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कथा

मुक्ता गुस्से में थी। पति सलिल घटिया किताबों, पुरूषत्व की ताल ठोंकने वाले मित्रों की मनगढ़न्त झूठी बातों को सच मानकर मुक्ता की देह पर जिस तरह टूटता, मुक्ता को ऐसा लगता जैसे उसके शरीर का अपमान किया जा रहा है। वह हर रात इसी अपमान के दौर से गुजरती।

सलिल देशी-विदेशी नुस्खे, दवाएं अपनाकर उसके शरीर को स्त्री न समझकर शिकार समझता। मुक्ता की चीख-कराह सुनकर वह प्रसन्न होता। खुश होता अपनी मर्दानगी पर । दोस्तों की काम सम्बन्धी सड़क छाप पुस्तकों में उसने यही तो पढ़ा था। ऐसे ही तो मित्रों ने अपने तजुर्बे बताये थे। वयस्क कही जाने वाली फिल्मों में यही सब तो होता है। पहली रात स्त्री के अंग से खून निकलना उसके कुंवारेपन की निशानी है।

शारीरिक सम्बन्धों में बल प्रयोग, पत्नी के चीखने रोने का अर्थ है कि वह प्रसन्न है। संतुष्ट है। और जब सलिल खर्टाटे मारकर सो जाता तो मुक्ता अपने शरीर पर वे निशान देखती, जो सलिल की हैवानियत की निशानी थे। उसने विरोध किया लेकिन पति पर यही सोच हावी थी कि स्त्री की न में ही हां होती है। कई बार रोक-टोक, समझाने का सलिल पर कोई असर नहीं पड़ा तो मुक्ता ने अपनी अटैची में सामान बांधा और मायके चली गई।

सलिल को लगा कि कुछ दिन में आ जायेगी। जब ऐसा नहीं हुआ तो वह लेने पहुंच गया। मुक्ता ने जाने से इंकार कर दिया।

‘‘क्यों, आखिर क्या बात है? सलिल ने पूछा।

‘‘जब इंसान बन जाओ तो आ जाना। मुक्ता ने क्रोध में उत्तर दिया।

‘‘मैंने ऐसा क्या कर दिया? ‘‘सलिल ने आश्चर्य के साथ पूछा।

‘‘मुझे तुम्हारे जैसे हवस के भेड़िये के साथ नहीं रहना। जो स्त्री को केवल अपनी भूख मिटाने का माध्यम समझे। वो भी जानवरों की तरह‘‘ मुक्ता ने उग्रता से कहा। 

‘‘कहीं तुम मेरी मर्दानगी से तो नहीं डर गई ‘‘सलिल ने मजाक करते हुए कहा।

‘‘जिसे तुम मर्दानगी समझते हो। वह दरिन्दगी है। मुझे अपने शरीर का अपमान, अपनी आत्मा को छलनी नहीं करवाना बार-बार ” मुक्ता ने क्रोध में उसे अपने शरीर पर पड़े निशान दिखाये। ‘‘ये देखो ये काटने के, खरोंचने के निशान पूरे शरीर पर हैं। अपनी पत्नी के साथ जानवरों की तरह व्यवहार करते तुम्हें शर्म नहीं आती । तुम्हारी मर्दानगी से मैं कितनी चोटिल, पीड़ित और अपमानित महसूस करती हूं। वासना के भूखे भेड़िये हो तुम। मैं तुम्हारी धर्म पत्नी हूं, कोई बाजारू स्त्री नहीं। न ही तुम्हारी घटिया किताबों की सेक्स गर्ल हूं। चले जाओ यहां से। तुमने प्रथम मिलन से अब तक मेरे मन में पुरूषों के प्रति, तुम्हारे प्रति नफरत की भावना पैदा कर दी है।

मुक्ता के क्रोध में उसके परिवार वालों ने भी साथ दिया। नई-नवेली दुल्हन के साथ ऐसा बर्ताव। चले जाओ यहां से। तलाक के कागज पहुंचा दिये जाएंगें।

सलिल वापिस आ गया। उसने एक विवाहित मित्र से इस सम्बन्ध में बात की उसने कहा-‘‘भाई, औरतों को समझना बड़ा कठिन काम है। बिस्तर पर कमजोर पड़ो तो ताने, व्यंग। भारी पड़ा तो पुरूष कसाई, जानवर। मेरी पत्नी भाग गई शादी के दो माह बाद ही। मुझे लगा शायदमें उसे शारीरिक रूप से संतुष्ट नहीं कर पा रहा हूं। मैं ही कमजोर था, इसलिए परपुरूष में उसने वह सुख तलाश लिया और चली गई।” और उसका मित्र उदास हो गया मैंने तो हर संभव उसे बिस्तर सुख दिया। फिर वह क्यों मुझे छोड़कर चली गई। कहती है कि मैं उसका अपमान करता हूं बिस्तर पर।”

सलिल और उनका खास मित्र सरस एक ही दफ्तर में काम करते थे। दोनों में काफी घनिष्ठता थी। वे एक-दूसरे से हर तरह की बात करते थे।

‘‘यार सरस, तुम्हारी पत्नी ने कुछ वजह बताई होगी छोड़ने की” सलिल ने पूछा।

‘‘शायद मैं सक्षम नहीं था।” सरस ने उदास होकर कहा-”शायद मैं उसकी शारीरिक आवश्यकताओं की पूर्ति करने सक्षम नहीं था। वह बहुत ही कामुक स्त्री थी।

‘‘ये तुम्हारी पत्नी ने कहा”

‘‘नहीं हकीम साहब ने”

‘‘पत्नी ने क्या कहा?”

‘‘वो मैंने उससे पूछा नहीं वह भी यही कहती। मैं पूछकर स्वयं को शर्मिन्दा क्यों करूं। सो मैंने नहीं पूछा। और इसके अलावा कारण भी क्या हो सकता है?”

‘‘लेकिन फिर भी पूछना तो था। असली वजह तो वही बता सकती थी।”
‘‘और क्या वजह हो सकती थी। क्या सुनता उसके मुंह से। ये कि मुझसे कमी है। मैं उसे खुश नहीं रख सकता। क्या नहीं किया उसके लिए । अच्छा खाना, अच्छा पहनना ओढ़ना। दिन भर चलने वाले टी.वी सीरियल को लगातार देखने वाली घरेलू महिलाओं पर और क्या असर होना है। सीरियल में हर स्त्री की दो-चार शादियां, घर से भागना अवैध सम्बन्ध बनाना आम है। कुछ उसका असर भी तो पड़ना है।”

सरस की बात सुनकर सलिल ने कहा-‘‘मैं तो पूर्णतः बिस्तर पर फिट हूं। इतना कि मेरी स्त्री मुझे हिंसक भेड़िया कहती है। समझ नहीं आता कि वह क्यों मायके चली गई नाराज होकर”

‘‘बहाना चाहिए सम्बन्ध तोड़ने का। होगा कोई शादी के पहले का यार। दिल का मामला होगा, छोड़ दिया। महिला मुक्ति, महिला स्वतंत्रता पति-पत्नी की बराबरी वाले नारों, आन्दोलनों ने महिलाओं को स्वछन्द बना दिया है। ‘‘सरस ने अपना तर्क दिया।

‘‘लेकिन ऐसा तो कुछ भी नहीं सुनने में आया । न उसने मुझसे कभी कहा, सलिल ने अपने तर्क दिया।

सलिल के तर्क से सरस ने चिढ़कर कहा-‘‘अब क्या कोई औरत अपनी आशिकी, गैर पुरूष से सम्बन्ध को अपने पति को बतायेगी। स्त्रियों को बेवकूफ समझा है क्या? मक्कारी का नाम ही स्त्री है”

‘‘तो अब आगे क्या ” सलिल ने पूछा।

‘‘जब उन्हें कोई और मिल सकता है तो हमें क्यों नहीं। तलाक लो, नमस्ते करो और दूसरी शादी करो। जो गया उस बेवफा को क्या याद करना ‘‘सरस ने गुस्से में कहा।

दोनों चर्चा कर रहे थे। कैंटीन में । तभी ऑफिस की एक सीनियर महिला ने कहा-‘‘माफ करना। आपकी बातें मेरे कानों तक पहुंची। ‘‘मैं आपसे कुछ कहना चाहती हूं यदि आप बुरा न मानें तो”

वह भद्र बुजुर्ग महिला उन दोनों से उच्च पद पर थी। उन्हें बुरा तो लगा लेकिन वह सीनियर थी। फिर जब सुन ही ली उनकी बातें तो यदि कुछ कह रही हैं तो सुनने में क्या हर्ज है।

‘‘कहिये” सरस ने कहा।

‘‘आप लोग एक-एक बार अपनी पत्नी से अकेले में खुलकर स्पष्ट बात क्यों नहीं करते”

‘‘ वो हम कर चुके हैं ” सलिल ने उखड़े मन से कहा।

‘‘फिर आप किसी अच्छे सेक्सालाजिस्ट से मिलकर देखिये।”

‘‘मैडम क्या हम नपुंसक है जो सेक्स स्पेलिस्ट से मिलने की सलाह दे रही है आप”

‘‘आपसे किसने कहा कि कमजोर, नंपुसंक व्यक्ति ही सेक्स स्पेशलिस्ट से मिलता है”

उन्होंने बिना मांगे पता और फोन नम्बर लिखा कार्ड दे दिया और अपने केबिन में चली गई।

‘‘औरत है न औरत को ही सही ठहरायेगी। सरस ने अपना तर्क दिया। ‘‘फिर भी मिलने में क्या हर्ज है ‘‘सलिल ने कहा।

‘‘क्या होगा उससे? हममे ही कमी निकालेगा। फिर मर्दाना शक्ति बढ़ाने वाली दवाईयां देगा। एक सेक्स स्पेशलिस्ट और क्या इलाज दे सकता है। व्यर्थ का खर्चा। लगता है मैडम का कमीशन बंधा है। ग्राहक लाओ कमीशन ले जाओ ‘‘सरस ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा।

‘‘सलिल ने भी उसकी हां में ही हां मिलाई। तुलसीदास की तरह वह भी चोट खाकर अपनी स्त्री से अपमानित होकर आया था। तुलसी ने लिखा था ढोल, गंवार, शूद्र, पशु नारी । सकल ताड़ना के अधिकारी।

सलिल ने कहा- ‘‘हां मैं इन औरतों को अच्छी तरह से जानता हूं। मन हुआ तो ठीक नहीं तो दूसरा पति चुन लिया” दोनों की बात फिर सीनियर महिला अधिकारी ने सुन ली। उसे गुस्सा आ गया।

उसने दोनों को बुलाकर फटकारा” क्या जानते हो महिलाओं के बारे में अच्छी तरह से। अगर जानते होते तो अनाप-शनाप न बकते। एक बार के अपमान से तुम्हारे अंह को इतनी चोट पड़ी और तुम लोग स्त्रियों के विषय में इतनी अपमानजनक बातें करने लगे। उनका निरादर करने लगे। महिलाएं न जाने क्या सोचती होंगी तुम्हारे बारे में, पुरुषों के बारे में, कभी सोचा है। स्त्रियों के बारे में अपनी राय बदलो। कुछ नहीं चाहिए स्त्रियों को पुरूषों से सिवाय प्यार और सम्मान के। बदले में पूरा जीवन न्यौछावर कर देती है स्त्रियां।

‘‘मैडम आप क्या जाने हमारी तकलीफ” सरस ने चिढ़कर कहा।

‘‘मुझे जानने की जरूरत भी नहीं। जब तुम पति होकर अपनी पत्नी को न जान सके” मैडम ने तेज स्वर में कहा।

‘‘जो भाग गई अपना घर अपना पति छोड़कर। ऐसी महिला की आप सिर्फ इसलिए तरफदारी कर रही हैं क्योंकि आप भी महिला हैं” सरस ने चिढ़कर कहा।

‘‘क्या एक पुरूष बलात्कारी है। दहेज के लिए कोई अपनी स्त्री को जला दे तो सभी पुरुषों के विषय में वैसा ही सोचना गलत है। यदि तुम्हारी स्त्री के कदम बहके तो इसका अर्थ ये तो नहीं कि हर स्त्री वैसी ही हो। आप तो अपनी स्त्री के कारण पूरी स्त्री जाति के विषय में गलत राय कायम कर रहे हैं। मैं केवल इतना कहना चाह रही थी कि क्या आपने जानने की कोशिश  की कि आपकी पत्नी ने ऐसा क्यों किया?

सलिल को मैडम की बात सही लगी। उसनें कहा मैडम मैं आपकी बात से सहमत हॅूं। मैं जानने की कोशिश करूंगा कि मेरी पत्नी नाराज होकर क्यों चली गई।”

सरस भी चुपचाप सलिल के साथ बाहर निकल आया। सरस को भी लगा कि एक बार पूछ लेने में क्या हर्ज है? उसने अपने मोबाइल से नम्बर लगाया। दूसरी तरफ से उसकी पत्नी ने फोन उठाया” हलो”

पत्नी की आवाज पहचानकर सरस ने पूछा-” क्या मैं जान सकता हूं कि तुम मुझे छोड़कर क्यों गईं? कोई कमी थी तो बताना था। अग्नि के समक्ष सात फेरे लेकर सात जन्म साथ निभाने की शपथ लेकर क्यों किसी के साथ भाग गई।”

उधर से उसकी पत्नी की गुस्से और रूदन के मिले-जुले स्वर में आवाज आई” क्या औरत को ही सबकुछ याद रखना चाहिए। पुरूष का कोई कर्तव्य नहीं। मैं तुम्हारे लिए क्या थी? मात्र तुम्हारे घर का काम करने वाली मुफ्त की नौकरानी। रात में तुम्हारा बिस्तर सजाने वाली वेश्या। तुमने मुझे कभी स्त्री समझा। पत्नी समझा। शराब के नशे में अपने द्वारा भोगी महिलाओं का वर्णन करके अपनी मर्दानगी का ढोल बजाने वाले मालूम भी है कि उन स्त्रियों में से एक मेरी रिश्ते की बहिन भी थी। तुमने बहला-फुसलाकर उसका पूरा जीवन नरक कर दिया। उसके पति ने उसे चरित्रहीन समझकर छोड़ दिया।

औरत को एक रात के लिए बिस्तर तक लाना मर्दानगी नहीं है। मर्दानगी तो वो है कि पूरे जीवन जिस स्त्री का हाथ थाम लिया, उसके सुख-दुख में उसका जीवन भर साथ निभाना। तुम किसी के साथ सम्बन्ध बनाओ, वो तुम्हारी मर्दानगी और वही स्त्री करे तो चरित्रहीन। पुरूषत्व वो जो क्षमा कर सके। अपनी स्त्री को हर हाल में अपना सके। मैं तुम्हारी चरित्रहीनता से नफरत करने लगी थी। सच्चे प्यार की तलाश में मेरे कदम भी बहक गये। मैं भी पछता रही हूं। क्या तुम्हें कोई पछतावा हैं यदि मैं तुम्हें कई स्त्रियों से सम्बन्ध बनाने के वैवाहिक अपराध के लिए क्षमा कर सकती हूं। तो क्या तुम मुझे एक बार बहकने के लिए क्षमा कर सकते हो।”

सरस को अपनी गलती का अहसास हुआ। वह समझ गया जिसे वह अब तक अपना पुरूष होने का अंहकार समझता रहा। वह झूठा था। वह मात्र उसकी चरित्रहीनता थी । उसने कहा-‘‘तुम घर आ जाओ। हम नये सिरे से अपना गृहस्थ जीवन शुरू करेंगे। मैं तुम्हें शिकायत का कोई मौका नहीं दुंगा। अपनी गलतियों के लिए माफी मांगता हॅूं तुमसे”

दूसरी तरफ से सतत् रोने की आवाज आती रही। सरस की पत्नी वापिस आ चुकी थी। सलिल ने शहर की जानी मानी सेक्सोलाजिस्ट डॉक्टर सरिता से मुलाकात की। उन्हें सारी बताई डॉक्टर सरिता ने हंसते हुए कहा- आपका केस मानसिक रोगी का है। आप मेरे पास गलत आ गये।”

‘‘जी” सलिल ने अचकचाकर कहा।

‘‘आपके गंदे शौक,गंदे आदतें, गंदी किताबों, अश्लील फिल्में, घटिया दोस्तों झोलाछाप डॉक्टरों की सलाह। आपका केस तो आपकी दिमागी विकृति का है। इसमें मैं क्या कर सकती हॅूं।

‘‘ये आप क्या कह रही हैं”

‘‘मै ठीक कहा रही हूं मिस्टर सलिल। आपकी गंदी सोहबत के कारण आपकी पत्नी आपको छोड़कर चली गई। जैसा कि आपने बताया कि पहली रात रक्तस्त्राव कौमार्य की निशानी है। किसने बताया आपको। आपके दोस्तों ने । अश्लील सड़क छाप किताबों ने। ये नहीं बताया कि वह मामूली सी कौमार्य की निशानी, साइकिल चलाने, रस्सी कूदने से भी टूट सकती है।” सलिल चुप रहा। डॉक्टर सरिता ने कहना जारी रखा।

‘‘क्या आपकी पत्नी पोर्न स्टार है। वेश्या है।”

‘‘नहीं तो, ये क्या कह रही है आप”

‘‘एक घरेलू संस्कारी लड़की के साथ जानवरों की तरह हरकतें करते हो। शादी की पहली रात मन मिलाने की होती है। एक -दूसरे को समझने की होती है। स्त्री का शरीर वैसे भी नाजुक कोमल होता है। तुमने क्या किया उसके साथ। अपनी पत्नी के साथ जोर जबरदस्ती करते रहे। उसकी चीख कराह में मजा आता रहा तुमको। तुम आदमी नहीं जानवर ही तो हो। इसे डाक्टरी भाषा में सेक्सुअल विकृति कहते हैं। अपना इलाज कराओ।

डॉक्टर सरिता की बात सुनकर सलिल के होश उड़ गये। ये क्या करता रहा वह अपनी पत्नी के साथ। सबसे पहले उसने घर जाकर हकीमों की यौन शक्तिवर्धक गोली, कैप्सूल, चूर्ण उठाकर घर के बाहर कचरे के ढेर में फेंके। उसके बाद वे अश्लील सड़क छाप गंदी किताबें जलाई। कम्प्यूटर पर अपलोड किये पोर्न वीडियो हटाये। गंदी फिल्मों कीसी.डी.डी.वी.डी. नष्ट की। और सीधा अपनी पत्नी मुक्ता के पास पहुंचा।

उसने मुक्ता के पैरों में गिरकर कहा-” इस यौन विकृत मानसिकता वाले पति को माफ कर दो। मैं अब मात्र तुम्हारा पति हूं और ये बात समझ गया हूं कि पत्नी का मन जीतना ही पुरूषत्व है। गलत संगत छोड़कर तुम्हारे प्रेम की संगत करना चाहता हूं। मैं मुक्त हो चुका उस गंदगी से उस विकृति से मुझे माफ कर दो मुक्ता”

स्त्री का दिल बहुत बड़ा होता है। वह सबकुछ माफ कर देती है। सब कुछ भुला देती है। उसे बस थोड़ा सा प्यार और सम्मान चाहिए। गलती बच्चे करें या पति। वह मां बनकर बच्चों को, पत्नी बनकर पति को क्षमा कर देती है। पुरूष को चाहिए कि वह स्त्री समझे। उसके पास भी एक धड़कता दिल है। उसकी भावनाओं को समझे।

पति सलिल को रोते देख मुक्ता का हृदय पिघल गया। उसनें अपने पति से कहा-‘‘उठिये, ये क्या कर रहे हैं आप। लोग देखेंगे तो क्या कहेगे। पति का स्थान पैरों में नहीं पत्नी के दिल में होता है।

‘‘तुमने मुझे क्षमा कर दिया”

‘‘हां। कर दिया, अब उठो भी”

सलिल ने मुक्ता को अपने सीने से लगा लिया। घर वापसी के लिए मुक्ता ने अपना सूटकेस भरा और अपने पति सलिल के साथ चल पड़ी।