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मेहनत का फल-21 श्रेष्ठ बालमन की कहानियां बिहार
Mehnat ka Fal-Balman ki Kahaniya

भारत कथा माला

उन अनाम वैरागी-मिरासी व भांड नाम से जाने जाने वाले लोक गायकों, घुमक्कड़  साधुओं  और हमारे समाज परिवार के अनेक पुरखों को जिनकी बदौलत ये अनमोल कथाएँ पीढ़ी दर पीढ़ी होती हुई हम तक पहुँची हैं

मेहनत का फल-प्रिया और छाया एक ही कक्षा में पढ़ती थीं। दोनों पक्की सहेलियां थीं। और सब कुछ तो ठीक था, लेकिन दोनों में एक बहुत ही बुरी आदत थी। आज का काम कल पर डाल देने की लत ने दोनों को कई बार शर्मिन्दा किया था। लेकिन उनकी आदत जा नहीं रही थी। इस आदत के कारण उनकी पढ़ाई किसी न किसी बहाने टलती रही। साल भर यूं ही मौज-मस्ती में दोनों ने काट डाले। दोनों ने पढ़ाई की कुछ सुधि नहीं ली। जब वार्षिक परीक्षाएं सिर पर आ गईं, तब उन्हें एहसास हुआ कि हमने बहुत बड़ी गलती कर डाली है। पढ़ाई तो कुछ की ही नहीं। तैयारी एकदम शून्य है।

परीक्षा में लिखा क्या जाएगा, कुछ सूझता न देखकर प्रिया ने नकल कर परीक्षा पास कर लेने की योजना बनायी। अपनी योजना को उसने जया के सामने रखा। दूसरा कोई रास्ता नहीं मिल पाने के कारण जया भी आखिरकार थोड़ी ना-नूकुर के बाद सहमत हो गई।

परीक्षा का समय निकट आ गया। परीक्षा अगले दिन से आरंभ होने वाली थी। रात में ही दोनों सहेलियों ने छोटे-छोटे पुों में संभावित प्रश्नों के जवाब लिख लिए और कपड़ों के बीच यथासंभव नहीं दिख सकने वाले स्थानों में पर्चियां छिपाकर परीक्षा भवन पहुंच गई। यथासमय परीक्षा प्रारंभ हुई। किसी भी सवाल का कोई जवाब प्रिया और जया को कुछ याद ही नहीं आ रहा था। याद आता भी कैसे, पढ़ाई दोनों ने की थी ही नहीं। फिर भी वह दोनों अभी थोड़ा निश्चिंत-सा महसूस कर रही थीं और ऐसा इसलिए क्योंकि पूरे पांच सवाल प्रश्न पत्र में ऐसे थे जो उनकी पर्चियों में उत्तर सहित मौजूद थे।

पर दिक्कत यह थी कि पर्चियां निकालकर लिखा कैसे जाए। ऐसा वह पहली बार कर रही थीं। ऊपर से घबराहट ने उनका और भी बुरा हाल कर रखा था। इससे पहले कि वह पर्चियां निकाल पातीं, विद्यालय निरीक्षक ने विशेष जांच के लिए कक्षा में प्रधानाचार्य समेत प्रवेश किया। जांच के दौरान प्रिया व जया के पास से पर्चियां बरामद हुईं, तो निरीक्षक महोदय ने उन्हें खूब डांटा-फटकारा और उनकी उत्तर पुस्तिकाएं वापस ले लीं। इतना ही नहीं, उन्हें बाकी की पूरी परीक्षा के लिए निष्कासित भी कर दिया। सभी छात्र-छात्राओं के सामने इस तरह के अपमान से दोनों इतना शर्मिंदा हुई कि उनकी रूलाई छूट पड़ी।

इतने पर ही बस नहीं हुआ। जब वह अपना-सा मुंह लिए घर पहुंची, तो सारी बातें जानने के बाद उनके माता-पिता ने भी उन्हें जबरदस्त झाड़ लगायी। उन्हें घर में भी काफी अपमानित होना पड़ा। परीक्षा देने से वंचित रह जाने के कारण परीक्षा में दोनों असफल घोषित हुई। नए साल में फिर से उन्हें पुरानी कक्षा में ही बैठना पड़ रहा था। अपने को अपने से जूनियर छात्र-छात्राओं के बीच पाकर वह शर्म से गड़ी जा रही थीं। वर्ग शिक्षिका उनकी स्थिति को महसूस कर रही थीं, इसलिए उन्होंने उन्हें शर्मिदा नहीं किया। बल्कि उन्होंने उनके हौसले को बढ़ाया और भला-बुरे तथा सही-गलत का बोध कराते हए खब मन लगाकर पढने को प्रेरित किया।

कक्षा में वह उन्हें समय का सदुपयोग करने की सलाह देतीं। शिक्षिका का स्नेह देखकर दोनों ने प्रण कर लिया कि वे अब खूब मन लगाकर पढ़ाई करेंगी। अब वह न तो फिजूल समय बर्बाद करतीं और न ही खेलकूद में समय लगातीं।

आखिरकार उनकी लगन ने रंग दिखाया और अगले वर्ष की वार्षिक परीक्षा में दोनों न सिर्फ अव्वल अंकों के साथ उत्तीर्ण हुईं, बल्कि उन्हें उस वर्ष संयुक्त रूप से ‘बेस्ट स्टूडेंट ऑफ द ईयर’ भी घोषित किया गया। प्रधानाचार्य के हाथों एनुअल फंक्शन में पारितोषिक प्राप्त करते वक्त उन दोनों की खुशी का ठिकाना न था। दोनों पंख लगा कर अपने घर के लिए उड़ जाना चाहती थीं, ताकि अपने माता-पिता की नजरों में फिर से अपने लिए प्यार देख सकें

भारत की आजादी के 75 वर्ष (अमृत महोत्सव) पूर्ण होने पर डायमंड बुक्स द्वारा ‘भारत कथा मालाभारत की आजादी के 75 वर्ष (अमृत महोत्सव) पूर्ण होने पर डायमंड बुक्स द्वारा ‘भारत कथा माला’ का अद्भुत प्रकाशन।’

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