googlenews
गृहलक्ष्मी कहानियां

नैना परिवार में दूसरी बेटी थी। उसकी बड़ी बहन सीमा उससे उम्र में पांच साल बड़ी थी। वह बहुत ही सुंदर और होशियार थी। उसके जन्म पर उसकी मां को कोई ख़ुशी नहीं हुई थी बल्कि वह एक और बेटी आ जाने से बहुत निराश हो गयी थी। यही कारण था कि बचपन से ही उसे एक उदासीनता का सामना करना पड़ा था। इसका प्रभाव  उसके व्यवहार में साफ़ झलकता था।

वह सदा चुपचाप सहमी सी रहती थी। वह सदा अपनी बड़ी बहन सीमा के पीछे पीछे ही  दुबकी रहती थी। सीमा नैना को बहुत प्यार करती थी। नैना के पैदा होने के दो साल बाद उसके  छोटे भाई निहाल का जन्म हुआ। अब तो क्या था, मां  का सारा समय उसी के साथ ही बीतता था। नैना की तो उन्हें बिलकुल याद ही नहीं आती थी। सीमा ही उसका ध्यान रखती थी।

एक सामान्य परिवार में आज भी दूसरी बेटी का पैदा होना कोई ख़ुशी की बात नहीं मानी जाती है। नैना के जन्म पर भी उसके मां बाप खुश नहीं हुए थे, मानो उसका लड़की होना उसकी गलती थी। दो- दो बेटियों का बोझ कैसे उठाएंगे, यही चिंता उसके पिता को सदा घेरे रहती थी। अब वह भी बड़ी होने लगी थी। चार वर्ष की होते होते वह भी अपनी बहन के साथ स्कूल जाने लगी।

मां जब निहाल को अपने सीने से लगा कर प्यार करती तो वह भी गोदी में बैठने की जिद करती थी, पर मां उसे परे धकेल देती, यह कह कर कि तू अब बड़ी हो गयी है। नन्ही नैना का दिल बैठ जाता और वह एक कोने में जा बैठती। वह सदा खोई खोई सी रहती थी। स्कूल में भी उसका पढाई में मन नहीं लगता था। वह हमेशा अपने में ही खोई रहती थी इसलिए स्कूल में भी डांट खानी पड़ती थी।  समय बीतता गया और उसका छोटा भी स्कूल जाने लगा। वह बहुत ही कुशाग्र बुद्धि था, इसलिए जल्दी ही सब सीख जाता था। जल्द ही वह सबकी आंखों का तारा बन गया। नैना के प्रति अब सभी उदासीन होते जा रहे थे और इतना नहीं बाहर के लोगों के सामने भी अक्सर उसके मां बापू उसका मजाक भी बना देते थे ।

एक दिन परिवार में एक दूर के रिश्तेदार आये हुए थे। पिताजी ने बड़े गर्व से  अपनी बड़ी बेटी का परिचय देते हुए कहा यह मेरी बेटी नहीं बेटा है। इसने फर्स्ट डिवीज़न में बी ए पास किया है और आज ही चिट्ठी आई है, उसकी नौकरी पक्की हो गयी है। तभी नैना भी कमरे में आ गयी । उसे देख वे महाशय बोले आपकी यह बेटी क्या कर रही है? पिताजी मुस्कुराते हुए बोले हमारी यह बेटी तो बस आराम करती है। इसके बस का कुछ करना है ही नहीं। बेचारी नैना तो मानो ज़मीन में  ही गड गयी। उसकी आंखों में आंसू भर आये जो शायद किसी ने नहीं देखे। वह उल्टे पांव कमरे से बाहर चली गयी।

अब पिताजी बड़े गर्व से कह रहे थे यह मेरा बेटा नैना से दो वर्ष छोटा है पर पढ़ाई में बहुत तेज़ है। अपनी क्लास में सदा प्रथम आता है। एक नैना है कि हमारा नाम  डुबो रही है, समझ ही नहीं आता क्या करें ?

एक दिन अचानक नैना की माताजी की भेंट सुधा जी से हो गयी। सुधाजी एक मनोविज्ञान की अध्यापिका थीं और प्रतिदिन आश्रम  में सेवा के लिए जाती थी। वहीँ वे नैना जी की माताजी से मिली थी। बातों बातों में उन्होंने नैना के बारे में उन्हें बताया कि मेरी एक बेटी है वह किसी से बात नहीं करती और न ही किसी की सुनती है। बस चुपचाप अपने में ही खोई रहती है। समझ नहीं आता उसका क्या करें। सुधाजी ने उन्हें नैना के साथ अपने घर पर बुलाया।

अगले ही दिन नैना की माताजी उसे लेकर सुधाजी के घर आई। उसे देखते ही सुधाजी समझ गयी कि वह बच्ची हीन भावना से पीड़ित है। उन्होंने नैना को पास बिठाया और उससे बात करने की कोशिश की पर उसने कुछ भी जवाब नहीं दिया, बस सर झुका कर बैठी रही। सुधाजी ने नैना को रोज़ अपने घर बुलाना शुरू किया। धीरे धीरे उनके सामने खुलने लगी और उनकी बात सुनकर मुस्कुराती भी। उसे पेंटिंग का बहुत शौक था। सुधाजी ने उसके इसी शौक को आधार बनाया। उसकी पेंटिंग की जब वह प्रशंसा करती तो वह बहुत खुश हो जाती और खिल उठती थी। अब वह चहकने लगी थी। उसके व्यवहार में भी परिवर्तन आने लगा था। सुधाजी ने नैना के माता पिता से भी अलग से बात की। उन्हें भी अपनी गलती का अहसास हो गया था। जब उन्होंने नैना द्वारा बनी पेंटिंग्स देखी तो वे भी देखते रह गए। नैना के हाथों में जादू था। रंगों ने उसके सामने एक नयी दुनिया ही खोल दी थी। पिताजी ने नैना को गले से लगा लिया।

नैना को तो मानो पूरा जहां ही मिल गया और वह सुबकने लगी। पास बैठी माताजी की आंखें भी नम हो चली थी। अब नैना को अपना खोया विश्वास ही नहीं,  खोया परिवार भी मिल गया था। नैना फिर से जी उठी थी।

यह भी पढ़ें –सरप्राइज गिफ्ट – गृहलक्ष्मी कहानियां

-आपको यह कहानी कैसी लगी? अपनी प्रतिक्रियाएं जरुर भेजें। प्रतिक्रियाओं के साथ ही आप अपनी कहानियां भी हमें ई-मेल कर सकते हैं-Editor@grehlakshmi.com

-डायमंड पॉकेट बुक्स की अन्य रोचक कहानियों और प्रसिद्ध साहित्यकारों की रचनाओं को खरीदने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें-https://bit.ly/39Vn1ji