स्काट के ट्रक की घरघराहट से जौनी जाग उठा। स्काट ट्रक स्टार्ट कर रहा था। उसने कलाई घड़ी पर दृष्टि डाली – साढ़े पांच बजे थे। स्काट के ट्रक की घरघराहट धीरे-धीरे कम होती जा रही थी। जौनी ट्रक को अपनी आंखों से ओझल होते हुए देखता रहा।
उसका मस्तिष्क विचारों में उलझा हुआ था। वह सोचने लगा -यदि फ्रैडा की कहानी पर मसीनो ने विश्वास कर लिया तो उसकी खोजबीन की सरगर्मी लगभग समाप्त-सी ही हो जाएगी – लेकिन यदि उसने विश्वास कर भी लिया फिर भी अगले चार दिन उसे स्वयं को और लोगों की निगाहों से छुपाकर रखना पड़ेगा – फिर वह सैमी को फोन करेगा। यदि सैमी ने उसे विश्वास दिला दिया कि मामला ठंडा पड़ चुका है तो फ्रैडा के साथ ईस्ट सिटी जाकर लॉकर में रखे धन को निकाल लायेगा।
दौलत आई मौत लाई नॉवेल भाग एक से बढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें- भाग-1
मसीनो के विचार में तो मैं हवाना पहुंच चुका होऊंगा – अतः फिर साउथ की ओर जाने में भी कोई खतरा नहीं होगा। समस्या सिर्फ टेलीफोन करने और किराये की कार हासिल करने की है, क्योंकि ऐसी हालत में फ्रैडा का लिटिल क्रीक से किराए की कार प्राप्त करना मुसीबत में डाल सकता था। अतः कार न्यू साइमारा से प्राप्त करनी पड़ेगी, मगर इस कदर तेज गर्मी में न्यू साइमारा तक की पैदल यात्रा भी स्वयं में एक मुसीबत थी।
वह चादर उतारकर पलंग से उठ गया।
‘जौनी!’ कमरे से बाहर निकलकर उसे फ्रैडा का स्वर सुनाई दिया।
उसने पलटकर देखा। वह अपने बैडरूम से निकल चुकी थी। सोकर उठने के बावजूद भी वह खूबसूरत नजर आ रही थी।
मैं कॉफी लेने जा रहा हूं, पियोगी?’ जौनी ने पूछा।
‘हां…हां जरूर!’ वह बोली और गुनगुनाती हुई बाथरूम में घुस गई।
कॉफी बनाते समय जौनी फ्रैडा के बारे में सोचता रहा – वह एक वेश्या थी – मगर इससे क्या होता है? फ्रैडा उससे प्यार करती थी। वह खुद भी तो कोई विशेषता लिए हुए नहीं था। एक बिल्कुल साधारण-सा आदमी था। यही सोचते हुए उसने एक प्याले में कॉफी डाली-अभी वह दूसरे प्याले में कॉफी डालने ही जा रहा था कि किसी कार की आवाज सुनकर चौंक उठा। दूसरे कप को फौरन एक ओर रखकर वह तेजी से अपने बैडरूम में पहुंचा और झपटकर पिस्तौल उठा ली। चादर को पलंग पर फैला कर वह स्काट के बैडरूम में पहुंचा – जिसकी खिड़की से जेटी साफ दिखाई पड़ रही थी।
उसने देखा – धूल से अटी हुई एक लिंकन आकर रुकी। उससे दो व्यक्ति उतरकर नीचे खड़े हो गये। दोनों काले सूट-सफेद कमीज-सफेद टाई पहने हुए थे। उन्होंने कुछ क्षण इधर-उधर देखा और फिर जेटी (पानी के जहाज अथवा मोटरबोट उतरने-चढ़ने का प्लेटफार्म) पर चल दिये।
फ्रैडा अपनी नाइट ड्रेस पहने अभी तक बाथरूम के दरवाजे में खड़ी थी।
‘मुझे कुछ गड़बड़ नजर आ रही है।’ उसके निकट पहुंचकर जौनी ने कहा – ‘मगर तुम घबराना नहीं – मैं स्वयं ही निपट लूंगा।’
‘नहीं, तुम छिप जाओ।’ फ्रैडा ने सहमकर फुसफुसाते हुए कहा – ‘मैं सब देख लूंगी। तुम बड़ी वाली अलमारी में घुसकर इंतजार करो।’
फ्रैडा उसका हाथ पकड़कर अलमारी की ओर खींच ले गई। वह
हिचकिचाया -परन्तु उसी क्षण दरवाजा खटखटाने की आवाज हुई और उसने खिसककर स्वयं को अलमारी में बंद कर लिया।
फ्रैडा अपने बैडरूम की ओर दौड़ गई। उसने एक चादर से अपने जिस्म को ढांप लिया। तभी दरवाजा दोबारा खटखटाया गया।
फ्रैडा ने जाकर दरवाजा खोल दिया – किन्तु जैसे ही उसकी दृष्टि बर्नी तथा क्लीव पर पड़ी – उसका रोम-रोम कांप उठा। परन्तु स्वयं पर काबू पाते हुए वह बोली-
‘क्या चाहते हो?’
गुरिल्ले जैसी शक्ल वाले बर्नी ने उसे पीछे की ओर धकेल दिया और गुर्राते हुए बोला, ‘तुमसे जौनी के बारे में बातें करनी हैं बेबी।’
परन्तु फ्रैडा उसके पीछे वाले दूसरे युवक से भयभीत थी – जिसकी सूरत पर शैतानियत झलक रही थी और आंखों में छाई क्रूरता उसके परपीड़ा प्रेमी (सैडिस्ट) होने का स्पष्ट प्रमाण दे रही थी।’
‘वह चला गया है।’ फ्रैडा ने कंपित स्वर में उत्तर दिया।
वे तीनों लिविंग रूम में थे और फ्रैडा दूर दीवार से सटी खड़ी थी।
‘हमें उसके बारे में बताओ।’ बर्नी फुंफकारा – ‘क्योंकि हमें उसकी तलाश है।’
‘वह कल चला गया है।’ फ्रैडा ने पुनः उत्तर दिया।
‘यह तो हम भी सुन चुके हैं। बर्नी ने कहा और फ्रैडा के मुंह पर इतनी जोर से थप्पड़ मारा कि उसका सिर दीवार से टकरा गया और वह नीचे जा गिरी। बर्नी ने नीचे झुककर एक ही झटके में उसकी नाइट ड्रेस फाड़ डाली – ‘हम इस कहानी पर यकीन नहीं करते बेबी – हमें तो सच्ची बात क्या है, यह मालूम होना चाहिए।’
फर्श पर पड़ी फ्रैडा उसे घूर रही थी। वह स्थिर स्वर में बोली – ‘वह कल मियामी चला गया और अब तुम भी फौरन यहां से दफा हो जाओ मरदूद।’
बर्नी एक ओर हट गया। वह क्लीव की ओर इशारा करते हुए बोला-
‘क्लीव, जरा इसे समझाओ – जब तुम थक जाओगे तो मैं कोशिश करूंगा।’
अलमारी में खड़े जौनी ने एक-एक शब्द साफ-साफ सुना। उसने धीरे से अलमारी का दरवाजा खोला – पिस्तौल हाथ में लिए वह बाहर निकला। उसने सिर्फ पायजामा पहना हुआ था – पैर नंगे थे। निःशब्द चलते हुए वह गलियारे से गुजरकर लिविंग रूम में जा पहुंचा।
क्वील फ्रैडा को पैरों पर खड़ा करके उसे थप्पड़ मारने ही वाला था कि जौनी ने फायर कर दिया।
फायर की आवाज सुनकर फ्रैडा चीख पड़ी और हाथों में अपना चेहरा छुपाकर घुटनों के बल नीचे जा पड़ी।
जौनी के पिस्तौल की गोली क्लीव के सिर के पिछली ओर लगी थी – वह लहराया और फर्श पर ढेर हो गया।
बर्नी अपनी पिस्तौल निकालकर जौनी की ओर पलटा – किन्तु इससे पहले कि वह फायर कर पाता – जौनी के पिस्तौल से निकली गोली उसके चेहरे से आ टकराई। बर्नी एकदम से तड़पा और बेजार होकर क्लीव के शरीर पर ढह गया।
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जौनी ने पिस्तौल नीचे फेंका और फ्रैडा को थाम लिया – वह उसे लेकर बैडरूम में पहुंचा और आराम से पलंग पर लिटा दिया – फिर वह दौड़कर अपने बैडरूम में पहुंचा और अपने जूते तथा कपड़े पहने और पुनः लिविंग रूम में आ पहुंचा।
काफी देर तक वह यूं ही पड़ी रही यद्यपि उसकी सिसकियां बंद हो चुकी थीं। सहसा उसने अपने चेहरे पर एक हाथ का हल्का सा स्पर्श महसूस किया। उसने आंखें खोल दीं। जौनी उस पर झुका कह रहा था।
‘उठो बेबी! अब यहां रुकना बेकार है। आओ चलते हैं।’
‘चलें-मगर कहां?’ फ्रैडा ने अपनी खोई-खोई आंखों से उसे देखते हुए पूछा।
‘सौभाग्य से उनकी कार यहीं है। मौका गंवाना बेवकूफी होगी। यहां ठहरना अब और नई मुसीबतों को दावत देना है।’
मगर वह हिली तक नहीं -बस अपलक हतप्रभ-सी उसे देखती रही।
‘जल्दी करो बेबी।’ जौनी ने कुछ तेज आवाज में कहा – ‘कपड़े पहनो और अपना सामान बांध लो।’
‘तुमने उन्हें कत्ल कर दिया – तुम खूनी हो – मैं तुम्हारे साथ नहीं जा सकती।’
‘ठीक है – नहीं जाना चाहतीं तो न सही।’ जौनी ने तीखी आवाज में कहा – ‘परन्तु कपड़े तो पहन लो।’
जौनी इन शब्दों ने उस पर जबरदस्त प्रहार का काम किया-वह कांपती हुई उठी और अलमारी की ओर दौड़ गई। अलमारी से उसने एक मर्दानी पतलून और कमीज निकाली और पहन ली। जौनी ने देखा – उसकी अलमारी में एक सस्ती ड्रेस-एक जोड़ा पुरानी लेविस तथा मात्र एक जोड़ी-जूते ही थे।
‘इस कबाड़ में से और भी कुछ साथ ले जाना चाहती हो तुम?’ जौनी ने पूछा।
‘नहीं। फ्रैडा ने उत्तर दिया।
दोनों लिविंग रूम में आ पहुंचे। जौनी बोला – ‘अब तुम्हें एड के नाम एक चिट्ठी लिखनी है। लिखने के लिए कोई कागज है?’
वह कांपती हुई मेज पर बैठ गई और बोली – ‘उस ड्रॉअर में है।’
जौनी ने ड्रॉअर खोली-एक घटिया-सा कागज तथा लिफाफा निकाला-फिर पैंसिल उसके हाथ में पकड़ाकर बोला – लिखो –
डीयर एड, मैं यहां रहते-रहते ऊब चुकी हूं। मैं जौनी के साथ जा रही हूं क्योंकि हम एक-दूसरे से प्रेम करते हैं।
फ्रैडा।
कंपित हाथों से फ्रैडा मुश्किल से ही लिख सकी। जौनी ने वह चिट्ठी लिफाफे में बंद करके मेज पर रख दी।
‘आओ चलें।’ वह बोला।

जौनी ने एक हाथ से अपना सूटकेस उठाया तथा दूसरे से उसकी बांह थामकर तेजी से जेटी पार की। वे दोनों लिंकन में जा बैठे। इंजन स्टार्ट करते समय उसने अपनी रिस्टवॉच पर नजर डाली। छह बजकर चालीस मिनट हो चुके थे।
उसने सोचा-कम से कम तीन घंटे के बाद ल्यूगी को अपने भेजे आदमियों की चिन्ता होनी आरंभ हो जाएगी। अभी तीन घंटे का समय बाकी था और तीन घंटों में तो यह कार हमें दूर पहुंचा देगी।
दौलत आई मौत लाई भाग-33 दिनांक 20 Mar.2022 समय 08:00 बजे रात प्रकाशित होगा

