chitthi aayi hai author views
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Author Views: जब से तुम मेरी जिंदगी में आई हो मेरी जिंदगी पहले से काफी बेहतरीन हो गई। तुम एक पत्रिका ही नहीं बल्कि एक सखी हो, हर कदम पर मदद करती हो। तुमने सिखाया कि कैसे खुद को भी खुश रखना जरूरी है। हजारों महिलाएं जो गृहस्थी चलाने में खुद को भूल चुकी होती हैं उन्हें अपनी पहचान कैसे देनी है ये तुमने सिखाया। उन सबकी सखी बनकर अब वो समय देकर खुद को संवारने लगी है,
बात चाहे श्रृंगार की हो या सेहत की या घर को संवारने की सब कुछ तुम्हारे जरिए मुमकिन हो
रहा है। एक साधारण गृहिणी भी एक आत्मविश्वासी बन रही है। और अपनी प्रतिभा को निखारने का भी मौका मिल रहा है, तुम्हारे जरिए अपनी लेखनी को प्रस्तुत करके, नई-नई प्रतियोगिता, नए विचार को जन्म देती है जो प्रतिभा को और निखारती है। शुक्रिया हम गृहलक्ष्मी के जीवन में आने के लिए, हमारा साथ हमेशा बना रहे एक साथी के रूप में हर कदम साथ रहो।

अंजना ठाकुर
ग्वालियर (म.प्र.)

किसी भी कार्यक्रम या समारोह में आमंत्रित अतिथियों को पुष्पगुच्छ (बुके) भेंटकर उनके
-सत्कार की परम्परा लम्बे समय से चली आ रही है। अतिथियों को उपहार/सम्मान स्वरूप भेंट किए जाने वाले पुष्पगुच्छों की कीमत कुछ सैकड़े से लेकर हजारों में होती है। साथियों, आपने अक्सर देखा होगा, अतिथियों को स्वागत-सत्कार के समय जो पुष्पगुच्छ भेंट किया जाता है, वे उसे तत्काल अपने अधीनस्थों को सौंप देते हैं। इन पुष्पगुच्छों का उनके लिए कोई विशेष महत्व नहीं होता। वैसे भी, कुछ दिनों बाद ये पुष्पगुच्छ सूखकर नष्ट हो जाते हैं। यदि अतिथियों को स्वागत-सत्कार में पुष्पगुच्छ के बजाय प्रेरक पुस्तकें भेंट की जाएं, तो यह उनके लिए अधिक उपयोगी होगा, क्योंकि सम्मान में प्राप्त पुस्तकों का उपयोग स्वयं तथा उनके परिजनों द्वारा कभी-न-कभी अवश्य किया जाएगा। जबकि
पुष्पगुच्छ कुछ ही दिनों में सूखकर बेकार हो जाएंगे। इसी तरह, बच्चों के जन्मदिवस, शादी-विवाह, सालगिरह आदि अवसरों तथा शिक्षण संस्थाओं द्वारा आयोजित प्रतियोगिताओं के विजेताओं को भी कीमती उपहार भेंट करने के बजाय उपहार स्वरूप उनके स्तरानुकूल प्रेरक पुस्तकें भेंट की जाएं, तो बेहतर होगा। हमारी इस पहल से लोगों में पठन संस्कृति का विकास होगा, साथ ही साथ हर घर में पुस्तकालय का निर्माण होगा।

सुनील कुमार
बहराइच (उत्तर प्रदेश)

वर्ष 2025 के अंत में प्रकाशित दिसंबर अंक में गृहलक्ष्मी ने हाथ से बने ट्रेंडी स्वेटरों के माध्यम से नववर्ष के आगमन को गर्माहट के साथ प्रस्तुत किया है, वहीं देसी आयुर्वेद ने इसमें विशेष तड़का लगाया है। विंटर स्पेशल अंक में शीत ऋतु से संबंधित स्वास्थ्य जानकारी एवं उनके समाधान प्रस्तुत कर इस अंक को और भी सार्थक बना दिया गया है। ‘चिठ्ठी आई है’ कॉलम भी हमें बहुत कुछ सिखाता है। ‘मॉल जब भी जाएं, थैला साथ ले जाएं’- इस विचार से मैं पूर्णत: सहमत हूं और स्वयं भी अपना थैला साथ लेकर जाती हूं। गृहलक्ष्मी के कॉलम में प्रकाशित सभी लेखों से उपयोगी एवं महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त होती हैं। यह पत्रिका फैशन, मौसम, त्वचा देखभाल आदि विषयों पर विविध अंक प्रकाशित करती है, जो मुझे अत्यंत पसंद आते हैं। यदि गृहलक्ष्मी में विभिन्न क्षेत्रों की विशिष्ट महिलाओं के जीवन परिचय, उपलब्धियां, फैशन और दिनचर्या को लिपिबद्ध कर प्रकाशित किया
जाए, तो यह पाठिकाओं के लिए एक नया एवं रोमांचक अनुभव होगा।

-मनिकना मुखर्जी
झांसी (उत्तर प्रदेश)

grehlakshmi ke maadhyam se milatee hai jaanakaariyaan vo bhee ghar baithe hee
grehlakshmi ke maadhyam se milatee hai jaanakaariyaan vo bhee ghar baithe hee

जैसे ही घर पर पता चलता है कि फलां रिश्तेदार की बिटिया सयानी हो गई है, तो सबसे पहले तो मन यही सोच कर कांप उठता है कि पचास से ऊपर का शरीर और इतने जवां अरमान, शक्ल-सूरत तो फिर भी ब्यूटी पार्लर में फिर से जवां सी लगेगी पर शरीर पर गृहलक्ष्मी की मदद से उसके बताए
8 स्टेप्स से मैंने शक्ल-सूरत तो झट से अप-टू-डेट बनायी ही और उसकी एंटी एजिंग सुरक्षा, असमय बालों को जो सफेद हो जाते हैं उन्हें अलविदा बताते समय बड़े कामयाब नुस्खे बताये, व क्या ब्राइडल खाए, उसमें से हमने भी काफी बातें फॉलो की और झटपट ही हम भी रेडी हो गए और जल्दी पहुंच कर नव-विवाहित दुलहन को गृहलक्ष्मी पकड़ा दी फिर तो बाकी वह खुद स्वयं समझ गई। हम किसी से कम नहीं में सफलता की खूबसूरत मिसालें में भारतीय महिलाएं हर क्षेत्र में अपना योगदान दे रही हैं और हम गृहलक्ष्मी के माध्यम से इन महिलाओं के विषय में जानकारी प्राह्रश्वत करते हैं घर बैठकर।

सोनिया
प्रयागराज-इलाहाबाद (उत्तर प्रदेश)

सालों बाद इस मैगजीन को जब मैंने अपनी एक सहेली के घर देखा तो मुझे वो वक्त याद आया जब मेरी बड़ी दीदी इस मैगजीन को पढ़ती थीं और इसमें आने वाली रेसिपीज बनाने की कोशिश करती थीं। उस वक्त मैं छोटी थी और दीदी कॉलेज जाती थीं। कुकिंग के साथ वह ब्यूटी टिप्स भी अपनाती थीं। मुझे उस दिन को याद करके बहुत हंसीं आती है जब दीदी ने एक ब्यूटी टिप्स को फॉलो करते हुए मेरे, मम्मी और अपने खुद के चेहरे पर फेस पैक लगा दिया था और पापा आये तो वो डर गए। आज इस मैगजीन को देखकर मुझे वही दिन याद आ गया।

  • -तनूजा (शाहदरा, दिल्ली)

अंजना ठाकुर (ग्वालियर, म.प्र.)