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Tag: फिक्शन
नंगे पैर
गर्मी की छुट्टी में मैं अपनी नानी के यहां गई थी। जब मैं नानी के यहां जाती सारा काम खुद करती थी। किसी को कुछ नहीं करने देती थी। मेरी एक आदत थी। काम करते वक्त घर में चप्पल नहीं पहनती थी। उस दिन भी मैं नंगे पैर काम कर रही थी, जमीन कच्ची होने […]
अच्छे दिन आएंगे
बचपन में अक्सर पिताजी भाई से कहा करते थे, ‘पढ़ोगे-लिखोगे तो अच्छे दिन आएंगे। उस समय मैं सोचती थी, अच्छे दिन का पढ़ाई से क्या मतलब है। तभी मेरे बड़े भैया ने पढ़-लिख कर अच्छी सी नौकरी कर ली। इसके बाद उनकी शादी के लिए बात चलने लगी तो मुझे लगा कि इसे ही कहते हैं अच्छे दिन। एक […]
घर की लक्ष्मी – गृहलक्ष्मी कहानियां
माया को उसके सास-ससुर बात-बात पर ताने मारते। उसका पति तो उसे अधिक दहेज न लाने के कारण रोज तानों के साथ-साथ थप्पड़-मुक्के भी मारने लगा। माया की सुबह गलियों से शुरू होती और शाम लात-घूसे लेकर आती। ये सब सहना तो माया की अब नियति बन गया था। रोज-रोज की दरिंदगी को सहते-सहते माया के आंसू सूख चुके थे…
खेत की माटी
अंतर्मन में द्वंद्व चल रहा था। रह-रहकर पिछले 38 वर्षों का संघर्ष मन को उद्वेलित कर रहा था। विचार आता जीवन भर खटती रही, कभी पति के लिए कभी बच्चों के लिए अब रिटायर होने के बाद आराम से रहूंगी। जिंदगी में सकून भी तो कोई चीज है, नहीं तो घड़ी की सुइयों पर नाचते रहो।स्कूल की नौकरी करती थी तो कभी ख्याल नहीं आया कि जरूरत से ज्यादा व्यस्त हूं। मुझे आराम की आवश्यकता है, लेकिन अब विचारों में नकारात्मकता का भाव मन को सकून दे रहा था। इसी उहापोह में मैंने ससुराल के गांव जाने की सोची। घर परिवार में बात ही अलग थी। ढेर सारा प्यार, मिलकर खाना-पीना बतियाना।सुबह शाम आसपास के खेत में बतियाते सुबह-शाम आसपास के खेत में बतियाते निकल जाते, ठंडी ताजी हवा मन के घर कोने को तरोताजा बना जाती। खेत पर जाना मेरा नियम बन गया था।कई दिनों से देख रही थी, एक बूढ़ा रोज सवेरे से खेती में लग जाता, उसे देखकर पैर ठिठक गए। ‘बाबा आपके बच्चे नहीं हैं क्या? मैंने बूढ़े से पूछा। हैं क्यों नहीं, शहर में पढ़ाई कर रहे हैं, शनिवार, एतवार टैम मिले, ट्रेक्टर से जुताई कर दें।पढ़कर कुछ बन जाएंगे तो जीवन… ‘पर बाबा आपकी उम्र नहीं है खेत पर काम करने की मैंने कहा। बेटी मैं तो हमेशा से जमीन से जुड़ा रहा, बच्चों पर दबाव नहीं बनाया।फिर कुछ सोचकर बोले, ‘बेटी, मैं समय से पहले मरना नहीं चाहता। काम नहीं करूंगा, तो हाथ पैर बेकार हो जाएंगे।खेत की माटी भी जब तक दम है फसल उगाती रहे, फिर हम तो ठहरे मानस। मेरी आंख खुली रह गई। अंतर्मन ग्लानि से भर गया। मुझे लगा पढ़-लिख कर भी मेरा ज्ञान तो अधूरा ही रहा। मन ही मन कुछ अच्छा करने का प्रण कर अपने शहर लौट गई। यह भी पढ़ें-काश! अगले जन्म में पति बनूं – गृहलक्ष्मी कहानियां -आपको यह कहानी कैसी लगी? अपनी […]
गृहलक्ष्मी की कहानियां : सासू मां की अच्छी सीख
गृहलक्ष्मी की कहानियां : मेरी यह आदत थी कि मैं रसोई में खाना, नहाने से पहले बनाती थी क्योंकि मुझे लगता था कि अगर नहाकर खाना बनाऊंगी तो गर्मी के कारण पसीने से नहाना, ना नहाना बराबर हो जाएगा। इसलिए पहले खाना बनाना उसके बाद नहाना ही सही है। एक बार मेरी सासू मां, ज्यादा दिनों के लिए […]
असहाय – गृहलक्ष्मी कहानियां
घर में पानी भरपूर आता था। हमेशा पानी से हौज भरा रहता था। घर में रहने वाले चार लोग, उसमें भी दो बच्चे और सास बहू। सुबह-सुबह मां जी की आंख खुली तो नित्य कर्म से निवृत्त हो सोचा नहा लूं, तब तक पानी भी आ जाएगा और जितना पानी नहाने में खर्च होगा, फिर […]
मैं अपनी मम्मी को बूढ़ी नहीं होने दूंगा
बात अब से 22-23 साल पहले की है। हम संयुक्त परिवार में रहते थे। मेरे बेटे को मुझ से बहुत ज्यादा प्यार था इसलिए वह हमेशा मेरे आसपास रहता था। उसकी दादी, बुआ आदि उसे छेड़ती, ‘तुम्हारी मम्मी अच्छी नहीं है, तुम्हें प्यार भी नहीं करती। बेटा कहता, ‘मेरी मम्मी बहुत अच्छी है, आप तो […]
फ्रिज में सेब का पेड़
बात तब की है जब मैं चार वर्ष का था। मुझे सेब बहुत अच्छे लगते थे। मैंने पापा से कहा, पापा क्यों न हम अपने बाग में सेब का एक पेड़ लगवा लें। पापा ने कहा कि सेब सिर्फ ठंडे स्थानों पर ही फलता है, यहां गर्मी में नहीं। यह सुनते ही मैंने कहा, तो क्यों नहीं हम इसे […]
सोने पर लोन
मैं गांव की रहने वाली सीधी-सादी, कम पढ़ी-लिखी लड़की थी। शादी होकर इलाहाबाद आई, एक दिन पति के साथ मैं बाहर घूम रही थी तो मैंने अपने पति से कहा, ‘सुनो जी, आज रात को हम लोग इस बैंक के पास ही सोएंगे। मेरे ऐसा कहने पर मेरे पति ने मुझे बड़े आश्चर्य से देखा और बोले, ‘तुम […]
