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Grehlakshmi Ki Kavitae
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गृहलक्ष्मी की कविताएं-विश्व गुरु है भारत मेरा,दुनिया में सिरमौर है
मेरे हिन्दुस्तान सा न देश कोई और है

ऋषि-मुनियों की तपोभूमि है,
वीरांगनाओं की जननी है
राम -कृष्ण खेले यहीं पर,
रहीम-रसखान की धरती है
विवेकानंद के ज्ञान की चर्चा चहुँ ओर है
मेरे हिन्दुस्तान सा न देश कोई और है

वीर सिपाही जनने वाली
माताओं का देश है
भाषा-वेश अलग हों चाहे ,
फिर भी हम एक हैं
शान्ति ,प्रेम, भाईचारे की
नीति जिसकी नेक है
अतिथि जहाँ पूजे जाते हैं
रिश्तों के रंग अनेक हैं
शून्य आयुर्वेद योग का जग में ना कोई तोड़ है
मेरे हिन्दुस्तान सा न देश कोई और है

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सारे धर्म हमें हैं प्यारे
हर दिन त्योहारों की धूम है
खेत जहाँ धानी चूनर ओढ़े,
कोयल की जहाँ कूक है
सावन में जहाँ डलते झूले
हर कोस पे प्रेम कहानी है
एक है भारत ,श्रेष्ठ है भारत
जिसका दूजा ना कोई सानी है
जहां देश को माँ कहते हों,
ऐसा देश न कोई और है
मेरे हिन्दुस्तान सा न देश कोई और है
विश्व गुरु है भारत मेरा,
दुनिया में सिरमौर है
मेरे हिन्दुस्तान सा न देश कोई और है…

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