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फिक्शन

मैं गांव की रहने वाली सीधी-सादी, कम पढ़ी-लिखी लड़की थी। शादी होकर इलाहाबाद आई, एक दिन पति के साथ मैं बाहर घूम रही थी तो मैंने अपने पति से कहा, ‘सुनो जी, आज रात को हम लोग इस बैंक के पास ही सोएंगे। मेरे ऐसा कहने पर मेरे पति ने मुझे बड़े आश्चर्य से देखा और बोले, ‘तुम क्या कह रही हो? क्या हमारे पास घर नहीं है, जो यहां सड़क पर सोएंगे? मैंने बड़े भोलेपन से कहा, ‘देखो, बैंक के सामने क्या लिखा है कि सोने पर लोन मिलेगा। मेरे ऐसा कहने पर उन्होंने जब बैंक के सामने लगा वह बोर्ड पढ़ा तो वो मेरी नासमझी पर बड़े जोर से हंसे और प्यार से मुझे सोने का अर्थ समझाया। अपनी नासमझी पर झेंप कर मैं शर्म से लाल हो गई।

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