एक दिन मैं उनका इंतजार करते हुए जोर-जोर से गा रही थी, ‘वो आ गई, उनकी याद वो नहीं आए।’ मैं गाने में इतनी मगन थी कि कब से पतिदेव घंटी बजा रहे थे, मुझे पता ही नहीं चला। वह गुस्से से खिड़की से बोले, ‘तुम मुझे इतना याद कर रही हो तभी मैं चला आया। दरवाजा खोलो, तभी तो अंदर आऊं।’ यह सुनकर मैं शर्म से लाल हो गई।

नीता श्रीवास्तव, लखनऊ (उ.प्र.)

 

चाची, हमें भी आपके साथ नहाना है

मैं शादी के बाद संयुक्त परिवार में ही रहती हूं और विवाह के बाद मैं व मेरे पति में झड़प इसी बात को लेकर हो जाती थी कि हम दोनों एक दूसरे को समय नहीं दे रहे हैं और पहले की तरह यानी विवाह के ठीक बाद न बाहर गए हैं न ही साथ में बाहर खाना ही खाया है। पर हमें जल्द ही समय मिल गया, बाबूजी व मां तीर्थयात्रा को निकल गए, बड़े जेठ-जेठानी भी किसी विवाह में तीन-चार दिनों के लिए चले गए, छोड़ गए अपने पांच वर्ष के बेटे टिंकू को, क्योंकि उसके इम्तहान सर पर थे।

एक दिन टिंकू खेलने गया हुआ था, मेरे व इनका मूवी का प्रोग्राम बना, ये जल्दी से बाथरूम में चले गए, अचानक बाथरूम से इनकी आवाज आई कि टॉवेल भूल गए हैं। देने गई तो इन्होंने अंदर खींच लिया और हम प्यार भरे उन क्षणों में भूल गए कि बाहर का डोर खुला ही छूट गया था और टिंकू अंदर आ गया, आहट पाकर घबरा कर पहले ये निकले पीछे-पीछे मैं जल्दी से बाहर निकलने लगी कि टिंकू बोल पड़ा, ‘चाची हमें भी आपके साथ नहाना है।’ अचानक मैंने देखा खाना बनाने वाली चाची भी आ खड़ी हुई थी और खीसें निपोर रही थीं कि मैं मारे शर्म के लाल हो गई और भाग कर कमरे में मुंह छिपाया।

कविता गुप्ता, इलाहाबाद (उ.प्र.)

 

मेरा यही स्टाइल है

यह उन दिनों की बात थी, जब हमारी नई-नई शादी हुई थी। मैं पहली बार किचन में घुसी और खाना बनाने लगी। अचानक मेरे पति को ख्याल आया कि रोटी बनाने वाला चकला बिल्कुल भी आवाज नहीं कर रहा, मगर यह कैसे संभव था? उसकी तीनो टांगें कभी स्लेब पर टिकती ही नहीं थी, एक टांग छोटी होने से खट-पट होती रहती थी।

जैसे ही वो किचन में घुसे तो देखा कि, वाइफ आराम से रोटी बना रही थी और चकले की तीनों टांग अलग पड़ी थीं। उन्होंने मुझसे पूछा, ‘यह क्या किया तुमने?’

‘कुछ नहीं, यह ज्यादा खट-पट कर रहा था तो मैंने इसकी तीनों टांग तोड़ दी। मेरा यही स्टाइल है।’ इतना कहते ही मैं शर्म से लाल हो गई।

पुष्पा केडिया, फरीदाबाद (हरियाणा)

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