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सच्ची दोस्ती
True Friendship-Balman Story

भारत कथा माला

उन अनाम वैरागी-मिरासी व भांड नाम से जाने जाने वाले लोक गायकों, घुमक्कड़  साधुओं  और हमारे समाज परिवार के अनेक पुरखों को जिनकी बदौलत ये अनमोल कथाएँ पीढ़ी दर पीढ़ी होती हुई हम तक पहुँची हैं

विवेक, रोहित और राहुल तीनों बहुत अच्छे दोस्त थे। तीनों एक ही स्कूल में और एक ही कक्षा आठवीं में पढ़ते थे। तीनों ट्यूशन पढ़ने भी एक ही कोचिंग सेंटर में जाते थे। एक दिन तीनों शाम में जब ट्यूशन पढ़ने कोचिंग पहुँचे, तो पता चला कि हेड सर की माँ का देहांत हो गया है। इसीलिए कोचिंग सेंटर दो दिन बंद रहेगा।

रोहित ने कहा- “यार! अब क्या करें? चलो, पार्क में खेलने चलते हैं।”

राहुल ने जवाब दिया- “नहीं यार! गर्मी का महीना है। चल स्वीमिंग करने चलते हैं। नदी यहाँ से बस दो किलोमीटर ही तो है!”

“नहीं भाई, मैं अकेले स्वीमिंग करने नहीं जाऊँगा। मम्मी-पापा साथ में रहते, तो जाता।” विवेक ने कहा।

“तू डरपोक का डरपोक ही रहेगा। वहाँ और भी बहुत लोग रहते हैं। चल ना, मजा आएगा।” राहुल ने विवेक को जोर देते हुए कहा।

“हाँ यार! मजा आएगा। चल आज स्वीमिंग करने चलते हैं।” रोहित भी रोमांचित हो गया था।

“लेकिन भींगकर जब हम वापस जायेंगे, तो घर पर क्या बतायेंगे?” विवेक ने चिंता जताई।

“क्या बतायेंगे! कह देंगे कि सर जी की माँ की डेथ हो गयी थी, तो हम लोग स्वीमिंग करने चले गए। तू कभी-कभार साफ बुद्ध की तरह बात करने लगता है। चल! अब बात न बना।” रोहित ने बहाना गढ़ लिया था।

तीनों दोस्त नदी के किनारे पहुँच गए। भेल-पूड़ी बेचने वाले के पास बैग और कपड़े रखकर तीनों नदी की ओर बढ़ने लगे। तभी विवेक ने कहा कि यार तुम दोनों आगे बढ़ो। मैं एक नम्बर से आता है।

दोनों हँसने लगे- “ये कितना फट्ट है! तैरने का नाम सुनकर ही इसका एक नम्बर आ गया।”

विवेक बहाना बनाकर साइड में खड़ी महिला के पास गया और बोला”आंटी, क्या आप मुझे एक कॉल करने के लिए मोबाइल देंगी?”

“क्यों नहीं बेटा! ये लो।” महिला ने उसे मोबाइल देते हुए कहा।

विवेक ने सबसे पहले अपने पापा को फोन लगाया पर उनका फोन बिजी आ रहा था। दोबारा फोन लगाया, फिर भी वही स्थिति। फिर उसने राहुल के पापा को फोन लगाया तो उन्होंने उठा लिया- “हैलो! कौन?” उधर से आवाज आई।

“नमस्ते अंकल! मैं राहुल का दोस्त विवेक बोल रहा हूँ। हम लोग स्वीमिंग करने पुराने घाट पर आये हैं। राहुल जिद करके आ गया है। हमें डर लग रहा है। आप थोड़ा जल्दी आ जाइये न!” विवेक ने घबराई हुई आवाज में कहा।

उधर से अंकल ने जवाब दिया- “मैं अभी-अभी एक जरूरी काम से शहर के बाहर जा रहा था, पर मैं तुरन्त आ रहा हूँ। तुम लोग किस घाट पर हो? तुम राहुल को रोककर रखना। उसने अभी नयी-नयी स्वीमिंग सीखी है। उसे अभी ठीक से तैरना आता भी नहीं है!”

जब तक विवेक नदी के किनारे पहुंचता, वे दोनों पानी में उतर चुके थे। वहाँ पहुंचकर विवेक ने आवाज दी- “यार राहुल! एक चुटकुला तो सुनो!”

पानी में उतरे रोहित ने कहा- “पागल है क्या? हम लोग अभी स्वीमिंग करने आये हैं या चुटकुला सुनने? स्वीमिंग करने के बाद सुनेंगे तेरे चुटकुले!”

“आ जा बेटा! तू भी आ जा पानी में! देख, कितना ठंडा पानी है। कसम से मजा आ जायेगा।” राहुल ने एक बार फिर कोशिश की विवेक को पानी में बुलाने की।

“अरे भाई, इतनी जल्दी में क्यों हो तुम दोनों? आओ थोड़ी देर बैठो। बातें करते हैं। फिर स्वीमिंग करेंगे।” विवेक ने उन्हें रोकने का एक बार फिर प्रयास किया।

“यार, तू बैठकर वहाँ आते-जाते लोगों की मुंडी गिन।” कहकर रोहित और राहुल ठहाका मारकर हँस पड़े और धीरे-धीरे बीच नदी की ओर बढ़ने लगे। विवेक ने उन्हें इशारे से उतनी दूर जाने से मना किया और किनारे की ओर आने का इशारा भी किया, पर वे दोनों कहाँ सुनने वाले थे! रोहित को तो अच्छे से तैरना आता था, पर राहुल अभी नौसिखिया था। वह गहरे पानी में पहुँचते ही अपना संतुलन खोने लगा। वापस आने में उसे बहुत दिक्कत होने लगी। रोहित ने उसे बचाने की कोशिश की, पर वह भी समान उम्र का ही था। राहुल उसकी पकड़ में आ ही नहीं रहा था। अब राहुल को समझ में आने लगा कि उसका बचना अब मुश्किल है। वह चिल्लाया- “बचाओ!” पर यह आवाज केवल रोहित ही सुन सका। पर वह कुछ कर नहीं पा रहा था। उसको लग रहा था कि अगर उसने राहुल को बचाने की कोशिश की, तो वह खुद डूब जाएगा। यह सब देख विवेक आसपास के लोगों से अनुरोध करने लगा कि मेरे दोस्त को बचा लो। पर वहां शायद किसी को भी ठीक से तैरना नहीं आता था, इसलिए कोई उसकी मदद नहीं कर पा रहा थ।

तभी संयोग से राहुल के पापा वहाँ आ गये। जल्दी से कपड़े उतारकर वे पानी में कूद गये और राहुल की ओर बढ़े। राहुल गहरे पानी मे ऊपर-नीचे डूब रहा था। राहुल के पापा को देख रोहित किनारे की ओर जाने लगा। बड़ी मुश्किल से वे राहुल को पकड़कर किनारे पर लाने में कामयाब हुए। किसी तरह उसकी जान बच गयी थी। राहुल अपने किए पर बहुत शर्मिदा था।

राहुल के पापा ने विवेक को गले लगाते हुए कहा- “बैंक्यू बेटा! आय एम प्राउड ऑफ यू! आज तुम न होते तो मैं राहुल को खो देता।” और राहुल और विवेक की ओर देखते हुए कहा- “तुम लोग कान पकड़ो कि अब कभी भी अकेले तैरने नहीं जाओगे।”

राहुल और रोहित की आँखों से आँसू गिर रहे थे। दोनों की आँखें झुकी हुई थीं।

भारत की आजादी के 75 वर्ष (अमृत महोत्सव) पूर्ण होने पर डायमंड बुक्स द्वारा ‘भारत कथा मालाभारत की आजादी के 75 वर्ष (अमृत महोत्सव) पूर्ण होने पर डायमंड बुक्स द्वारा ‘भारत कथा माला’ का अद्भुत प्रकाशन।’

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