भारतीय संस्कृति दुनिया में अपनी एक अलग पहचान रखती है। ये हमारी संस्कृति ही है कि हम कोई भी कार्य शुरू करने से पहले देवी.देवताओं को पूजते हैं। ये वो देवी या देवता होते हैं जो हमारे कुल में पूजे जाते हैं। दरअसल, हिन्दू परिवार किसी न किसी ऋषि के वंशज माने गए हैं। उनके गोत्र का निर्धारण भी उन्हीं के नाम पर हुआ है। हर जाति वर्ग, किसी न किसी ऋषि की संतान मानी गई हैं और उन मूल ऋषि से उत्पन्न संतान के लिए वे ऋषि या ऋषि पत्नी कुलदेवी या देवता के रूप में पूज्य माने गए हैं।कुल देवी या देवता की पूजा कब से की जा रही है यह कहना बिल्कुल सटीक तो नहीं होगा, लेकिन पौराणिक ग्रंथों में इस बात का उल्लेख मिलता है कि कुल देवी या देवताओं की पूजा.अर्चना का विधान वैदिक काल से है।

अपनाएं ये उपाय

जन्म, विवाह आदि मांगलिक कार्यों में कुलदेवी या देवताओं के स्थान पर जाकर उनकी पूजा की जाती है या उनके नाम से स्तुति की जाती है। ऐसी मान्यता है कि बिना कुलदेवी कृपा के किसी के कुल का वंश और यश आगे बढ़ नहीं सकता। कुल देवी और देवता के लिए प्रतिदिन सुबह और शाम को भोग निकालें और उनके नाम का उच्चारण करें।

सालभर में एक ऐसा भी दिन होता है जब संबंधित कुल के लोग अपने देवी और देवता के स्थान पर इकट्ठा होते हैं। जिन लोगों को अपने कुलदेवी और देवता के बारे में पूर्ण ज्ञान नहीं है यां फिर जो लोग उनकी मान्यताओं को  भूल गए हैं यां अपने कुल की शाखा और जड़ों से कट गए हैं। अगर उन्हें किसी प्रकार से अपनी कुलदेवी या कुल देवता के स्थान से आपके पूर्वजों का पता लगता है, तो अवश्य जाएं और उनका आर्शीवाद लें। अगर आपको याद नही हैं, तो भैरू महाराज और दुर्गा माता के मंदिर में जाकर उनके नाम का भोज चढ़ाएं और पूजा करें।

कुलदेवता की पूजा करते समय शुद्ध देसी घी का दीया, धूप, अगरबत्ती, चंदन और कपूर जलाना चाहिए। साथ ही प्रसाद स्वरूप भोग भी लगाना चाहिए। कुलदेवता को चंदन और चावल का टीका अर्पण करते समय ध्यान रखें की टूटे हुए या खंडित चावल ना हो। कुलदेवता को हल्दी में लिपटे पीले चावल पानी में भिगोकर अर्पण करना शुभ माना जाता है।

 

इसलिए करनी चाहिए कुल देवी.देवता की पूजा

कुल देवता या देवी घर का सुरक्षा आवरण होते हैं जो बाहरी बाधा, नकारात्मक ऊर्जा और संकट से सबसे पहले जूझते हैं। उसे घर में प्रवेश करने से रोकते हैं। पारिवारिक संस्कारों और नैतिक आचरण के प्रति कुल देवी.देवता सचेत करते रहते हैं। यदि इन्हें घर.परिवार में मान.सम्मान नहीं मिलता या इनकी पूजा नहीं की जाती तो यह नाराज हो जाते हैं और अपनी सारी शक्तियों से घर को विहिन कर देते हैं।

 

हर वर्ष होती है इनकी पूजा

कुल देवी.देवता की पूजा वर्ष में एक बार अथवा दो बार निश्चित समय पर की जाती है। हर परिवार का अपना समय निर्धारित होता है। साथ ही शादी.विवाह.संतानोत्पत्ति आदि पर भी इनकी विशिष्ट पूजा की जानी चाहिए।

 

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