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पीपर पात मुकुट बना-21 श्रेष्ठ लोक कथाएं मध्यप्रदेश: Lok Kathayen
Peepar Paat Mukut Bna

भारत कथा माला

उन अनाम वैरागी-मिरासी व भांड नाम से जाने जाने वाले लोक गायकों, घुमक्कड़  साधुओं  और हमारे समाज परिवार के अनेक पुरखों को जिनकी बदौलत ये अनमोल कथाएँ पीढ़ी दर पीढ़ी होती हुई हम तक पहुँची हैं

Lok Kathayen: किसी समय सहरियाओं पर गोंड़ों ने हमला कर दिया। जमकर लड़ाई हुई। सहरिया संकट में पड़े तो भागकर एक बाद ‘बड़’ के झाड़ पर चढ़कर छिप गए और अपने प्राण बचाए। बाद में ‘बड़’ के प्रति सम्मान और कृतज्ञता दिखाने के लिए उन्होंने अपना कुल नाम (गोत्र) ‘बरोदिया’ अपना लिया।

एक बार एक बरोदिया युवक की बारात निकल रही थी। रास्ते में सुस्ताने के लिए बाराती पीपल के झाड़ के नीचे रुके। दूल्हा ने बैठते समय अपना मौढ़ (मुकुट) उतारकर बगल में रख दिया। सुस्ताने के बाद बाराती चलने को हुए तो हड़बड़ी में एक बाराती के पैर की ठोकर से दूल्हे का मुकुट गंदगी में जा गिरा।

इससे बहुत विचित्र हालत हो गई। दूल्हे के मौढ़ को ठोकर मारना बहुत अपमान और लज्जा की बात हो गई। इस पर लड़ाई ठन जाती लेकिन ठोकर जान-बूझकर नहीं मारी गई थी, जिसकी ठोकर लगी वह बूढ़ा और सम्माननीय थे। इसलिए बात आई-गई हो गई। लेकिन गंदगी से उठाकर मुकुट को सर पर पहिना नहीं जा सकता था। दूल्हा बिना मुकुट के बारात में सम्मिलित नहीं हो सकता था और बिना दूल्हा के बारात आगे नहीं जा सकती थी। सब लोग परेशान हो गए। कोई रास्ता नहीं सूझ रहा था।

सब लोग भगवान से मदद करने की प्रार्थना करने लगे। तभी अचानक जोरों की हवा चलने लगी। पीपल के झाड़ से दूल्हे पर कुछ गिरा। दूल्हे ने सर तक हाथ ले जाकर उसे हटाना चाहा तो देखा वह पीपल का पत्ता था जो उसके सर पर आ गिरा था। सबने इसे पीपल देव का आशीर्वाद माना और पीपल के पत्ते को मुकुट की तरह बाँधकर विवाह की रस्म पूरी की। तब से वे पीपर बरोदिया कहलाने लगे और उनमें हर दूल्हे के मुकुट में पीपल का पत्ता लगाया जाने लगा। आज भी पीपर बरोदिया लोग दूल्हे के मुकुट में पीपल का पत्ता अवश्य लगाते हैं।

भारत की आजादी के 75 वर्ष (अमृत महोत्सव) पूर्ण होने पर डायमंड बुक्स द्वारा ‘भारत कथा मालाभारत की आजादी के 75 वर्ष (अमृत महोत्सव) पूर्ण होने पर डायमंड बुक्स द्वारा ‘भारत कथा माला’ का अद्भुत प्रकाशन।’

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