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तनिक बैठो मेरे पास…..-गृहलक्ष्मी की कविता

Hindi Poem: मुझसे मुझको शिक़ायतें बहुत हैं,  आओ, तनिक बैठो मेरे पास, सब तुमको बतलाऊँ। सोचती हूँ, एक बार सुन ली जाए, और धीरे-धीरे सबमें सुधार किया जाए। बात-बात में क्यों हो जाती मैं उदास,  रखती क्यों सबसे इतनी आस।  क्यों अपने मन का मैं नहीं करती,  फ़िज़ूल बातों को मन में भरती। क्यों न मैं समय नियोजन की […]

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