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अपाहिज-21 श्रेष्ठ नारीमन की कहानियां मध्यप्रदेश: Handicap Story
Handicap Motivational Story

भारत कथा माला

उन अनाम वैरागी-मिरासी व भांड नाम से जाने जाने वाले लोक गायकों, घुमक्कड़  साधुओं  और हमारे समाज परिवार के अनेक पुरखों को जिनकी बदौलत ये अनमोल कथाएँ पीढ़ी दर पीढ़ी होती हुई हम तक पहुँची हैं

Handicap Story: आज मधु के घर बहुत उत्साह का माहौल था। आखिर हो भी क्यों ना, आज उसकी बैंक में जॉब लगी थी। सभी उसको और परिवार को बधाइयां दे रहे थे।

बचपन में निमोनिया होने की वजह से और कुछ डॉक्टरों की गलती से वह पोलियोग्रस्त हो गई थी मधु और बहुत इलाज के बाद भी वह ठीक नहीं हो पाई थी। वह दिखने में बहुत ही सुंदर थी, जो भी उसको देखता वह देखता ही रह जाता, फिर उसके पैरों को देख सहानुभूति दिखाता।

लेकिन अपने माता-पिता व भाई के प्यार व सहयोग से उसने अपने अपाहिजपन को जीत लिया था। आज वह अपने हर कदम को एक दृढ़ विश्वास के साथ बढ़ाते हुए अपने कई हुनर में माहिर थी। पढ़ाई के साथ वह गायकी, अपनी पेंटिग, पाककला सब में अव्वल थी। जिस भी प्रतियोगिता में भाग लेती उसमें वह प्रथम स्थान पर रहती थी। स्कूल, कॉलेज, घर यहां तक कि पास-पड़ोसी भी उसके हुनर की तारीफ किए बगैर नहीं रहते थे।

आज उसका बैंक में पहला दिन था। वह बहुत खुश थी। बैंक में पहुंचने पर सभी ने उसका स्वागत किया। उसने सभी को दिल से धन्यवाद दिया। आज उसको एक महीना हो गया था और उसके काम से व व्यवहार से सभी इम्प्रेस थे। खासतौर पर मैनेजर जो कि उम्र में उससे काफी बड़े थे, अक्सर उसकी तारीफ करते व अपने केबिन में बुलाकर उसको काम बताते रहते थे।

पर धीरे-धीरे मधु को लगने लगा था कि उनकी मंशा कुछ और ही है। अब वह थोड़ा संभल कर ही जाती थी केबिन में और वह कुछ और बातें करते तो वह बहुत काम है कहकर बहार निकल आती थी। वह अब घबराने भी लगी थी। एक दिन सहयोगी मित्र राघव को उसने मन की सारी बातें बता दी थी।

आज लास्ट वर्किंग डे था मन्थ का। मैनेजर ने उसको कहा कि आज कुछ देर रुकना पड़ेगा उसको। यह सुन वह चौंक गई, क्योंकि किसी और को उन्होंने नहीं कहा था रुकने को, उसने राघव को बता दिया। राघव बोला तुम घबराओ मत मैं तुम्हारे लिए यहीं रुकूँगा। पर सर को मालूम नहीं पड़ने देना। शाम को सभी कलीग चले गए, बस सर और मधु ही रह गए थे। मधु को अपने केबिन में बलाकर उन्होंने उसको कछ काम बताया व खद बाहर चले गये। इसी बीच राघव इस तरह से अंदर आया की सी.सी.टी. कैमरे की नजर से वह बचा रहे व जगह देख अलमारी के पीछे छुप गया था। थोड़ी देर बाद सर अंदर आये व धीरे से केबिन का दरवाजा बंद कर दिया और कैमरे का स्विच भी धीरे से बन्द कर दिया। वह भी इस तरह की मधु को पता ना चले, पर मधु पहले से ही सचेत थी। उसने अपनी बैसाखी को कस कर पकड़ लिया था।

सर ने उसके निकट आकर उसके कंधे पर हाथ रख उसको दबाया ही था कि वह खड़ी हो गई व अपनी बैसाखी उनको दे मारी कमर पर। वह सँभल पाते उसके पहले एक बार और वार किया और चिल्ला कर बोली, सर मैं अपाहिज जरूर हूँ पर लाचार नहीं। बचपन से ही मुझको मेरे माता-पिता ने मुसीबत से लड़ना सिखाया है। आपने मुझे अपाहिज व कमजोर मानकर बहुत बड़ी गलती की है।

इसी बीच राघव जो छुपकर मोबाईल पर वीडियो बना चुका था, वह भी निकल आया उसने ताली बजा कर मधु को दाद दी। इसी बीच केबिन के बाहर दस्तक हुई उसने दरवाजा खोला तो उसके सारे कलिग वहां मौजूद थे और साथ में सर का परिवार भी था। सभी उनको हिकारत भरी नजरों से देख रहे थे और मैनेजर साहब शर्मिंदगी से सिर झुकाकर खड़े थे सबके बीच।

आज मधु ने साबित कर दिया था कि वह बहुत समझदार व साहसी है। उसके ऑफिस के सभी साथियों ने उसकी ताली बजा कर दिल खोल कर तारीफ की और बताया कि राघव ने सुबह ही सबको अपना प्लान बताकर बलवाया था। जिससे कि मैनेजर साहब की करतत का सबको पता चल सके, और उनके परिवार को भी पार्टी के बहाने फोन कर बुला लिया था कि उनकी आँखें भी खुल जाएं।

मैनेजर साहब ने सबके सामने मधु से कान पकड़ कर माफी मांगी और कसम खाई की भविष्य में कभी भी ऐसा किसी और मजबूर लड़की के साथ नहीं करेंगे।

मधु ने उनको माफ कर दिया था।

रात बहुत हो गई थी। सभी लोग घर जाने लगे, राघव ने बोला मधु चलो मैं तुमको घर छोड़ देता हूँ। मधु कुछ नहीं बोली और बाइक पर बैठ गई। घर पहुँच कर राघव को बोली, “धन्यवाद राघव, आज तुम्हारे साथ के कारण मैं इतनी हिम्मत कर पाई। आओ कॉफी पीकर जाना, मैं अपने मम्मी-पापा व भाई से भी तमको मिलवा देती हूँ।”

“नहीं मधु आज नहीं फिर कभी। कल छुट्टी है मुझको कुछ जरूरी काम भी है।” कहकर वह बाय बोल कर चला गया।

अंदर पहुँची तो उसकी मम्मी बोली, “बेटा आज बहुत देर हो गई क्या बहुत काम था? हम लोगों को बहुत चिंता हो रही थी तुम्हारी। हम अभी सोनू को भेजने ही वाले थे बैंक।”

मधु कुछ नहीं बोली बस माँ के गले लग गई। वह नहीं चाहती थी कि उस घटना का पता उनको चले और वह उसके प्रति हमेशा चिंतित रहें। वह बोली माँ बहुत थक गई हूँ व बहुत जोर की भूख लगी है, मैं हाथ-मुँह धोकर आती हूँ। आप जल्दी से खाना लगा लो। खाना खाकर वह जल्दी ही सो गई थी।

दूसरे दिन दस बजे तक वह सो ही रही थी, अचानक उसके भाई ने आकर उसको जगा दिया। दीदी जल्दी उठो आपसे मिलने कोई राघव व उनके मम्मी-पापा आए हैं। वह एकदम हड़बड़ा कर उठ गई। जल्दी से हाथ मुँह धोने बाथरूम में चली गईं। ब्रश करते-करते वह सोचने लगी, अचानक राघव क्यों आया है। कहीं वह कल की घटना बताने तो नहीं आया।

वह हल्का -सा तैयार होकर बाहर आयी और राघव के माता-पिता को नमस्ते कर बैठ गई। उसकी मम्मी नाश्ता लगा चुकी थी। वे लोग बातें करते हुए नाश्ता करने लगे। चाय पीने के बाद राघव के पिता बोले हम आज यहां कुछ माँगने आए हैं आपसे। हमें आपकी बेटी का हाथ चाहिए अपने बेटे राघव के लिए। मधु और उसके माता-पिता सुनकर चौंक गए। वह कुछ बोल पाते उसके पहले ही राघव ने एक गुलाब का फूल निकाला और घुटनों के बल मधु के सामने बैठकर बोला, मधु क्या तुम मुझको अपने योग्य समझती हो? क्या मुझसे शादी करोगी?

मैं तुमको बहुत पसंद करता हूँ व प्यार करता हूँ तुमसे। मधु बस कुछ नहीं बोल पाई उसकी और उसके माता-पिता की आँखों मे आँसू भर आए थे खुशी के।

मधु ने धीरे से फूल ले लिया व राघव के माता-पिता के पैर छू लिए, जिंदगी की एक हसीन नई शुरुआत करने के लिए। आज उसको उसका सही हमसफर मिल चुका था। जो उसको पसन्द करता था उसके अपाहिज होने से जिसको कोई फर्क नहीं पड़ता था।

भारत की आजादी के 75 वर्ष (अमृत महोत्सव) पूर्ण होने पर डायमंड बुक्स द्वारा ‘भारत कथा मालाभारत की आजादी के 75 वर्ष (अमृत महोत्सव) पूर्ण होने पर डायमंड बुक्स द्वारा ‘भारत कथा माला’ का अद्भुत प्रकाशन।’

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