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अपने में मस्त-21 श्रेष्ठ लोक कथाएं मध्यप्रदेश: God and Man Story
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भारत कथा माला

उन अनाम वैरागी-मिरासी व भांड नाम से जाने जाने वाले लोक गायकों, घुमक्कड़  साधुओं  और हमारे समाज परिवार के अनेक पुरखों को जिनकी बदौलत ये अनमोल कथाएँ पीढ़ी दर पीढ़ी होती हुई हम तक पहुँची हैं

God and Man Story: कायनात बनाने के लिए भगवान ने पहले धरती बनाई। फिर आकाश, पानी, हवा, आग पैदा की। तब पेड़-पौधे उगाए। फिर भगवान ने सोचा, इनका उपयोग और देख-रेख करनेवाला भी कोई होना चाहिए। तब भगवान ने धरती, आकाश, पानी, हवा और आग से एक-एक गुण लेकर मन लगाकर एक पुतले का निर्माण किया। पुतले में जान फूंकते हुए भगवान ने उसका नाम आदमी रखा। आदमी को अकेलेपन से बचाने के लिए भगवान ने एक औरत भी बनाई। इन दोनों को बनाकर भगवान को बेहद खुशी हुई।

भगवान पहले आदमी को सामने बैठाकर अनेक आदमी-औरत बनाता गया। जैसे जैसे नए आदमी-औरत बनते गए वे पहले आदमी को सरकाते गए। धीरे धीरे सबको जगह देते-देते वह पहला आदमी सबसे आखिर में कोने में पहुँच गया। जब भगवान थक गया तो उसने थोडा आराम किया और फिर सबको काम देना शुरू किया। जब भगवान सारा काम और सामान बाँट चुका तो सामने वह पहला आदमी खाली हाथ बैठा मिला।

भगवान उसे देख चौंक पड़े और बोले कि तू अभी तक चुप बैठा हुआ है। अब तो सब समाप्त हो चुका। तुझे क्या दूँ? कुछ बचा ही नहीं है, जा तू जो कुछ कहीं पद दिखे वही ले ले। उस आदमी को एक पड़ा हुआ खुरपा मिल गया। भगवान ने पूछा कि इससे वह क्या करेगा? वह बोला कि देखते जाओ महाराज! कछ न कछ तो कर ही लँगा। वह खरपा लेकर जंगल में चला गया। उसे एक नाले के किनारे कुछ पत्तियाँ दिखीं। उसने खुदाई को तो जमीन के अंदर से एक कंद निकला। उसने कंदो को धोया और खाया तो स्वादिष्ट लगा। वह भगवान के पास आया और उन्हें भी कंद खिलाया। भगवान को उस आदमी की सरलता, सेवा भावना और कंद का स्वाद पसंद आया।

भगवान ने सोचा कि यह भला आदमी है। इसको कुछ मिले न मिले यह मस्त रहना जानता है। यह हर हालात में अपना पेट भर सकता है। इसको अच्छा आदमी बने रहना चाहिए। इसलिए भगवान ने उस आदमी को जड़ी-बूटी, पेड़-पौधों आदि की जानकारी दे दी। वह आदमी यह जानकारी पाकर भी खुश नहीं हुआ तो भगवान ने उसकी परीक्षा लेने का मन बनाया।

भगवान ने उस कंद को जहरीला कर दिया। वह आदमी इससे दुखी नहीं हुआ। उसने अपना खुरपा उठाया और जंगल में जाकर कंदूरी नाम का फल खोज लाया। वह शकरकंद की तरह मीठा था। भगवान ने इसे कडुवा बना दिया। तब भी वह आदमी बिना दुखी हुए खुरपा उठाकर जंगल में जाने के लिए तैयार हो गया। फिर कुछ-न-कुछ लाकर भगवान को खिलाया।

भगवान ने कुछ न बोलने के कारण उसे ‘गंगू’ और अपनी बात पर अड़े रहने के कारण ‘खूटिया’ कहा। अपने काम में मस्त रहने के स्वाभाव के कारण भगवान ने उसे सबसे अलग-थलग खुशहाल रहने का वर दिया। सहरा (जंगल) में रहने के कारण उसे ‘सहरिया’ कहा गया। आज भी सहरिया जनजाति के लोग दुनिया की तीन तेरह नौ अठारह से दूर, सघन जंगल में जड़ी-बूटियों और वनस्पति के सहारे अपने आपमें मस्त रहते हैं। उन्हें सांसारिक प्रपंच नहीं सुहाते।

भारत की आजादी के 75 वर्ष (अमृत महोत्सव) पूर्ण होने पर डायमंड बुक्स द्वारा ‘भारत कथा मालाभारत की आजादी के 75 वर्ष (अमृत महोत्सव) पूर्ण होने पर डायमंड बुक्स द्वारा ‘भारत कथा माला’ का अद्भुत प्रकाशन।’

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