Women Poem: मैं एक औरत हूं
एक अहसास, कुछ फरियाद, बुनियाद |
मै एक औरत हूँ |
बनाती घर, बनाती एक पूरा परिवार,
जज़्बातो से और अहसासों से, नहीं मिटने देती किसी का मन |
मै शायद एक कलाकार हूँ |
मै एक औरत हूँ |
कभी बेटी, बहु, गृहणी कितने रूप मेरे ,
सजजनता और मर्यादा में परोसी एक व्याख्या हूँ |
मै एक औरत हूँ |
जीवन की परिभाषा समझाती, दुसरो के लिए गुनगुनाती, लोरी सुनाती,
मै एक निर्भय औरत हूँ |
मुझे जानो पहचानो, मै मिश्री हूँ और मिर्च भी, मै काली और दुर्गा भी हूँ |
मै एक कलाकार की कृति एक औरत हूँ |
सबको मेरा नमन |
कलाओ से कृत एक अहसास
मै एक औरत हूँ |
मैं नदी की तरह निर्मल और पर्वत की तरह जटिल हूँ.
मै सुंदर भी , सुदर्शन भी,
मै एक कलाकृति, एक आकर्षण भी ,
मुझ में समाई सारी कलाएं ,
मै आज भी और परिवर्तन भी |
सीखो मुझसे जीने का सलीखा,
मै औरत हूँ और देती तुम्हे भरोसा
एक अहसास, कुछ फरियाद, बुनियाद |
मै एक औरत हूँ |
बनाती घर, बनाती एक पूरा परिवार,
जज़्बातो से और अहसासों से, नहीं मिटने देती किसी का मन |
मै शायद एक कलाकार हूँ |
मै एक औरत हूँ |
कभी बेटी, बहु, गृहणी कितने रूप मेरे ,
सजजनता और मर्यादा में परोसी एक व्याख्या हूँ |
मै एक औरत हूँ |
जीवन की परिभाषा समझाती, दुसरो के लिए गुनगुनाती, लोरी सुनाती,
मै एक निर्भय औरत हूँ |
मुझे जानो पहचानो, मै मिश्री हूँ और मिर्च भी, मै काली और दुर्गा भी हूँ |
मै एक कलाकार की कृति एक औरत हूँ |
सबको मेरा नमन |
कलाओ से कृत एक अहसास
मै एक औरत हूँ |
मैं नदी की तरह निर्मल और पर्वत की तरह जटिल हूँ.
मै सुंदर भी , सुदर्शन भी,
मै एक कलाकृति, एक आकर्षण भी ,
मुझ में समाई सारी कलाएं ,
मै आज भी और परिवर्तन भी |
सीखो मुझसे जीने का सलीखा,
मै औरत हूँ और देती तुम्हे भरोसा
मैं एक औरत हूं—गृहलक्ष्मी की कविता
