पति-पत्नी के रिश्ते -विवाह के बंधन में बंधने वाले स्त्री -पुरुष जब एक होने का अहसास लिए सात फेरे लेते हैं तो अनजाने में ही वो इस परिभाषित रिश्ते से परे एक दूसरे को अपना हमदर्द, दोस्त बनाने की राह पर निकल पड़ते हैंमैं स्त्री की नज़रिए से देखूं तोलगता है शायद वो जानती है […]
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एक्सक्यूज मी—गृहलक्ष्मी की कहानियां
एक्सक्यूज मी… ‘ मैं आपसे दोस्ती करना चाहता हूं।’ राह चलते एक अनजानेनौजवान ने सुहानी को रोक कर यह इजहार किया था। गुस्से में तमतमाए, लालसुर्ख चेहरे के साथ सुहानी ने उसकी ओर कुछ यूं देखा कि वह दो कदम पीछे हटगया। शायद इस मूक चेतावनी के लिए पहले से तैयार था। और कुछ पल […]
लचकती सब्जी और पतला भात-21 श्रेष्ठ लोक कथाएं उत्तर प्रदेश
लचकती सब्जी और पतला भात-दो भाई बूढ़ा-बूढ़ी के घर सहभागिता निभाने चले गए थे। उन्होंने सोचा था कि उन्हें दोपहर और सांय बढ़िया स्वादु भोजन खाने को मिलेगा। इस कारण उन्होंने मन लगाकर उनका काम किया था। दोपहर को तो उन्हें उनका मन भावन खाना नहीं मिला। उन्होने थोड़ा-थोड़ा खाना ही खाया था। उन दोनों […]
रिश्तों को पैसे से ना तोलो—दुखद हिंदी कहानियां
रिश्तों को पैसे से ना तोलो-“हैलो गिरीश बाबू …मैं रानी बोल रही हूँ। रमा बहुत बीमार है। यहाँ के डाॅक्टर को दिखाया तो उन्होंने कहा है की शहर में किसी बड़े डाॅक्टर को दिखाओ। इस सरकारी अस्पताल में उतनी सुविधाएं नहीं हैं। आप क्या कहते हैं बाबू?”दूसरी तरफ से गिरीश ने कहा “भाभी ये भी […]
किताबी बगीचा-21 श्रेष्ठ बालमन की कहानियां गुजरात
किताबी बगीचा-शुक्रवार को शाला से वापस घर लौटते वक्त टिकूडा ने कहाः “अगले दिन शनिवार है। उद्यान में पढ़ने के लिए जाना है। तुझे आना हो तो तैयार होकर रहना।” शाम को अखाड़े में हुतुतुतु खेलते-खेलते यह बात होती थी। शाला से छूटकर सबसे पहले सीधा घर पर जाते स्कूल, बैग रखकर, हाथ-पैर धोकर बाद […]
मेहनत का फल-21 श्रेष्ठ बालमन की कहानियां बिहार
मेहनत का फल-प्रिया और छाया एक ही कक्षा में पढ़ती थीं। दोनों पक्की सहेलियां थीं। और सब कुछ तो ठीक था, लेकिन दोनों में एक बहुत ही बुरी आदत थी। आज का काम कल पर डाल देने की लत ने दोनों को कई बार शर्मिन्दा किया था। लेकिन उनकी आदत जा नहीं रही थी। इस […]
चूहा और हाथी-21 श्रेष्ठ लोक कथाएं हिमाचल प्रदेश
चूहा और हाथी-एक नदी के तट पर हाथी स्नान करने आता था। वहीं पर एक चूहा भी नहाने आता था। उन दोनों की आपस में अच्छी जान पहचान हो गई थी। एक दिन अचानक दोनों के बीच बोल-ठोकर हो गई। बहस करते-करते वे आपस में लड़ ही पड़े। एक दूसरे को अपनी-अपनी हेकड़ी दिखाने लगे। […]
फूल बनाम फूल-गृहलक्ष्मी व्यंग्य
गृहलक्ष्मी व्यंग्य-फूल,जी हां मैं फूल हूं,अंग्रेज वाला नहीं हिंदी वाला फूल सुंदर, सुगन्धित और मनमोहक फूल। चाह नहीं मैं सुरबाला के गहनों में गूथा जाऊं… वही वाला फूल। ये बात हुई फूल की अब बात होगी फूल की। जी हां, अंग्रेजी वाले फूल की… दुर्भाग्य वश जो की हम हैं, हम मतलब मिश्रा जी। मिश्रा […]
चार दोस्तों की कहानी-21 श्रेष्ठ लोक कथाएं हरियाणा
चार दोस्तों की कहानी-चार पक्के दोस्त थे। एक खाती था, एक दर्जी था, एक सुनार था और एक ब्राह्मण था। उनमें से किसी का काम नहीं चल रहा था। थे तो गुणी पर किस्मत आड़े आ रही थी। चारों ने मशविरा किया की हमारी, हमारे हुनर की यहाँ कद्र नहीं है, क्यों न परदेश जाकर […]
जूएं-21 श्रेष्ठ लोक कथाएं उत्तर प्रदेश
जूएं-बहुत पुराने समय की बात है, रातकू कार्य करने में बहुत कम श्रम लगाता था। वह सब-कुछ बैठे-बिठाए पाना चाहता था। बस वह अपनी दादी मां से मुफ्त और हर वस्तु मिलने के लिए पूछता रहता था। उसकी दादी ने उसे कई बार समझाया कि परिश्रम के साथ कमाया हुआ ही फलता-फूलता है। जो आदमी […]
