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रिश्तों से मिट जाए-गृहलक्ष्मी की कविता

Hindi Poem: रिश्तों से मिट जाए खटास मेरे मौलाहर ज़ुबां पे हो बस मिठास मेरे मौलाजहान भर में सारे तू ही था बस मेराक्यूं तुझको फिर नहीं है एहसास मेरे मौलामैं जी रहा हूं कैसे ये मैं ही जानता हूंसाथ नहीं है था जो मुझे ख़ास मेरे मौलाज़िन्दगी की ये नैया पार कैसे होगीइक ही […]

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