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गृहलक्ष्मी की कहानियां :सासू मां की अच्छी सीख
Stories of Grihalakshmi

गृहलक्ष्मी की कहानियां : मेरी यह आदत थी कि मैं रसोई में खाना, नहाने से पहले बनाती थी क्योंकि मुझे लगता था कि अगर नहाकर खाना बनाऊंगी तो गर्मी के कारण पसीने से नहाना, ना नहाना बराबर हो जाएगा। इसलिए पहले खाना बनाना उसके बाद नहाना ही सही है। एक बार मेरी सासू मां, ज्यादा दिनों के लिए हमारे पास रहने के लिए आईं। पहले तो वे दो-तीन दिन देखती रहीं, लेकिन जब उनसे रहा नहीं गया तो वह मुझे एक दिन समझाकर बोलीं, ‘बेटी, सुबह-सुबह नहा-धोकर रसोई में खाना बनाया करो, इससे अन्नपूर्णा और लक्ष्मी मां दोनों प्रसन्न होती हैं तथा भंडार भरपूर रखती हैं। घर में बरक्कत भी रहती है। तुम तो घर की गृहलक्ष्मी हो, तुम्हारा कर्तव्य है कि अपने परिवार के साथ-साथ तुम अन्नपूर्णा और लक्ष्मी दोनों को खुश रखो। उनकी इस प्यार भरी सीख से मुझे अपनी इस आदत पर बहुत ग्लानि महसूस हुई और शर्म के कारण मेरी आंखों में आंसू आ गए लेकिन ये आंसू एक अच्छी बात को आत्मसात करने के लिए थे। सासू मां की इस सीख को मैंने अपने जीवन में सदा के लिए उतार लिया है।

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