Hindi Story: पार्क में कुछ देर टहलने के बाद मिश्रा जी ने अपने दोस्त से कहा कि आज तुम अकेले ही सैर कर लो, मैं तुम्हारे साथ आज सैर नहीं कर पाऊंगा। मिश्रा जी के दोस्त ने पूछा कि आज ऐसा क्या हो गया कि तुम सैर करने के लिये मना कर रहे हो। तुम तो हर किसी को यही समझाते हो कि यदि अपने जीवन में डॉक्टरों के चक्करों से बचना चाहते हो तो पार्क के चक्कर लगाते रहो। वरना बहुत जल्द किसी न किसी अस्पताल के आई.सी.यू. वार्ड में जाकर रहना पड़ेगा। क्योंकि इंसान को ऑक्सीजन सिर्फ दो जगह ही मिलती है एक तो सुबह उठ कर पार्क में और दूसरा अस्पताल के आई.सी.यू. वार्ड में।
मिश्रा जी ने कहा-‘भाई मैं सब कुछ जानता हूं लेकिन आज मेरा मूड ठीक नहीं है।’ मिश्रा जी के दोस्त ने कहा कि मैं आपकी हर बात स्वीकार कर सकता हूं, लेकिन तुम्हारी यह बात मेरे गले से नीचे नहीं उतर रही कि हमारे प्रिय लेखक मिश्रा जी का भी मूड कभी खराब हो सकता है। भाई आप तो कलम के ऐसे धनी हो कि आपकी कलम से निकले हुए एक-एक लेख को पढ़ कर मैंने न सिर्फ दुनिया के लोगों की सोच और विचारों को बदलते देखा है बल्कि कई दीन-दुखियों और हर समय तनाव में रहने वालों के कायाकल्प होने के नज़ारे का गवाह भी बना हूं। आपके लेख पढ़ कर तो साधारण-सा आदमी भी अपने जीवन को संतुलित करना सीख लेता है। इसलिये जो भी बात तुम्हारे मन में है, मुझे खुल कर बताओ।
इस पर मिश्रा जी ने अपने दोस्त से कहा कि तुम तो जानते ही हो कि मेरा बेटा शादी से पहले इस जिद्द पर अड़ा हुआ था कि जब तक नई कार नहीं लेकर दोगे उस समय तक घोड़ी पर नहीं बैठूंगा। मैंने जैसे-तैसे कर के बैंक से किश्तों पर उसे एक कार ले दी। किश्तें समय पर न चुका पाने के कारण अब कल रात को बैंक के कर्मचारी उसकी वो कार उठा कर ले गये हैं। जब बैंक के लोग कार ले जा रहे थे तो जानते हो मेरे इस काठ के उल्लू जैसे बेटे ने मुझ से कहा कि मुझे अगर यह पता होता कि बैंक वाले इस तरह भी करते हैं तो मैंने कार की बजाए शादी के लिये बैंक से कर्ज लेना था। कम से कम कार तो मेरे पास रह जाती। जब मैंने इससे कहा कि यदि कार रखने का इतना ही शौक है तो थोड़े हाथ-पैर मार कर कुछ पैसा कमाना भी सीख लो। जब कभी तुम से मेहनत की बात करो तो तुम्हारी नानी मरने लगती है। मेरी इस बात से खफ़ा होकर इसने मुझे जली-कटी सुनाते हुए कहा कि आपने पिछले 50 सालों में खून-पसीना बहा कर दुनिया को सुधारने के लिये इतने लेख और किताबें लिख कर क्या कमा लिया है, जो मुझे मेहनत करने के लिये कह रहे हो? आजकल पैसा कमाने के लिये मेहनत नहीं आदमी को चलते पुर्जे की तरह होना चाहिये, जो हर मौके के हिसाब से हालात का फायदा उठा सके।
अब जिस बेटे को मैं सारी उम्र अपने कलेजे का टुकड़ा समझ कर पालता रहा आज उसकी बातें सुनकर मेरा कलेजा मुंह को आने लगा है। हमारी यह कहासुनी इतनी बढ़ गई कि मेरे बेटे ने अपनी जुबान से मुझे ऐसे-ऐसे घाव दिये हैं कि उसने मेरी हालत कांटों पर घसीटने जैसी कर दी है। आज उसने मुझ से कहा कि आप जैसे दूसरे लेखक जमाने के साथ चलते हुए जेल में कैद नेताओं की हर खबर को मसाले लगा कर इतने बढ़िया ढंग से परोसते हैं कि उनके हर लेख पर चारों ओर से पैसों की बरसात होती है। अभी कुछ दिन पहले सी ग्रेड फिल्मों में काम करने वाली एक हीरोइन के स्वागत और सत्कार की खबरें लिखने वाले सभी लेखकों को समाचार पत्रों के मालिकों ने सिर-आंखों पर उठा लिया था। आपने सारी जिंदगी समाज सुधार के लेख लिख कर सिवाए दुःख और दर्द के हमें दिया ही क्या है?
मेरा यह बेटा जो खुद तो इतना भी नहीं जानता कि नशा चाहे शराब का हो या दौलत का, इंसान होश दोनों में ही खो बैठता है। फर्क सिर्फ इतना होता है कि शराब का नशा आदमी को बेहोश करके सुला देता है और दौलत का नशा उसे रुलाते हुए डुबो देता है। मिश्रा जी ने अपने दोस्त से कहा कि अब इस मूर्ख को कैसे समझाऊं कि ईमानदारी से जीवन जीने के लिये एक निश्चित हद में रह कर जीना जरूरी होता है जिसे दुनिया लक्ष्मणरेखा कहती है। जो लोग इस हद में रहना सीख लेते हैं उन्हें किसी प्रकार का छल एवं दिखावा कोई नुकसान नहीं पहुंचा सकता और जो कोई उस हद को पार कर जाते हैं उन्हें सीता माता की तरह सारी उम्र कष्ट सहने पड़ते हैं। मिश्रा जी के दोस्त ने उन्हें हौसला देते हुए कहा कि मैं आपकी भावनाओं की कद्र करता हूं। इतना तो मैं भी जानता हूं कि आजकल चार पैसे कमा लेने पर आदमी अपनी सारी हदें पार करके यह सोचने लगता है कि अब वो सारी दुनिया को अपने हाथों का खिलौना बना लेगा। जबकि असलियत तो यह है कि हर इंसान खुद भगवान के हाथों में एक खिलौने की तरह होता है। तुम्हारे नासमझ बेटे को किसी तरह से यह समझाने की जरूरत है कि झूठे दिखावे की चकाचौंध में जीने से बेहतर है कि इंसान को सादगी से ही जीना चाहिए। वैसे भी इस दुनिया में सम्मान से जीने का सबसे बेहतर तरीका यह है कि हम वो बनने की कोशिश करें जो हम होने का दिखावा करते हैं। अपनी जिंदगी के दायरे में खुश रहने वाले यह जानते हैं कि कुछ भी पा लेने पर न तो बहुत अधिक खुशी और न ही कुछ खोने पर गम होना चाहिये।
मिश्रा जी के दोस्त ने बात खत्म करते हुए कहा कि मैंने तो यह सुना है कि अच्छी संगत का असर इतना जबरदस्त होता है कि सामने वाला भी उसी रंग में रंग जाता है, फिर भी न जाने इस लड़के पर तुम्हारे जैसे महान लेखक के विचारों का प्रभाव क्यूं नहीं पड़ा। मिश्रा जी के बेटे की बात को भुला कर जौली अंकल कुछ देर उनकी संगत में रहने के बाद दो टूक शब्दों में केवल इतना ही कहना चाहते हैं कि जो कोई अपने जीवन की सीमा और दायरे के महत्त्व को ठीक से समझ लेते हैं वो यह जान जाते हैं कि जिंदगी में सिर्फ जीना मायने नहीं रखता, बल्कि सच्चाई और मर्यादा की सीमा में रहने से ही लक्ष्मणरेखा की महिमा के महत्त्व को समझा जा सकता है। जो कुछ बीत चुका है उसे बदला नहीं जा सकता।
ये कहानी ‘कहानियां जो राह दिखाएं’ किताब से ली गई है, इसकी और कहानियां पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर जाएं–
