Hindi Poem: मुझसे मुझको शिक़ायतें बहुत हैं, आओ, तनिक बैठो मेरे पास, सब तुमको बतलाऊँ। सोचती हूँ, एक बार सुन ली जाए, और धीरे-धीरे सबमें सुधार किया जाए। बात-बात में क्यों हो जाती मैं उदास, रखती क्यों सबसे इतनी आस। क्यों अपने मन का मैं नहीं करती, फ़िज़ूल बातों को मन में भरती। क्यों न मैं समय नियोजन की […]
