aesop ki kahani

Hindi kids story: एक बार की बात है, एक लोमड़ी की पूँछ एक झाड़ी में उलझ गई। उसने उसे निकालने की पुरजोर कोशिश की, पर इसी चक्कर में उसकी पूँछ का आगे वाला हिस्सा कट गया। अब तो लोमड़ी को बड़ी शर्म आई। वह सीधे घर की ओर भाग गई। कई दिनों तक वह यह सोचकर घर से नहीं निकली कि कहीं जंगल के दूसरे जानवर मेरा मजाक न उड़ाएँ।

फिर उसने सोचा, ”कोई ऐसी तरकीब निकालनी चाहिए, जिससे मैं इस शर्मिंदगी से बच जाऊँ।” उसके मन में आया कि अगर सभी लोमडिय़ों की पूँछें कट जाएँ, तो कोई मुझे दुमकटी कहकर नहीं छेड़ेगा।

आखिर उसने लोमडिय़ों की एक सभा बुलाई। उसने खड़े होकर कहा, ”आज आपको मैं एक बड़ी सच्चाई बताने जा रही हूँ। असल में अब मैं समझ गई हूँ कि हमारी पूँछ कितनी फालतू चीज है। इसे कटाकर मैं कितनी हल्की-फुल्की हो गई हूँ, आपको बता नहीं सकती। मेरी सलाह है कि अगर आप सब भी अपनी-अपनी पूँछ कटवा लें, तो मेरी ही तरह खुद को खुशकिस्मत समझेंगे।”

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सुनकर सबको बड़ी खुशी हुई। सबको लोमड़ी की बात एकदम सही लग रही थी। सभी लोमडिय़ाँ अपनी-अपनी पूँछ कटवाने जा ही रही थीं कि तभी एक बूढ़ी लोमड़ी ने उठकर पूँछ कटी लोमड़ी से कहा, ”सुनो, अगर तुम्हारी पूँछ कटी न होकर एकदम सही-सलामत होती, तो तुम हर्गिज यह बात न कहतीं। तुम्हें ये सारी बातें इसीलिए सूझ रही हैं, क्योंकि खुद तुम्हारी पूँछ कट गई है। भई, तुम अपनी बातें अपने तक ही रखो। हमें तो अपनी पूँछ बहुत पसंद है और हम इसे हरगिज नहीं कटवाएँगे।”

सुनकर लोमड़ी की हालत देखने लायक थी। शर्मसार होकर वह वहाँ से भाग खड़ी हुई।

सीख : चालाक आदमी की पोल आखिर एक -न-एक दिन खलु ही जाती है।

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