Hindi Poem: मुझसे मुझको शिक़ायतें बहुत हैं, आओ, तनिक बैठो मेरे पास, सब तुमको बतलाऊँ। सोचती हूँ, एक बार सुन ली जाए, और धीरे-धीरे सबमें सुधार किया जाए। बात-बात में क्यों हो जाती मैं उदास, रखती क्यों सबसे इतनी आस। क्यों अपने मन का मैं नहीं करती, फ़िज़ूल बातों को मन में भरती। क्यों न मैं समय नियोजन की […]
Category: कविता-शायरी
उसका कोना-गृहलक्ष्मी की कविता
Hindi Poem: घर के छुपे हुए कोने,जहाँ नजर ठहरती नहीं,जहाँ ठहरती है आहत सिसकियां,कभी सुकून के मौन क्षण,और कभी छूटी हुई सहेलियाँ,वो बिछड़ी हुई प्रेम कहानियाँ,ख्यालों में हुई वो मुलाकातें,अनछुए सलोने से सपने,बे रोनक दिन को सजाते हाथ,और खुद से खुद की सहलाती बात,इन्ही छुपे हुए कोनों में,रखें होते हैं उसने औरत होने के अहसास,अजनबी […]
वो गुलाल प्रियतम का-गृहलक्ष्मी की कविता
Hindi Poem: गुलाल सा वो रंगाजब गालो को,आत्मा तक रंग गया,मेरे प्यासे अधरों का सावन ,वो छलिया फागुन में बन गया ।निखर गई मैं,बिखर गई मैं,कैसे अब संभालूं खुद को,जबसे उसका चढ़ा गुलाल,एक नशा सा चढ़ गया।देख रही कभी उसको मै,कभी गालों पर गुलाल देखती हूं,छूटे से कभी छूटे ना,ऐसे रंग मे मुझको ,वो सांवरिया […]
ओ मेरे घनश्याम रे—गृहलक्ष्मी की कविता
Hindi Poem: रंगों से रंग दे चूनर कोचटक रंग में श्याम रेऐसी होली खेलो संग मेंओ मेरे घनश्याम रे काली काली तोरी सूरतराधा जी को भावे रेगोप गोपियाँ तुम्हें बुलावेओ मेरे घनश्याम रे बरसाना की राधा रानीगोकुल को घनश्याम रेधूम मचा दे जमुना तट परओ मेरे घनश्याम रे ब्रज की गलियां रंग बिरंगीसबके मन को […]
“अपराजिता है स्त्री”-गृहलक्ष्मी की कविता
Hindi Women Poem: अपराजिता की बेल हूं मैं,कहां दफन हो पाती हूं? चाहें कोई भी मौसम हो, हर हाल में मैं मुस्काती हूं।चाहें कितने पतझड़ आयें,मैं फिर से खड़ी हो जाती हूं। चाहें कितनी चलें आंधियां,चाहें कितने उठे तूफान,अस्तित्व अपना स्वयं बनाती,स्वाभिमान से मैं भर जाती हूं। बड़े-बड़े पौधे (सूरमा) भी मुझसे,प्रेरणा पाते जीवन की,कितनी […]
मैं एक औरत हूं—गृहलक्ष्मी की कविता
Women Poem: मैं एक औरत हूंएक अहसास, कुछ फरियाद, बुनियाद |मै एक औरत हूँ |बनाती घर, बनाती एक पूरा परिवार,जज़्बातो से और अहसासों से, नहीं मिटने देती किसी का मन |मै शायद एक कलाकार हूँ |मै एक औरत हूँ |कभी बेटी, बहु, गृहणी कितने रूप मेरे ,सजजनता और मर्यादा में परोसी एक व्याख्या हूँ |मै […]
नारी – शक्ति का अवतार
Hindi Poem: नारी शक्ति का अवतार , नारी शक्ति अपरम्पार ।जिस घर में नारी पूजित हैदेवों का होता है वास ,सुख-वैभव से भरा रहे घरलक्ष्मी करती सदा निवास ।दुःख-दरिद्रता मिट जाती है , उन्नति करता है परिवार ।नारी शक्ति का अवतार , नारी शक्ति अपरम्पार ।त्रिदेव जहाँ असफल होते हैंशक्ति देतीं उनका साथ ,देवों की ताकत बन जातींदे उनके हाथों में हाथ ।पाप विमुक्त किया धरती को, असुरों का करके संहार ,नारी शक्ति का अवतार , नारी शक्ति अपरम्पार […]
जो प्रेम प्रकट ना किया जाए वही पवित्र प्रेम है-गृहलक्ष्मी की कविता
Hindi Poem: निहार रहा चांद गुलाब को अपनेपर नियति उसकी रही कि …कभी उससे मिल ना सका।बिखेर दी चांदनी अपनी-अपने गुलाब पर उसने,जब पल दो मिलन के चांद गुलाब संग पा ना सका।जवां था चांद पूरा,पर प्रियतम के वियोग में,धीरे-धीरे घटता गया।घटना रहा आकार उसका,अमावस के गर्त में वो फंसता गया।उधर गुलाब भी जो जवान सुर्ख लाल था,मिलन की तड़प में चांद […]
जब मैं चली जाऊँगी-गृहलक्ष्मी की कविता
Hindi Poem: मेरी आहटें वीरान होह्रदय तल से गुजरेगीतुम बार-बार पुकारोगेमैं लौटकर नही आऊँगीजब मैं चली जाऊँगी। आँखों मे अश्क लिएतस्वीरों को दिल मे सहेजेयादों के झरोखे संगतुम हर-बार ढूंढोगेमैं नही मिल पाऊँगीजब मैं चली जाऊँगी। दिल की अनकही बातेंतन्हा मन की यादें मेंभावनाओं की पीड़ा सेतुम बार-बार तड़पोगेमै नहीं सुन पाऊँगीजब मै चली जाऊँगी। […]
रिश्तों से मिट जाए-गृहलक्ष्मी की कविता
Hindi Poem: रिश्तों से मिट जाए खटास मेरे मौलाहर ज़ुबां पे हो बस मिठास मेरे मौलाजहान भर में सारे तू ही था बस मेराक्यूं तुझको फिर नहीं है एहसास मेरे मौलामैं जी रहा हूं कैसे ये मैं ही जानता हूंसाथ नहीं है था जो मुझे ख़ास मेरे मौलाज़िन्दगी की ये नैया पार कैसे होगीइक ही […]
