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गृहलक्ष्मी की कहानियां - पाषाण हृदय
Stories of Grihalaxmi - Stone Heart

गृहलक्ष्मी की कहानियां – मैंने पत्नी से कहा कि पुरुष पाषाण हृदय वाला हो सकता है पर नारी पाषाण हृदय नहीं हो सकती ‘‘नीलिमा दीदी की बात भूल गए क्या? पत्नी ने पूछा” अरे हां उन्हें तो भूल ही गया। पूरी घटना याद आ गई। उनकी बेटी ममता का विवाह था। पंडाल सजा हुआ था, तभी रमेश ने कहा ‘‘जीजाजी आ गए। ” उस राक्षस को तुरंत यहां से बाहर निकाल दो। यदि ममता चाहती है कि वह राक्षस उसका कन्यादान करे तो मैं इस शादी में शामिल नहीं हो सकती, नीलिमा दीदी ने कहा। “जिस आदमी ने मुझ पर और मम्मी पर अत्याचार किए, उसे मैं पिता का दर्जा नहीं दे सकती। रमेश मामा, उस आदमी को तुरंत यहां से निकाल दीजिए। ‘‘ममता ने कहा।

जिस आदमी से नीलिमा दीदी को इतनी नफरत थी, एक समय था कि वह उन्हें प्राणों से भी अधिक प्रिय था। ” ये हैं मेरी सहेली नीलिमा, हिन्दी साहित्य में एम.ए. कर चुकी हैं और आप हैं हिन्दी के विभागाध्यक्ष आदित्य शुक्ला। नीलिमा के माता-पिता का देहान्त हो चुका है और अब ये होस्टल में रहती हैं ‘‘प्रिया ने कहा, आप किस विषय में पी.एच.डी.करना चाहती हैं” आदित्य ने पूछा,” मैं हरिशंकर परसाई के साहित्य पर पी.एच.डी करना चाहती हूं, जिन्होंने अपने साहित्य के द्वारा समाज में व्याप्त विसंगतियों पर तीखे प्रहार किए हैं। उन्होंने नीलिमा से कहा, पर अच्छा गाइड कहां मिलेगा मुझे ‘‘नीलिमा ने कहा” यदि मुझे आपका गाइड बनने का सौभाग्य मिले तो? आदित्य ने पूछा। अगले ही दिन आदित्य ने नीलिमा को बुलाया था। आदित्य शुक्ला जैसे विदवान प्रोफेसर की गाइडेन्स में वह पी.एच.डी करेगी, इसका ख्याल से उसकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। वह रात भर सो नहीं पायी। वह दिन भी आया जब नीलिमा ने पीएचडी कर ली। एक दिन आदित्य ने नीलिमा के सामने विवाह का प्रस्ताव रख दिया।

दोनों की शादी हो गई। सात वर्ष के वैवाहिक जीवन में नीलिमा ने ममता और अंशुल को जन्म दिया। जून के महीने में वे घूमने के लिए नैनीताल गए थे। नीलिमा को महसूस हुआ कि वह संसार की सबसे सुखी गृहणी है पर उसे पता नहीं था कि उसकी खुशियों को ग्रहण लगने वाला है। रात को आदित्य ने कहा‘‘ नौकरी करना गुलामी है। मैंने निर्णय किया है कि लेखन कर अपनी आजीविका चलाऊंगा” ‘‘बड़े साहित्यकार भी लेखन के जरिए अपनी आजिविका नहीं चला पाते। आप इतनी अच्छी नौकरी नहीं छोड़ सकते। मै। आपको ऐसा नहीं करने दूंगी। ममता और अंशुल अभी छोटे हैं । हमें उनका भविष्य संवारना है । नौकरी छोड़ने का बेतुका ख्याल आपको दिमाग में कैसे आया? नीलिमा ने कहा। ‘‘तुम भी तो मेरी मदद से पीएचडी कर चुकी हो। अच्छी नौकरी कर सकती हो। ‘‘आदित्य ने कहा,‘‘ मैं नौकरी करूगी और आप घर में खाली बैठेंगे। ‘‘नीलिमा ने कहा । ” बेबकूफ औरत, मेरे लेखन को स्तरहीन समझती है।”

आदित्य ने नीलिमा को चांटा मार दिया। उस चांटे ने नीलिमा के सभी सपनों को तोड़ दिया। ”हम दोनों अकेले होते तो बात और थी पर अब तो बच्चे भी हैं, उनके भविष्य के बारे में भी तो सोचिए।‘‘नीलिमा ने बिलखते हुए कहा, पर आदित्य ने नीलिमा की एक नहीं सुनी और अगले ही दिन इस्तीफा दे दिया। नीलिमा ने एक कालेज में नौकरी कर ली। आदित्य की कहानियां अस्वीकृत होने लगी। एक दिन वह शराब पीकर घर आया और बेटी से खाना परोसने के लिए कहा । बेटी ने कहा” मैं पढ़ रही हूं। आप खुद खाना ले लीजिए।” बदतमीज जुबान चलाती है।” आदित्य ने जलती हुई सिगरेट बेटी की उंगली पर रख दी। बेटी की चीख निकल गई।

एक दिन वह नीलिमा के जेवर लेकर भाग गया। वह टूट जाती पर सहेली प्रिया के पति ने उसकी और उसकी बच्चों की परवरिश की जिम्मेदारी स्वयं पर ले ली। प्रिया ने बच्चों को मौसी जैसा स्नेह दिया और रमेश बच्चों के प्रिय मामा बन गए। इन सभी के स्नेह ने नीलिमा को दुखों से उबार लिया। ममता ने एम.बी.ए करने के बाद कंपनी में नौकरी कर ली और अंशुल लेखा अधिकारी बन कर मुम्बई में शिफ्ट हो गया। और एक दिन उसके पिता अचानक आ गए। ‘‘आप खाना खायेंगे?” रमेश ने पूछा, वह बिना संकोच के ऐसे खाना खाने लगा, जैसे कई दिनों का भूखा हो, ‘‘मैं एक बार नीलिमा से मिल सकता हूं? उसने पूछा, ‘‘दीदी आपसे नहीं मिलेंगी। आपको पता है आपने अपनी एक गलती से सब कुछ खो दिया। पति होने का हक खो दिया। पिता कहलाने का हक खो दिया, क्यों किया आपने ऐसा? रमेश ने पूछा।

आदित्य ने कोई जवाब नहीं दिया। उसके होठों पर अजीब सी मुस्कान आ गई। ‘‘यार बहुत कडकी में हूं, वहां सुपरवाइजर की नौकरी करना चाहोगे? ‘‘उसके पास हां कहने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। उसने फैक्ट्री में पांच महीने तक नौकरी की ओर फिर नौकरी छोड़कर कहीं चला गया। स्थायित्व उसके जीवन में ही नहीं था। नीलिमा दीदी ने पति को माफ नहीं किया। पति को बेटी का कन्यादान नहीं करने दिया। इसलिए कुछ औरतों ने उन्हें पत्थर दिल औरत का खिताब दिया। यह सच है कि पत्थर में आंसू नहीं निकलते हैं पर उन्होंने अपने एकान्त में कितने आंसू बहाये होंगे। 

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