Hindi Story: मिश्रा जी की पत्नी ने खाना बनाते हुए उनसे कहा कि आपको बेटी के रिश्ते के लिये कितनी बार कह चुकी हूं। परंतु आप तो न जाने किस मिट्टी के बने हो कि आपके कान पर जूं तक नहीं रेंगती। मैं जब कभी बेटी के रिश्ते के बारे में कुछ भी कहती हूं तो आप टालमटोल करके बात को लटका देते हो। मिश्रा जी ने कहा- ‘तुम तो न जाने क्यूं हर समय खुद भी परेशान रहती है और मुझे भी दुःखी करती रहती हो। लगता है तुमने बुजुर्गों की वो बात नहीं सुनी कि भगवान सभी की शादियां आसमान में ही तय कर देता है।
इसलिये हमें अपनी बेटी के रिश्ते के लिये चिंता करने की जरूरत नहीं। हमारी बेटी की किस्मत का राजकुमार भी एक न एक दिन खुद आकर उसे यहां से ले जायेगा।’ पत्नी साहिबा बोली कि अब तो मुझे भी आपकी यह बात सच लगने लगी है, क्योंकि जब कभी आपसे कुछ भी घर की बात करो तो सारे घर में आसमान की तरह तूफान और बिजली कड़कने लगती है। मुझे माफ करना, परंतु आपके इस हठी स्वभाव को देख कर मुझे लगता है कि मैं अपनी जिंदगी किसी इंसान के साथ नहीं बल्कि जानवर के साथ रह कर काट रही हूं। मिश्रा जी ने यहां भी मज़ाक करते हुए कहा- ‘यह बात तो तुमने बिल्कुल सच कही है क्योंकि तुम मेरी जान हो और मैं तुम्हारा वर।’
मिश्रा जी की श्रीमती ने गहरी चिंता जताते हुए कहा कि हमारी एक ही बेटी है, अगर आप थोड़ी कोशिश करके उसके हाथ पीले करवा दो तो मैं गंगा नहा लूं। लेकिन आप न तो खुद कुछ करते हो और अगर मैं कहीं बेटी के रिश्ते के बारे में बात करती हूं तो भी आप उसमें टांग अड़ा देते हो। मिश्रा जी ने पत्नी को थोड़ी तसल्ली देते हुए कहा कि यह कोई दाल-सब्जी खरीद कर लाने वाली बात तो है नहीं। बेटी की सारी ज़िदंगी का सवाल है, इसलिये इस काम में हर कदम बहुत ही सोच-समझ कर रखने की जरूरत है। इस बार श्रीमती जी ने कहा कि मेरे भाई ने एक अच्छे रिश्ते के बारे में बताया था, क्या आपने उन लोगों के बारे में कुछ जांच की या नहीं। मिश्रा जी ने कहा कि बेटी के रिश्ते की जितनी चिंता तुम्हें है उतनी मुझे भी है। मैंने उस परिवार के बारे में दोस्तों के माध्यम से बात की थी। लेकिन जो कुछ तुम्हारे भाई ने कहा था उसकी बात और असलियत में तो ज़मीन-आसमान का फर्क निकला। मैंने तो फिर आगे बात करना ठीक नहीं समझा।
वैसे कल जब मैं अपने दफ्तर पेंशन लेने गया था तो वहां एक पुराने साथी बांके लाल से मुलाकात हुई थी। बातचीत के दौरान मालूम हुआ कि उसका बेटा पायलट बन गया है। वो भी उसके लिये रिश्ता देख रहे हैं। यह परिवार भी काफी अच्छे से जाना-पहचाना है। अगर तुम कहो तो क्यूं न अपनी बेटी के रिश्ते की बात इनसे कर ली जाये। बांके लाल का नाम सुनते ही मिश्रा जी की धर्मपत्नी ने कहा कि यह तो वही बांके लाल है जिसे सारे ऑफिस वाले उसके नाम से कम और कट्टर इंसान कह कर अधिक बुलाते थे। मिश्रा जी ने कहा कि तुम दूसरे लोगों की बात छोड़ो। लोग तो बिना बात के किसी के भी ऊपर कीचड़ उछालते रहते हैं।
हम दोनों ने लंबे अरसे तक एक ही दफ्तर में काम किया है। मैं बांके लाल और उसके घरवालों को बहुत अच्छे से जानता हूं। मिश्रा जी की पत्नी ने थोड़ा डरते और घबराते हुए कहा कि मुझे तो कट्टरपंथी किस्म के लोगों से बहुत डर लगता है। ऐसी सोच रखने वाले अपना दिमाग तो बदल नहीं सकते और विषय को यह कभी बदलना नहीं चाहते। आप खुद भी तो कई बार कहते हो कि कट्टरपंथी सोच के लोग दुनिया को बदलने की बात तो करते हैं लेकिन खुद को बदलने के बारे में कभी नहीं सोचते। ऐसे लोग अपने स्वार्थ हेतु अच्छाई का दिखावा करने में इतने व्यस्त हो जाते हैं कि स्वयं को अच्छा बनाने के लिये इन लोगों के पास समय ही नहीं बचता। आपके पिताजी भी तो कहा करते थे कि सांप, शेर, डंक मारने वाले ततैये और कट्टरपंथी सोच वाले लोगों से सदा दूर ही रहना चाहिये। यह सभी हमेशा आम आदमी को नुकसान ही पहुंचाते हैं। इस प्रवृत्ति के लोग इंसान को तो क्या भगवान को भी अपने स्वार्थ के लिये इस्तेमाल करने से नहीं चूकते।
मिश्रा जी ने अपनी पत्नी से कहा कि अगर तुम्हारा भाषण खत्म हो गया हो तो मैं कुछ बात करूं। श्रीमती जी आज के समय में तुम अपने चारों ओर नज़र दौड़ा कर देखो तो पाओगी कि तुम्हारे करीब एक भी ऐसा व्यक्ति नहीं है जो तुम्हारे मन की भावनाओं को समझ सके। जबकि हर कोई यह उम्मीद करता है कि हम उन्हें हमेशा समझते रहे। मेरी नौकरी के दौरान दफ्तर में जब कभी कोई परेशानी में होता था तो बांके लाल जी हर किसी से एक बात जरूर कहते थे कि चिंता की कोई बात नहीं, मैं हूं ना। उनके इन तीन लफ्जों ने कई बार मुश्किल हालात में मेरे अंदर भी ऐसी ऊर्जा भरने का काम किया है, जिसे बयां करने के लिये मेरे पास अल्फाज़ ही नहीं है। मुझे यह कहते हुए माफ करना कि दुनिया में केवल मूर्ख या मृत (मुर्दा) अपनी सोच नहीं बदलते, जो कोई जागृत होते हैं, वो सच्चाई को समझने में देर नहीं करते। इसलिए कहते हैं कि सत्य को ग्रहण करने और असत्य को छोड़ने के लिए हमें हमेशा तैयार रहना चाहिए। वैसे भी आप चाहो तो प्यार से हर किसी को अपना बना सकते हो। एक बात और जब तक आपके ऊपर ईश्वर की कृपा बनी रहती है उस समय तक कोई भी आपकी उपेक्षा नहीं कर सकता। हमें सदा अपना जीवन शेर की तरह गर्जना करते हुए और स्वभाव फूलों की तरह कोमल रखते हुए जीना चाहिये।
एक बात तो तुम भी समझती हो कि मामूली लोग आम लोगों के बारे में बात करते हैं, जबकि महान लोग हर विचार का विश्लेषण करते हैं। मैं दावे से कह सकता हूं कि हमारे बांके लाल जी भी ऐसे लोगों में से एक है, क्योंकि उनकी कट्टरवादी सोच सारी उम्र किसी धर्म, जाति या विशेष वर्ग के लिये नहीं बल्कि केवल इंसानियत को समर्पित रही है। मिश्रा जी के विचार सुनकर जौली अंकल को एक मशहूर शेर याद आ गया कि हिन्दुस्तान भी मिला, पाकिस्तान भी मिला, कट्टर हिन्दू भी मिला, कट्टर मुसलमान भी मिला, गम मन में बस एक यही है दोस्तों कि इस जहां में एक भी कट्टर इंसान ना मिला। नफरत करना आसान है जबकि प्रेम करना मुश्किल। इसलिये शायद बुरी चीजें आसानी से मिल जाती है और अच्छी चीजों को पाना मुश्किल होता है।
ये कहानी ‘कहानियां जो राह दिखाएं’ किताब से ली गई है, इसकी और कहानियां पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर जाएं–
