oral sex transmitted disease
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सेक्स में नया रोमांच जोड़ने के लिए ओरल सेक्स एक पुराना तरीका है। लेकिन इसे करने से पहले सावधानी रखना जरूरी है। एक नई रिसर्च ने सबको चौंका दिया है।

Oral Sex Transmitted Disease: अक्सर लोग सोचते हैं कि सेक्स से जुड़ी बीमारियां सिर्फ गुप्तांगों तक ही सीमित होती हैं। लेकिन असल में ऐसा नहीं है। एक नई रिसर्च ने सबको चौंका दिया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि एक आम सेक्सुअली ट्रांसमिटेड इंफेक्शन यानी एसटीआई ह्यूमन पेपिलोमा वायरस यानी एचपीवी का कारण बन सकता है। इस वायरस के कारण सिर्फ गले या गर्भाशय का कैंसर नहीं बल्कि, स्किन कैंसर होने का जोखिम भी बढ़ सकता है।

पैदा कर सकता है खतरनाक वायरस

रिसर्च के अनुसार ब्रिटेन में एचपीवी दूसरा सबसे ज्यादा फैलने वाला सेक्सुअली ट्रांसमिटेड इंफेक्शन है।
According to research, HPV is the second most common sexually transmitted infection in the UK.

सेक्स में नया रोमांच जोड़ने के लिए ओरल सेक्स एक पुराना तरीका है। लेकिन इसे करने से पहले सावधानी रखना जरूरी है। रिसर्च के अनुसार ब्रिटेन में एचपीवी दूसरा सबसे ज्यादा फैलने वाला सेक्सुअली ट्रांसमिटेड इंफेक्शन है। हर 5 में से 4 लोग अपने जीवन में कभी न कभी एचपीवी से संक्रमित होते हैं। अब अमेरिकी वैज्ञानिकों की एक टीम ने बताया है कि यह वायरस त्वचा के एक खास तरह के कैंसर ‘स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा’ को पैदा कर सकता है।

ऐसे हुआ यह बड़ा खुलासा

यह चौंकाने वाला खुलासा तब हुआ जब 34 साल की एक महिला बार-बार स्किन कैंसर से जूझ रही थी। डॉक्टरों को लगा कि उसकी बीमारी वंशानुगत है और उसकी त्वचा सूरज की रोशनी से जल्दी संक्रमित हो जाती है। लेकिन बाद में जब अमेरिका के नेशनल हेल्थ इंस्टीट्यूट ने उसकी जांच की। जिसमें पता चला कि महिला के कैंसर सेल्स में एचपीवी का जीन मौजूद था। यह वायरस उसकी त्वचा की कोशिकाओं में घुसकर उन्हें नुकसान पहुंचा रहा था।

इसलिए बनी संक्रमण का शिकार

वैज्ञानिकों ने पाया कि महिला की इम्यूनिटी बहुत कमजोर थी। इसलिए उसका शरीर वायरस से लड़ नहीं पा रहा था। फिर उसका इलाज स्टेम सेल ट्रांसप्लांट से किया गया। जिसके बाद महिला का कैंसर ठीक हो गया।

ओरल सेक्स के जरिए फैलता वायरस

वैज्ञानिकों ने बताया कि महिला को बीटा-एचपीवी नाम के वायरस से संक्रमण हुआ था। यह वायरस त्वचा पर होता है और यौन संपर्क से फैल सकता है। खासतौर पर ओरल सेक्स के दौरान। वैज्ञानिकों ने यह भी पाया कि ये वायरस उस एचपीवी वायरस से अलग है जो गले या गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर से जुड़ा होता है। उसे अल्फा-एचपीवी कहा जाता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि अगर किसी की इम्यूनिटी कमजोर हो, तो एचपीवी शरीर के अलग-अलग हिस्सों में कैंसर को जन्म दे सकता है।

ऐसे रखें खुद को सुरक्षित

विशेषज्ञों का कहना है कि एचपीवी का टीका इस वायरस के खिलाफ बहुत असरदार है। साथ ही ओरल सेक्स के दौरान साफ सफाई का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। ऐसा न करने पर आप स्क्वैमस सेल स्किन कैंसर का शिकार बन सकते हैं।

पहचानें स्क्वैमस सेल स्किन कैंसर को

आमतौर पर लोग स्क्वैमस सेल स्किन कैंसर को समय पर नहीं पहचान पाते। लेकिन इसकी समय पर पहचान करना जरूरी है। अगर त्वचा पर कोई उभरी हुई गांठ, पपड़ीदार लाल या गुलाबी धब्बा या ऐसा घाव है जो लंबे समय से नहीं भर रहा तो सतर्क हो जाएं। ये स्किन कैंसर का संकेत हो सकता है। ये बीमारी खासकर उन लोगों को होती है जो धूप में ज्यादा रहते हैं, जिनकी त्वचा गोरी होती है। पुरुषों में ये कैंसर महिलाओं के मुकाबले दोगुना ज्यादा होता है। अगर शुरुआती स्टेज में इसे पकड़ लिया जाए तो इसका इलाज आसान है और 99% लोग ठीक हो जाते हैं।

मैं अंकिता शर्मा। मुझे मीडिया के तीनों माध्यम प्रिंट, डिजिटल और टीवी का करीब 18 साल का लंबा अनुभव है। मैंने राजस्थान के प्रतिष्ठित पत्रकारिता संस्थानों के साथ काम किया है। इसी के साथ मैं कई प्रतियोगी परीक्षाओं की किताबों की एडिटर भी...