत कथा मालाभारत की आजादी के 75 वर्ष (अमृत महोत्सव) पूर्ण होने पर डायमंड बुक्स द्वारा ‘भारत कथा माला’ का अद्भुत प्रकाशन।’

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