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लाइव गिफ्ट- गृहलक्ष्मी की कहानियां
गृहलक्ष्मी की कहानियां

गृहलक्ष्मी की कहानियां – मैं मुम्बई में दिनभर के काम निपटा कर रात को होटल में आराम कर रहा था। तभी कालवेल बजी। इस समय कौन हो सकता है। सोचते हुए मैंने दरवाजा खोला तो देखा कि सामने एक लड़की खड़ी थी। मेरे बोलने के पहले ही वह बोली, ‘‘मैं आपको सर्विस देने आई हूं” 

मैंने कहा, ‘‘लेकिन मैंने तो ऐसी कोई डिमांड नहीं की”

उस लड़की ने आगे कहा, आपका मार्केटिंग का टारगेट पूरा हो गया, इसलिए कम्पनी ने आपको लाइव गिफ्ट के रूप में मुझे भेजा है फिर वह आराम से सोफे पर बैठ गई।

कमरे की नीली रोशनी में उसका गोरा चेहरा, बिखरे बाल, ब्लाउज से झांकते कसे हुए उभार और तराशे हुए बदन को देखकर, मैं पागल सा हो गया और अपने को रोक पाना मुश्किल सा लगने लगा, मेरा दिमाग शून्य होता जा रहा था, और यह भी जानने की कोशिश नहीं की कि क्या वास्तव में इसे मेरी ही कम्पनी ने भेजा है या यह कोई धोखा है।

मैंने पूछा
‘‘तुम्हारा नाम क्या है?”

उसने कहा, ‘‘नाम में क्या रखा है, आपका टारगेज पूरा तो आप खुश और मेरा टारमेट पूरा हुआ तो कम्पनी मुझ से खुश और दोनों को मिल गया गिफ्ट यानी कि आप तो काम से काम रखो।”

अब उसने दो जाम बनाए और एक मुझे दिया मैं बारीकी से उसकी हर गतिविधियों पर निगाह रखे हुए था।

अब उसे खुमारी छाने लगी थी और ऐसा लग रहा था वह बाहों में आने के बेताव हो रही है और बार-बार अंगड़ाई लेते हुए अपने संगमरमरी शरीर को मेरे सामने परोस रही थी। अब मुझ से भी नहीं रहा था। और रात कब गुजर गई, मालूम नहीं पड़ा मुंह अंधेरे वह उठी और बोली।

‘‘तुमसे ज्यादा तो नहीं मानूंगी, बस जल्दी से एक लाख रूपये निकालो..”
मेरा मुंह खुला का खुला रह गया।
‘‘इतने सारे पैसे?”

तब उसने झिड़कते हुए कहा अगर पैसे नहीं है तो यह सोने की चेन, घड़ी, मोबाईल और जितने पैसे हैं, सब जल्दी से मेरे हवाले कर दो, वरना…।”
मैं उसकी बात से परेशान नहीं हुआ और कहा।

‘‘देखा मैंने पहले ही तुमसे कहा था कि बाद में कोई लफड़ा मत करना। चलो हजार रूपये लो और यहां से चलती बनो।” यह कहते हुए मैं होटल छोड़ने के लिए अपना सामान समेटने लगा।

तभी लड़की ने अकड़ कर कहा
‘‘यह मेरा इलाका है, तुम यहां से बच कर नहीं निकल सकते हो, बस एक फोन करने की देरी है।” अब ज्यादा उलझना मेरे लिए खतरनाक हो सकता था। मैं समझ गया कि मैं इसके जाल में फंस गया हूं।

लड़की ने कहा.. मुझे तो पैसों से मतलब है मेरे बैग में कैमरा लगा है और रात भर की पूरी रिकार्डिगं इसमें है अगर यह बाहर निकल गये तब तुम जाना और यह कैमरा फिर मुझ से कुछ मत कहना।

फिर भी यह जानने के लिए कि लड़की मुझे बेवकूफ तो नहीं बना रही है, मैंने रिकार्डिगं दिखाने को कहा, उसने जब कैमरा चालू किया तब उसमें अंधेरा था, अब उसके परेशान होने की बारी थी।

बार -बार वह अपने बैग और कैमरे को उलट-पलट कर देख रही थी।

तब मैंने मुस्कुराते हुए कहा।‘‘ दरअसल आजकल मैं ऐसे ही सामान की मार्केटिंग कर रहा हूं, और वह देख रही हो ना, तुम्हारे बैग के ऊपर जो चादर पड़ी है वह मैंने ही फेंकी है।

अब वह बैग उठाकर कमरे से बाहर निकल गई।