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Control obesity with hormonal balancing therapy

Hormonal Balancing Therapy: मोटापे की समस्या आजकल बढ़ती जा रही है। वजन कम करना लोगों के लिए बड़ी चुनौती है। हालांकि वजन कम करने के लिए बाजार में अनेक तकनीक, दवाईयां औरव्यायाम उपलब्ध हैं लेकिन अक्सर वे भी अपना असर नहीं दिखा पाती। इस बारे में दिल्ली के डाइटीशियन डॉ. लोकेंद्र तोमर का कहना है कि अपने अत्यधिक वजन से परेशान लोग वजन कम करने के लिए कई पैंतरे अपनाते हैं, लेंकिन ये जानने की कोशिश नहीं करते हैं कि मोटापा बढऩे की असली वजह क्या है। अधिकतर महिलाओं में मोटापा उनके गलत खानपान के अलावा उनके शरीर में मौजूद हार्मोंस में असंतुलन से भी होता है।

हार्मोनल बैलेंसिंग थेरेपी

‘हार्मोनल बैलेंसिंग’ थेरेपी वजन कम करने का एक प्रभावशाली तरीका है। हमारे शरीर में 600 के लगभग हार्मोन होते हैं, जिनमें- इंसुलिन, लेप्टिन,घ्रेलिन, थायरॉइड, ऐस्ट्रोजेन, प्रोजेस्टेरॉन, प्रोलैक्टिन और टेस्टोस्टेरॉन मुख्य हैं। इनमें से चार हारर्मोन प्रमुख रूप से वजऩ बढ़ाने के लिए जिम्मेदार होते हैं, जैसे कि- इंसुलिन, थायरॉइड, कोर्टिसोल और ऐस्ट्रोजेन। इन्हें हम मोटापे की चौकड़ी भी कह सकते हैं। इनमें से किसी एक का भी असंतुलन शरीर के तालमेल को बिगाड़ सकता है।

एक बार हमें पता लग जाए कि आपके शरीर में कौन सा हार्मोन गड़बड़ है तो वजन को आसानी से कंट्रोल किया जा सकता है। हार्मोनों में असंतुलन की वजहहमारे शरीर में होने वाले हार्मोनल असंतुलन की शुरुआत हमारे आहार व पोषण में असंतुलन से होती है। आजकल का खानपान बाहर के भोजन पर ज्यादा आधारित है। हम ये भी कह सकते हैं कि बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने दुनिया भर में लोगों के खान-पान की आदतों को बहुत बड़े पैमाने पर बदल डाला है।

जीवनशैली में हुए इन परिवर्तनों की वजह से मोटापे समेत कितने ही रोग उत्पन्न हो रहे हैं। यदि आप आहार, पोषण व हार्मोन के परस्पर संबंध को समझेंगे तो आप स्थायी तौर पर वजन घटाने कामयाब हो सकते हैं। शरीर के संकेतों को समझें जब आप अपने शरीर की अनूठी बायोलॉजी को समझ जाएंगे तो आपको मालूम हो जाएगा कि आपके जिस्म को किस तरह का खाना सूट करता है और इस नियम का पालन करना आपके लिए सरल हो जाएगा।

उदाहरण के लिए यदि किसी व्यक्ति को शाम के मुकाबले सुबह भूख कम महसूस होती है तो उसे थायरॉइड पैटर्न हो सकता है। थायरॉइड पैटर्न वाले व्यक्ति के लिए जूस और सलाद सबसे बढिय़ा नाश्ता है। और यदि किसी व्यक्ति को शाम कम तथा सुबह बहुत भूख लगती है तो उसका ऐड्रेनल बॉडी पैटर्न मुमकिन है। ऐसे व्यक्ति सुबह ऑमलेट और थोड़े सलाद का नाश्ता कर सकते हैं। यदि कोई भी व्यक्ति अपने बॉडी पैटर्न के मुताबिक ही अपनी खुराक रखेगा तो वह आसानी से वजन कम कर सकता है।

इसी तरह यदि किसी 30 वर्षीय महिला को 12 वर्ष की आयु में मासिक धर्म शुरू हो गया हो, उनकी नानी को 15 वर्ष की आयु में माहवारी आरंभ हुई हो तो संभव है कि उस महिला की बेटी को 10 वर्ष की आयु में मासिक धर्म शुरू हो जाए। ऐसा क्यों? इसकी वजह है खानपान की गलत आदतें जिनकी वजह से ऐस्ट्रोजन हार्मोन में असंतुलन पैदा होता है। इन हार्मोनों को आहार की मदद से संतुलित करना आसान है और इसका असर जीवन भर रहता है।बस आप अपने शरीर के संकेतों को समझें।

कैसे काम करती है तकनीक

हमारा शरीर 70 प्रतिशत पानी, 15 प्रतिशत वसा, 10 प्रतिशत प्रोटीन तथा विटामिनों, एंजाइमों और खनिजों से निर्मित है इसलिए ये घटक हमारे भोजन में अवश्य होने चाहिए। हालांकि आप यह जान कर हैरान होंगे कि हमारे भोजन का 80-90 प्रतिशत हिस्सा केवल कार्बोहाइड्रेट होता है।जब हम कार्बोहाइड्रेट खाते हैं तो यह शुगर में बदल जाता है। यह शुगर खून में पहुंचती है और वहां से उपयोग हेतु शरीर की कोशिकाओं मेंपहुंचती है। शुगर स्वयं कोशिकाओं तक नहीं पहुंच सकती बल्कि इसे ले जाने के लिए एक वाहक चाहिए होता है और वह वाहक है इंसुलिन, जो शुगर को कोशिकाओं तक पहुंचाता है।

हमारे शरीर को ऊर्जा के लिए जितनी शुगर चाहिए होती है वह ईंधन के तौर पर उसकी खपत करता है और बची हुई शुगर की अतिरिक्त मात्रा को लिवर वसा में परिवर्तित कर देता है। लिवर को वसा उत्पादन का आदेश देने में इंसुलिन हार्मोन बड़ी भूमिका निभाता है। ऐसे में हमारा पहला कदम है इंसुलिन हार्मोन को संतुलित करना। ऐसा करने से शरीर वसा जलाने वाली मशीन बन जाएगा वो भी बिना किसी भारी कसरत के, भूखे रहे बगैर,कैलोरी पर पाबंदी लगाए बिना। एक बार आप यह प्रक्रिया शुरू कर दें तो वसा 48 घंटों में जलना शुरू हो जाती है और साथ ही शुरू हो जाता है आपके वजन का नियंत्रण भी।