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शीर्षक: ए चंदा सुन- गृहलक्ष्मी की कविता

गृहलक्ष्मी की कविता- ए चंदा,आज तुझसेकुछ बातें करनी हैंकुछ अपनी कहनी हैकुछ तेरी सुननी हैक्यों सदा निहारता है तूयूं टकटकी लगा धरा कोक्या तुझे भी किसी नेछला है बेहिसाबक्या तेरा भी मेरी तरहखिन्न है मन आजतू क्यों है इतना शांतक्यों सियें हैं तेरे अधरकुछ तो हाल ए दिल खोलचल मान लिया मैंनेतू है गमगीन बहुतनहीं […]