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गृहलक्ष्मी की कहानियां – चल री सजनी

गृहलक्ष्मी की कहानियां – गूंजती ढोलक की थाप, हंसती-गाती-ठुमकती महिलाएं, शहनाई की स्वर-लहरियां आकाश को भेदती आतिशबाजी और सबसे निःस्पृह बैठी सुधा। एक क्षण के लिए भी किंचित हंसी उसके चेहरे पर नहीं आती है। फेरों का कार्यक्रम निपट गया। दूल्हा और बाराती भी जनवासे में चले गये। मां ने सुधा का पूजा वाले कमरे […]

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गृहलक्ष्मी की कहानियां : एहसास

बीस साल की राधिका शहर में आने के बाद और आकर्षक लगने लगी थी। कुछ ही दिनों में उसका सौंदर्य निखर आया था। अत: रमेश का उसकी तरफ खिंचाव बढ़ रहा था।

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आवरण – गृहलक्ष्मी की कहानियां

गृहलक्ष्मी की कहानियां – हफ्ते भर की मेहनत के बाद पूरा घर सेट हुआ था, बिजेन्द्र के आॅफिस जाते ही मैंने सोचा आज अदरक वाली गरमागरम चाय पीते हुए अपनी मनपसंद पत्रिकाएं पढूंगी, जो पिछले कई दिनों से नहीं पढ़ पा रही थी। तभी डोरबेल की आवाज सुनकर दरवाजा खोला तो सामने 4-5 महिलाएं खड़ी […]

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गृहलक्ष्मी की कहानियां : सिमटते दायरे

क्या सोच रखा है मैंने गुड़िया के बारे में कि उसे उन्मुकतता से जीना सिखाऊंगी, उसे बांधूगी नहीं, कभी। लड़कों की तरह तो नहीं पर लड़कों से अलग ही बनाऊंगी, क्योंकि मैंने इस समाज को देखा था, सोचा था और समझा भी था, जहां पर कभी लड़के-लडकियां समान नहीं हो सकते थे…

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विडंबना – गृहलक्ष्मी कहानियां

ये एक स्त्री के लिए विडंबना ही तो है कि घर-बाहर हर जगह उसका अपना ही वजूद सुरक्षित नहीं। नरपिशाचों से खुद को बचाते हुए लक्ष्मी का भाग्य भी ऐसी ही परिस्थितियों से गुज़र रहा था।

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लाइव गिफ्ट- गृहलक्ष्मी की कहानियां

कमरे की नीली रोशनी में उसका गोरा चेहरा, बिखरे बाल और तराशे हुए बदन को देखकर मैं पागल सा हो गया। अपने को रोक पाना मुश्किल सा लगने लगा, मेरा दिमाग शून्य होता जा रहा था…

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इतिश्री – गृहलक्ष्मी कहानियां

प्रसव के दौरान देवरानी पलक की मौत ने मुझे भीतर तक झकझोर दिया, उसकी उम्र ही क्या थी? मौत उम्र नहीं देखती, उसे जब आना होता वह आती है। मन को समझाएं हुए मैं उसकी नवजात बेटी को कमरे में सुलाने गयी तो वहां ताई सास अपनी बहू मीना को पाठ पढ़ा रही थीं। ‘मीना’ तू अपने मायके खबर कर दे। तेरे घर वाले सांत्वना देने आ जाएंगे, फिर मौका देखकर तेरी बहन रीना के रिश्ते की बात पल्लव से चला देंगे। बच्चों की खातिर शादी के लिए पल्लव मान ही जायेगा।

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जिसे ब्रुश करवाया वही बन गई दांतों की डॉक्टर

जब मैं 4 वर्ष की थी, मेरी छोटी बहन शानू का जन्म हुआ शानू के आने पर मेरी दुनिया उसके चारों ओर सिमट गई थी। मैं उसे बुहत प्यार करती थी। घटना उन दिनों की है, जब शानू 3 महीने की थी। उस दिन मैं सुबह ब्रश-पेस्ट लेकर शानू के पास गई। खुद पेस्ट करके […]

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गृहलक्ष्मी की कहानियां -फेस पैक का झटका

गृहलक्ष्मी की कहानियां – नाश्ते के काम काम से निबट कर जब मै ́ने घड़ी देखी तो दस बज रहे थे। अभी सफाई वाली के आने मे ́ एक घंटा है। पति देव ऑफिस, बच्चे कॉलेज चले गए थे। नया फेस पैक लाई थी, बहुत तारीफ की थी दुकानदार ने। चलो यही लगाया जाए। चेहरा साफ […]

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गृहलक्ष्मी की कहानियां : सासू मां की अच्छी सीख

गृहलक्ष्मी की कहानियां : मेरी यह आदत थी कि मैं रसोई में खाना, नहाने से पहले बनाती थी क्योंकि मुझे लगता था कि अगर नहाकर खाना बनाऊंगी तो गर्मी के कारण पसीने से नहाना, ना नहाना बराबर हो जाएगा। इसलिए पहले खाना बनाना उसके बाद नहाना ही सही है। एक बार मेरी सासू मां, ज्यादा दिनों के लिए […]

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