Immunity Boosting Yogasan: वातावरण में फैल रहे स्मॉग या वायु प्रदूषण का जंजाल बनता जा रहा है। जो हमारी सेहत के लिए कई सिगरेट एक साथ पीने के समकक्ष हानिकारक है। हवा में घुली जहरीली गैसें सांस के जरिये हमारे शरीर के अंदर पहुंच कर फ्री-रेडिकल्स बनाती हैं जिनका असर हमारे स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। सांस लेने में दिक्कत होना, गले में खराश या, सिर दर्द, आंखों में जलन या खुजली होना, उल्टी, पेट दर्द जैसी समस्याएं देखी जा सकती हैं। जो कालांतर में अस्थमा और सांस संबंधी दिक्कतें हो जाती हैं, फेफड़ों की कार्यक्षमता को प्रभावित करता है, हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट अटैक, डायबिटीज, साइनोसाइटिस जैसे गले या फेफडों मे इंफेक्शन जैसी बीमारियों का कारण बन सकता है।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस प्रदूषण से बचाव के लिए हमारी इम्यूनिटी का मजबूत होना जरूरी है। और हमारी इम्यूनिटी मजबूत करने में स्वस्थ जीवनशैली अहम भूमिका निभाती है, जिसमें हेल्दी खानपान और एक्टिव दिनचर्या होना जरूरी है। आलम यह है कि प्रदूषण की घनी चादर के तले बाहर निकलना सेहत के लिए दुष्वार हो रहा है और घर पर ही व्यायाम करना उपयुक्त माना जा रहा है। इनमें योग बहुत सहायक है जिसमें विभिन्न योगासनों के माध्यम से फेफड़ों को मजबूत किया जा सकता है और प्रदूषण से बचा जा सकता है।
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ताड़ासन

दोनों पैरों को एकसाथ जोड़कर खडे हो जाएं। धीरे-धीरे हाथ उठाते हुए और लंबी सांस अंदर लेते हुए अपने पंजों पर खड़े हों। पंजे के बल खड़े होकर अपने शरीर को बैलेंस रखना है, इसके लिए एक ही पाइंट पर देखते रहें जैसे-दीवार, किसी भी बिंदू, पेंटिंग। कम से कम 10 सेकंड सांस रोके रहें। सांस धीरे-धीरे छोड़ते हुए हाथ नीचे लाएं और वापस अपनी पोजीशन में वापस खड़े हो जाएं।
फायदे: यह आसन बैलेंस मेंटेन करता है, दिमाग को रिलेक्स करता है, स्ट्रेस कम होने से इम्यूनिटी बढ़ती है। नर्व्स मजबूत होती हैं।
पवनमुक्तासन

ये आसन शरीर में रक्त संचार को बढ़ाने में सहायक है। इसमें पीठ के बल लेट जाएं। पैरों को एकसाथ मिला लें। हाथों को शरीर के बगल में जोड़कर रखें। गहरी सांस लेते हुए दोनों पैरों को सीधा ऊपर 90 डिग्री एंगल पर उठाएं। सांस छोड़ते हुए दोनों घुटनों को हाथों से कसकर पकड़कर वक्ष के पास ले जाएं। माथे से घुटनों पर छूने की कोशिश करें। इस पोजीशन में नॉर्मल ब्रीदिंग करें। कम से कम 5-10 सैकंड रुकें। जैसे हम गए थे, धीरे-धीरे वापस उसी पोजीशन में आ जाएं।
फायदे: यह आसन करने से फेफड़ों के फैलाव के लिए पूरा प्रेशर डालता है, फेफड़ों स्ट्रेच हो जाते हैं जिससे सांस लेने में तकलीफ नहीं होती। इससे एब्डोमेन मसल्स मजबूत होती हैं, डायजेशन प्रक्रिया को सुचारू रूप से चलाता है जिससे गैस, बदहजमी जैसी पेट संबंधी बीमारियों को कम करता है। लिवर की हैल्थ इम्प्रूव होती है और इम्यूनिटी बढ़ती है।
मकरासन

पेट के बल लेट जाएं। दोनों हाथ जोडकर आगे की ओर खींचें। पैरों को नीचे की ओर खीचें जैसे दंडवत प्रणाम करते हैं।
फायदे: इससे फेफड़ों में होने वाली कंजक्शन में आराम मिलता है। नियमित रूप से इस आसन को करने से सांस लेने में होने वाली कठिनाई कम होती है। स्पाइन और पैरों की मसल्स को रिलेक्स करता है।
भुजंगासन

पेट के बल लेटकर दोनों हाथों को कंधे के नीचे कोहनी मोड़ कर रखें। दोनों कोहनियों को शरीर से सटाकर रखें। सांस अंदर लेते हुए गर्दन धीरे-धीरे ऊपर की तरफ उठाएं और ऊपर एक पाइंट पर देखते रहें, कमर तक स्ट्रेच करते हुए उठे। कुछ देर इसी पोजिशन में रहें और डीप ब्रीदिंग करें। धीरे से सांस छोड़ते हुए वापस आएं।
फायदे: यह आसन लंग्स और पेट के विभिन्न अंगों की मजबूती में सहायक है। लिवर के कार्यों को सुचारू रूप से चलाने में मदद करता है। स्पाइन को हैल्दी रखने से नर्व्स मजबूत होती हैं और इम्यूनिटी बूस्ट होती है।
योग मुद्रासन

व्रजासन में बैठ जाएं। इसके लिए घुटने मोड़कर पंजों के बल सीधा बैठें। दोनों पैर के अंगूठे आपस में मिले हों और एड़ियों में थोड़ी दूरी हो। शरीर का सारा भार पैरों पर रखें। कमर से ऊपर का हिस्सा बिल्कुुल सीधा रखकर पैरों पर बैठ जाएं। दोनों हाथों की मुट्ठी बनाकर पेट में धुन्नी के दोनों तरफ हल्का-सा प्रेशर देते हुए रखें। सांस बाहर निकालते हुए आगे की तरफ झुकें। आगे की ओर झुकते हुए अपना माथा घुटने के आगे जमीन को छुएं।
फायदे: यह आसन ऐब्डोमेन मसल्स को मजबूत करने, डायजेशन दुरुस्त कर इम्यूनिटी बढ़ाने में मदद करता है।
गोमुखासन

आलती-पालती मारकर आराम से बैठ जाएं। कमर सीधी रखें। दाएं पैर को बाएं पैर की जांघ पर रखकर दोनों पैर शरीर के पास लाएं। दाएं हाथ ऊपर कंधे से पीठ की तरफ जितना हो सके ले जाएं। बाएं हाथ नीचे कमर से पीठ की तरफ लेकर जाएं। दोनों हाथ पकड़े। कुछ देर इसी तरह रहें। 10-12 बार सांस लें। धीरे-धीरे अपनी पहले वाली स्थिति में आ जाएं।
फायदे: यह फेफड़ों की मजबूती और डिटॉक्सीफिकेशन के लिए बहुत अच्छा योगासन है। स्ट्रेस दूर करने में भी सहायक है।
ओम उच्चारण

आखिर में ओम का उच्चारण करना बहुत जरूरी है। यह एक तरह की मेडिटेशन है। ओम को 3 हिस्सों में बांटकर आसन करें-आए ऊ और म। आ और ऊ हार्ट के लिए महत्वपूर्ण है। किसी भी पॉजिशन में कमर सीधी रखकर आराम से बैठ जाएं। लंबी सांस लेकर पूरा पेट फुला लें। आ का उच्चारण करते हुए सांस बाहर निकालें और पेट को अंदर खींचें। ‘ऊ’ करते हुए छाती को रिलेक्स करते हुए ‘म’ के उच्चारण के साथ वापस पॉजिशन में आ जाएं। दोबारा दोहराएं।
रखें सावधानी
- -योगासन करने में जल्दबाजी न बरतें। धीरे-धीरे करें। हरेक आसन कम से कम दो बार करें। ये आसन हर आसन करने के बाद 5 सेकंड का ब्रेक लें जिसमें डीप ब्रीदिंग करें।
- – दिन में आप किसी भी समय कर सकते हैं। खाना खाने के कम से कम 2 घंटे बाद और योगासन करने के आधे घंटे बाद ही खाना खाना बेहतर है।
- – सभी उम्र के लोग ये आसन कर सकते हैं।
(डॉ अंजलि शर्मा, योगा एक्सपर्ट, नई दिल्ली)
