बौद्ध सर्किट का महत्व
इस परिपथ में ही गौतम बुद्ध ने अपने जीवन का अधिकतम समय व्यतीत किया था। इन जगहों पर बुद्ध ने यात्रा करके ज्ञान प्राप्त किया।
Buddhist Tourism Circuit: हमारे देश में घूमने टहलने वाले जगहों की कोई कमी नहीं है। लेकिन कुछ ऐसी जगहें हैं जो घूमने टहलने के साथ साथ ऐतिहासिक और धार्मिक रूप से भी ख़ास हैं। यही वजह है कि इन जगहों पर हर कोई जाना चाहता है। यहाँ की सभी जगहें सैलानियों से हमेशा भारी रहती हैं। गौतम बुद्ध से जुड़ी जगहें ऐसी ही हैं जिनका हमारे भारतीय जनमानस ही नहीं बल्कि विदेशों में भी बहुत ज़्यादा महत्व है। यही वजह है कि इनको तेज़ी से विकसित करने का काम किया जा रहा है और इन जगहों को बौद्ध सर्किट का नाम दिया गया है।
इस परिपथ में ही गौतम बुद्ध ने अपने जीवन का अधिकतम समय व्यतीत किया था। इन जगहों पर बुद्ध ने यात्रा करके ज्ञान प्राप्त किया। ज्ञान से प्राप्त अपने संदेशों को दुनिया भर में फैलाया और महापरिनिर्वाण प्राप्त किया। इस बौद्ध सर्किट में आपको कई भव्य स्तूप और प्राचीन मठ मिल जाएँगे जहां पर बौद्ध मंत्रों के बीच ध्यान और पूजा किया जाता है। इन जगहों का भ्रमण करना अलौकिक अनुभव देता है। आपको बुद्ध के जीवन और दर्शन को समझने के लिए इन जगहों की यात्रा ज़रूर करनी चाहिए।
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कपिलवस्तु

कपिलवस्तु एक ऐसी जगह है जहां पर सिद्धार्थ का बाल्यकाल बीता था। जिसकी वजह से इस जा जगह को पवित्र माना जाता है। यह जगह वर्तमान में सिद्धार्थनगर जिले के पिपहरवा टाउनशिप के रूप में जानी जाती है। इस जगह पर आकर युगों पहले युवा राजकुमार सिद्धार्थ के बचपन का अनुभव किया जा सकता है। इस जगह से मोक्ष की तलाश में सिद्धार्थ ने सभी सांसारिक धन और सुख का त्याग किया था।
कौशाम्बी

कौशाम्बी प्रयागराज से महज़ साथ किमी की दूरी पर स्थित बौद्ध धर्म का एक प्रमुख स्थल है। यह वह जगह है जहां पर भगवान बुद्ध ने कई धर्मोपदेश दिए थे। वर्तमान में यह बौद्ध धर्म का एक उच्च शिक्षा केंद्र है। यह उस समय का एक बड़ा और समृद्ध नगर था। इस जगह पर खुदाई के दौरान तमाम तरह की मूर्तियों, सिक्कों और टेराकोटा वस्तुओं का पता चला है। इस जगह पर एक अशोक स्तंभ, एक पुराने किले और एक भव्य मठ के होने का पता चला था।
सारनाथ

वाराणसी से महज़ 15 किमी की दूरी पर स्थित सारनाथ देश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में गिना जाता है। यह बौद्ध धर्म के सबसे प्रमुख स्थलों में गिना जाता है। यह वह जगह है जहां पर भगवान बुद्ध ने आत्मज्ञान की प्राप्ति के बाद अपना पहला धर्मोपदेश दिया था। इस जगह पर मौजूद धामेक स्तूप व खंडहर बुद्ध के द्वारा दी गई शिक्षाओं की स्मृति को ताज़ा कर देते हैं। यह बौद्ध सर्किट के अंतर्गत आने वाली एक प्रमुख जगह है।
संकिसा

संकिसा बौद्ध सर्किट के अंदर आने वाली एक बहुत ही ख़ूबसूरत और प्रमुख जगह है। इस जगह के बारे में ऐसी मान्यता है कि अपनी मां को स्वर्ग में संबोधित करने के पश्चात भगवान बुद्ध ने इस जगह पर अवतरण लिया था। वर्तमान में यह जगह फर्रुखाबाद जिले के संतपुर गांव में है, जो बहने वाली काली नदी के तट से लगती है। इस पवित्र जगह को चिह्नित करने के लिए अशोक ने एक स्तंभ बनवाया था।
श्रावस्ती

श्रावस्ती बौद्ध सर्किट के अंतर्गत आने वाली एक बहुत ही सुंदर और प्रमुख जगह है जोकि बहराइच से 15 किमी की दूरी पर स्थित है। कहा जाता है कि श्रीवस्ती को पौराणिक समय में राजा श्रावस्त ने स्थापित किया था। यह प्राचीन समय में कोसल साम्राज्य की राजधानी हुआ करती थी । इस जगह पर भगवान बुद्ध ने अपने जीवन के अहम 27 साल गुजारे थे। इस जगह पर आपको कई संरक्षित स्तूप और खंडहर मिल जाएँगे।
कुशीनगर

कुशीनगर वह जगह है जहां पर भगवान बुद्ध ने अपनी आखिरी सांसें ली। वर्तमान में यह जगह गोरखपुर से 50 किमी की दूरी पर स्थित है। इस जगह को लेकर लोगों में अगाध आस्था है। इस जगह पर स्थित महापरिनिर्वाण मंदिर में भगवान बुद्ध की एक विशाल मूर्ति स्थापित की गई है। यह मूर्ति 1876 में इस जगह की खुदाई के दौरान मिली थी। इस जगह से कई ऐसे साक्ष्य मिले हैं जो यह ज़ाहिर करते हैं कि 11वीं सदी में यह बौद्ध भिक्षुओं का गढ़ था।
