Maut ke Deewane by James Headley Chase hindi novel - Grehlakshmi
Maut ke Deewane by James Headley Chase

अगले दिन शनिवार था। लंच तक बिली यहीं ठहरा था। तत्पश्चात वह अपनी कारपोरेशन के किसी काम से मियामी रवाना हो गया था…उसे वहां से आगे न्यूयार्क जाना था।

उसके रवाना होते ही मैं अपने काम में लग गया था। उससे अगले दिन इतवार को भी मैं अपना पेपर वर्क करता रहा था। सोमवार वैसे ही व्यस्त रहने का दिन होता है। मैं सारा दिन कार्य में व्यस्त रहा था। शाम को मैं कैरीन से मिलने उसके कमरे में चला गया था। तत्पश्चात मैं होटल के रेस्तरां में भोजन करके अपने कमरे में चला आया था। फिर अपना लिबास तब्दील करके…बिस्तरे में लेटकर एक उपन्यास पढ़ने लगा था।

मौत के दीवाने नॉवेल भाग एक से बढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें- भाग-1

अभी मैंने उपन्यास के पांच-छः पृष्ठ ही पढ़े थे कि मेरे पास रखे टेलीफोन की घंटी बजने लगी।

‘तुम मेगन बोल रहे हो?’

‘हां। आप कौन बोल रहे हैं?’

‘मैं जैक चार्ल्स बोल रहा हूं…। डेबी वहां तुम्हारे पास है?’

‘नहीं तो। वह तो आपके पास होस्टन गई है। आप कहां से बोल रहे हैं?’

‘होस्टन से।’ कहने के साथ जैक चार्ल्स की आवाज मन्द-सी पड़ गई। तब मुझे उसके बुदबुदाने की आवाज सुनाई देने लगी…‘वहां पर भी नहीं है।’

वह झूठ क्यों कहेगा…बिली…जैक चार्ल्स ने एक बार फिर भरपूर आवाज से पूछा‒‘क्या बिली जूनियर वहां पर है?’

‘नहीं, वह शनिवार को लंच के पश्चात यहां से मियामी चला गया था। वहां से न्यूयार्क जाना था। यदि वह न्यूयार्क के लिए रवाना नहीं हुआ, तो वहीं मियामी में होगा।’

जैक चार्ल्स फिर बुदबुदाने लगा…मियामी…दोनों को विमान से…।

तब जैक चार्ल्स ने रौबदार आवाज में कहा‒‘टॉम, तुम अपना सामान बांध लो और यहां आने के लिए तैयार रहो।’

जैक चार्ल्स मुझे यों आदेश दे रहा था, मानो मैं उसका मुलाजिम होऊं। मैंने नाराजगी के भाव से कहा, ‘वहां क्यों आऊं? कोई प्रलय आ गई है क्या?’

‘मैं फोन पर और कोई बात नहीं करना चाहता।’ जैक ने दूसरी ओर से कहा।

‘जब तक आप मुझे कारण नहीं बताएंगे….।’

जैक चार्ल्स ने मेरी बात पूरी नहीं होने दी और बीच में टोकते हुए बोला‒‘डेम इट। तुम मुझसे बहस मत करो तथा जैसे मैं कहता हूं‒वैसा करो..दो घंटे के अन्दर मेरा विमान फ्रीपोर्ट में होगा। तुम उसे रोके मत रखना और तुरन्त यहां चले आना और देखो, तुम्हें यहां कुछ दिन के लिए रुकना पड़ेगा। समझे!’ कहकर जैक चार्ल्स ने फोन बन्द कर दिया।

मैंने घड़ी की ओर देखा…साढ़े नौ बजना चाहते थे।

जैक चार्ल्स की आवाज में इतना आग्रह था कि न जाना चाह कर भी मैं बिस्तरे से उठा और जाने के लिए सामान बांधने लगा। तत्पश्चात मैंने होटल की नर्स किटी को अपने कमरे में बुलाकर बताया कि मुझे किसी जरूरी काम से बाहर जाना पड़ रहा है, तुम कल कैरीन को उसकी बुआ के पास अबाको छोड़ आना। मैं विमान चालक बॉबी बोवन के नाम एक पत्र छोड़े जा रहा हूं…वह तुम्हें विमान से वहां पहुंचा देगा।

कैरीन को किटी के हवाले करके मैं अपनी कार से हवाई अड्डे चला आया। कोई आधी रात बीते जैक चार्ल्स का विमान वहां पहुंचा। तब विमान की चीफ एयर हॉस्टेस मेरी अगुवाई करती हुई मुझे विमान के अन्दर ले गई। मैं विमान के अन्दर दाखिल हुआ ही था कि बिली मुझे देखते ही चिल्लाने लगा‒‘यार यह मामला क्या है तुम मुझे पूरी बात बताओ।’

फ्रीपोर्ट से होस्टन जाने के लिए मैक्सिको की खाड़ी पार करनी पड़ती है…और यह करीब एक हजार मील का सफर है। हमारा विमान 500 मील प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ रहा था। बिली का मूड एकदम उखड़ा हुआ था। उसे भी नींद से जगाकर तुरन्त होस्टन पहुंचने के लिए कहा गया था।

‘मुझे गुस्सा इस बात पर आ रहा है।’ बिली ने कहा‒‘कि यह पहली बार है कि मैं विमान में यात्रा कर रहा हूं….और मुझे यह भी ज्ञात नहीं कि मैं यात्रा क्यों कर रहा हूं। न जाने जैक चाचा को हुआ क्या है?’

मैंने आहिस्ता से कहा‒‘मेरा ख्याल है कि इस यात्रा का डेबी से कुछ ताल्लुक है।’

‘डेबी से! वह कैसे?’ बिली ने आश्चर्य से पूछा।

‘क्योंकि जब जैक का फोन आया था, तो उसने छूटते ही मुझसे यह पूछा था‒क्या डेबी तुम्हारे पास है?’

‘जैक को तो ज्ञात है कि डेबी फ्रीपोर्ट से होस्टन जा चुकी है।’

‘क्या पता, तरंग में आकर वह कहीं और चली गई हो और जैक यह समझा हो कि वह मेरे पास आई है।’

‘ऐसी भी क्या तरंग कि बिना बताये जब जी में आया मुंह उठाकर चल दिये। जैक चाचा के लाड़-प्यार ने डेबी का दिमाग खराब कर दिया है। अबकी बार मैं उसे ऐसा आड़े हाथों लूंगा कि जीवन पर्यन्त याद रखेगी।’ कहकर बिली खामोश हो गया।

होस्टन हवाई अड्डे पर जब हम उतरे, तो कार पहले से हमारे इन्तजार में खड़ी थी। थोड़ी देर पश्चात जब हम चार्ल्स हाउस पहुंचे, तो चार्ल्स परिवार के सदस्य एक मेज के इर्द-गिर्द बैठे हुए थे और किसी विषय पर गम्भीरता से विचार-विमर्श कर रहे थे। विचार-विमर्शकों में एक भी महिला नहीं थी। ऐसा प्रतीत हो रहा था, मानो चार्ल्स परिवार एक पठानी कबीला हो….जिसमें महिलाओं को किसी बात में भाग लेने या राय देने का कोई अधिकार नहीं होता। मेज के सिरे पर जैक चार्ल्स तशरीफ फरमा रहे थे। उनकी एक ओर उनके भाई बिली सीनियर-यानी बिली के पिता विराजमान थे और दूसरी ओर उनके फर्जन्द…..यानी मेरा साला फ्रेंक बैठा था। वह मुझे यों घूर-घूरकर देख रहा था, मानो उसका वश चले, तो मुझे कच्चा चबा जाए।

हमें देखते ही वे सबके सब तनिक देर के लिए खामोश हो गये थे। बिली ने दुआ सलाम करने के पश्चात यह जानना चाहा कि हमें किस कारण से यहां बुलाया गया है, तो सभी एक साथ बोलने लगे थे, जिससे कुछ समझ नहीं पड़ी थी। तब जैक चार्ल्स ने एक कबीले के सरदार की भांति सबको खामोश करा दिया था और मुझसे बात करने लगा था।

‘टॉम, तुम्हें मालूम है कि डेबी के साथ क्या घटना घटी है?’ जैक चार्ल्स ने इस भाव से मुझसे यह प्रश्न किया था कि मैं यह समझ नहीं पाया कि वह मुझसे कुछ पूछ रहे हैं, अथवा मुझे कुछ बताना चाहते हैं।

मैंने कहा‒‘मुझे डेबी के बारे में कैसे मालूम हो सकता है। उसने मुझसे ताल्लुक ही नहीं रखा।’

‘देखो डैडी!’ मेरे साले फ्रेंक ने हस्तक्षेप करते हुए कहा‒‘यह अपने मुंह से स्वीकार कर रहा है कि इसका डेबी से कोई ताल्लुक नहीं।’

‘यही तो मैं जानना चाहता हूं‒ऐसा क्या कारण था कि डेबी अपनी मर्जी करने पर मजबूर हो गई थी….?’ फ्रेंक ने कहा।

इससे पूर्व कि मैं कोई उत्तर देता, बिली ने फ्रेंक को डांटते हुए कहा‒

‘तुम अपनी जबान को लगाम दो। सरासर तुम्हारी बहन का कसूर है। यदि टॉम के साथ निर्वाह नहीं कर सकती, तो किसी के साथ भी नहीं कर सकती। जब तुम्हारी बहन को यह निश्चय हो गया कि टॉम उसकी गुलामी नहीं करने वाला, तो वह उसे छोड़ कर यहां चली आई। इसमें टॉम का क्या दोष है?’

‘शान्त रहो बिली।’ बिली सीनियर ने अपने बेटे को शान्त करते हुए कहा।

‘मैंने जो कहना था कह दिया‒टॉम को दोषी ठहराने का किसी को कोई अधिकार नहीं। दोष‒सरासर डेबी का है।’

मैंने बिली सीनियर से कहा‒‘यदि आप यही जानना चाहते हैं कि हम दोनों के बीच किस बात पर अनबन हुई थी, तो पहले आप डेबी से ही क्यों नहीं पूछते।’

बिली सीनियर ने दीर्घ निःश्वास लेते हुए कहा‒‘यही तो मुश्किल है….बेटे। वह यहां पर होती….तो हम उससे पूछते।’

‘तो इसका आशय है कि डेबी यहां से भी चली गई।’ बिली ने अपने चाचा जैक चार्ल्स को सम्बोधित करते हुए कहा‒‘वाह! यह भी खूब रही….आपकी लाडली मनमानी करती रहे…और आप लोगों की रात की नींद हराम करते रहो….क्या यही बताने के लिए आपने मुझे नींद से उठा कर मियामी से यहां बुलाया है?’

जैक चार्ल्स ने खिन्न स्वर में अपने भाई से कहा‒‘अब तुम ही इन्हें बताओ बिली सीनियर।’

बिली सीनियर ने मेरी ओर देखते हुए धीरे-धीरे कहा‒‘पहले तो हमें यकीन ही नहीं हुआ था कि ऐसा हो सकता है पर अब जबकि तुम सही-सलामत यहां पहुंच गए हो तो सन्देह की कोई गुंजाइश ही नहीं कि डेबी का अपहरण कर लिया गया है।’

यह सुनते ही मेरी हालत खराब होने लगी। मुझे हर चीज घूमती हुई दिखाई देने लगी। फिर मैंने किसी तरह अपने आप पर अधिकार पाकर बिली सीनियर से पूछा‒किसने अपहरण किया है?’

उत्तर बिली सीनियर की बजाय फ्रेंक ने दिया‒‘अपहरणकर्ता अपना नाम पता छोड़कर नहीं जाते।’

बिली ने पूछा‒‘यह कब की बात है?’

‘शनिवार संध्या की या इतवार सुबह की और अब सोमवार की रात की पौ फटने वाली है….यानी मंगलवार होने को आया है।’ बिली सीनियर ने उत्तर देते हुए कहा।

‘डेबी को अन्तिम बार किसने देखा था?’

‘शनिवार संध्या की या इतवार सुबह की और अब सोमवार की रात की पौ फटने वाली है….यानी मंगलवार होने को आया है।’ बिली सीनियर ने उत्तर देते हुए कहा।

‘डेबी को अन्तिम बार किसने देखा था?’ बिली ने अपने पिता से पूछा।

‘जो की पत्नी लिण्डा ने।’

तब जो ने ब्यौरा देते हुए कहा‒‘शनिवार की दोपहर पूर्व लिण्डा एवं डेबी दोनों इकट्ठी शापिंग करने गई थीं। तत्पश्चात दोपहर को दोनों ने इकट्ठे लंच किया था।’

‘उसके बाद?’ बिली ने पूछा।

जो ने कन्धे उचकाते हुए कहा‒‘उसके बाद कुछ नहीं। लिण्डा वापस घर आ गई थी।’

‘लिण्डा ने तुम्हें यह नहीं बताया कि डेबी का दोपहर पश्चात का प्रोग्राम था?’

‘डेबी ने उसे अपना प्रोग्राम बताया ही नहीं था।’

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