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गृहलक्ष्मी की कहानियां -फेस पैक का झटका
Stories of Grihalakshmi
गृहलक्ष्मी की कहानियां – नाश्ते के काम काम से निबट कर जब मै ́ने घड़ी देखी तो दस बज रहे थे। अभी सफाई वाली के आने मे ́ एक घंटा है। पति देव ऑफिस, बच्चे कॉलेज चले गए थे। नया फेस पैक लाई थी, बहुत तारीफ की थी दुकानदार ने। चलो यही लगाया जाए। चेहरा साफ करके फेस पैक लगाया, हल्के क्रीम रंग का फेस पैक शीशे मे ́ देख देख कर लगा कर सीधे लेट गई। पन्द्रह-बीस मिनट मे ́ फेस पैक सूख गया। मै ́ने स्पंज पानी मे ́ भिगोया और शीशे  के सामने खडी़ हुई तो एकदम चीख उठी, इतने जोर से कि चक्कर सा आ गया। शीशे  मे ́ काली भूतनी दिखाई दे रही थी। आँखों से आंसू बहने लगे कि जरूर फेस पैक रिएक्ट  कर गया है और मेरी स्किन जल गई है। जल्दबाजी में पति देव को फोन कर दिया।
मेरा चेहरा जल गया। इसके बाद चेहरे पर पानी डाला और खूब धोया तो चेहरा साफ हो गया। तब तक पतिदेव दरवाजे पर घंटा बजा रहे थे। दरवाजा खोला तो मुझे देख बोले, ‘कहां जल गई, ‘कही ́ नही ́, वो बस फेस पैक सूखकर… काला पड ̧ गया था तो डर गई। ‘अरे मै ́ तो डर ही गया फिर शरारत से बोले, ‘चमकता चेहा दिखाना था तो मै ́ ऑफिस  जाता ही नहीं। मैं शर्म से लाल हो गई।