Hindi Story: ज़िंदगी इस तरह करवट लेगी इसका ज़रा सा भी अंदाजा नहीं था सोनम को। और अपनी ज़िंदगी से अलग कर दिया। आँखों में आँसू लिए सोनम कॉफी शॉप में बैठ अपनी सहेली श्वेता का इंतज़ार कर रही थी। श्वेता ना केवल उसकी पक्की सहेली है बल्कि एक बहुत बड़ी डिवोर्स लॉयर है।
“कैसी है सोनम?” श्वेता ने आते ही पूछा।
“पता नहीं श्वेता। कैसा होना चाहिए मुझे? बचपन से जिस जिस जानती थी जिसके साथ ज़िन्दगी के सात साल बिताए, उसे अपनी ज़िंदगी से ज़्यादा चाहा, आज उसी से अलग हो रही हूं।”
“अब विस्तार से बता कि हुआ क्या?” श्वेता ने पूछा।
“तुम तो जानती हो श्वेता, मेरा रंग साफ है और राजन का रंग थोड़ा सांवला। पर हम दोनों में कभी इस बात को लेकर मनमुटाव नहीं हुआ। क्योंकि हमारे लिए एक-दूसरे का साथ ज़्यादा ज़रूरी रहा है। पर तुझे पता है कि राजन के घरवाले ही हमेशा उसे उसके रंग रूप को लेकर ताना देते रहते हैं।”
“हाँ ये तो तू मुझे बहुत बार बता चुकी है। पर इससे तेरे और राजन के तलाक का क्या संबंध है?” श्वेता ने हैरानी से कहा।
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सोनल अपनी किस्मत पर हँसते हुए बोली, “इस बार दिवाली पर जब हम दिल्ली गए थे उसके घर, तब कुछ ऐसी बात हुई कि हम दोनों के बीच का समीकरण अचानक ही बदल गया।” ये कह श्वेता सात महीने पहले हुई घटना श्वेता को बताती है।
सात माह पूर्व दिवाली की रात
“उफफफ चुनमुन, कहाँ जा रहे हो? स्वेटर पहनो।” सोनल अपने पांच साल के बेटे के पीछे भागती हुई बोली।
“हम नहीं पहनेंगे आपसे। हम तो चाचू से ही स्वेटर पहनेंगे।” चुनमुन भाग कर अपने विपिन चाचू को कस कर पकड़ते हुए बोला।
“शैतान बच्चा! लाइए भाभी हम पहना दें इसे स्वेटर।” विपिन ने सोनल के हाथों से स्वेटर लेते हुए कहा।
विपिन, राजन का छोटा भाई है। बहुत बड़े बैंक में मेनेजर की पोस्ट पर कार्यरत है। शक्ल सूरत एवं रंग रूप में वो राजन से इक्कीस ही थी। बचपन से उसे ही मात-पिता का ज़्यादा प्यार मिला। और रंग रूप के चलते राजन को दुत्कार। पर विडंबना देखिए, विपिन की पत्नी का रंग थोड़ा काला था, और राजन की पत्नी यानी सोनल का रंग साफ। इसलिए घर में हमेशा तुलना होती रहती थी।
विपिन चुनमुन को स्वेटर पहना रहा था जब राजन की माँ की एक सहेली बोल उठी, “राजन का लड़का तो बिल्कुल विपिन पर गया है। नैन नक्श, रंगरूप और हरकतें भी विपिन पर ही हैं। ये तो इसी का बेटा लगता है।”
इस बात पर राजन की माँ बोलीं, “उसी का होता, यदि तब सोनल विपिन से शादी के लिए हाँ कर देती।”
तब राजन की माँ ने अपनी सहेली को बताया कि वो लोग सोनल की माँ के पास सोनल और विपिन का रिश्ता लेकर गये थे पर तब सोनल की माँ ने ये कहते हुए मना कर दिया कि उसकी शादी उसी के साथ पढ़ने वाले उसके दोस्त से तय हो गई है। फिर…उस लड़के ने शादी नहीं की और कुछ समय बाद सोनल और राजन करीब आए और दोनों ने शादी का फैसला कर लिया।
सोनल की सास इस बात से अंजान थी कि सोनल ने उनकी ये बातें सुन लीं थीं। सोनल इस बात से बिल्कुल अनजान थी कि कभी उसकी सास उसके देवर का रिश्ता लेकर आई थी। पर सोनल इस बात से अंजान थी कि ये बात राजन ने भी सुन ली थी। और तीर की तरह ये बात उसके दिल के आर-पार हो गई थी।
घर लौटने के बाद राजन उखड़ा सा रहने लगा। एक दिन रात को जब सोनल ने राजन से नज़दीकी बढ़ाने की कोशिश की तो राजन ने उसे तंज कसते हुए पूछा, “एक काले आदमी का स्पर्श शायद अच्छा नहीं लगता होगा तुम्हें।”
“ये कैसी बातें कर रहे हो राजन? हमारे बीच ये सब बातें कैसे आईं?”
“कुछ नहीं, सो जाओ।”
अगले दिन तो राजन ने हद कर दी। पहले मंज़िल पर रहने वाले मनीष भैया को जब सोनल ने नमस्ते की और जवाब में उन्होंने भी मुस्कुरा कर नमस्ते की तो राजन से रहा नहीं गया।
“आजकल मनीष भैया के साथ कुछ ज़्यादा मुस्कुरा कर नमस्ते नहीं हो रही तुम्हारी?” राजन ने गाड़ी स्टार्ट करते हुए कहा।
“अरे! रोज़ ही तो नमस्ते करती हूं इसमें क्या नया है?” सोनल बोली।
“हैंडसम लोगों को नमस्ते करने में अलग मज़ा आता होगा!” राजन ने तंज कसा।
“राजन! बात क्या है? देख रही हूं कि तुम मुझसे बहुत अजीब तरह से बात कर रहे हो।”
“ओह! तुम मुझे नोटिस करती हो? मुझे लगा तुम्हारा ध्यान मुझपर होता ही नहीं है। खैर, छोड़ो। बेकार बहस का समय नहीं है।”
कुछ दिन बाद तो राजन ने हद ही कर दी जब चुनमुन ने उसे गोद में उठाने को कहा।
“मेरे पास क्यों आ रहा है अब? दिल्ली जाता है तो चाचा के साथ ही चिपका रहता है। हाँ भई, चिपकेगा ही, बाप तो वही है तेरा।”
सोनल ने जैसे ही ये सुना वह तिलमिला उठी और चिल्ला पड़ी, “राजन, हदकर दी आज तुमने। ये क्या कह रहे हो? क्या हो गया है तुम्हें?”
“क्यों मिर्च लग गई सच्चाई सामने आते ही। मुझे पता है कि ये मेरा बेटा नहीं है। इसका रंग-रूप, हरकतें, व्यवहार सब विपिन से मिलता है। अब समझ आया कि विपिन मेरी और तुम्हारी शादी से खुश क्यों नहीं था। होगा भी कैसे! मन ही मन तुम्हें पसंद करता था…शादी का न्योता भी भेजा तुम्हारे घर। कमाल की बात है कि मां – बेटे ने मुझे बताया नहीं कभी। और तुम…मुझसे शादी तो कर ली जोश में, पर सच्चाई है कि काले आदमी का स्पर्श कहां भाएगा। इसलिए मौका ढूंढ तुमने और विपिन ने मुझे धोखा दिया। छि…चरित्रहीन औरत हो तुम!”
इससे पहले राजन कुछ और कहता सोनल ने उसके मुँह पर एक ज़ोरदार तमाचा मारा और चुनमुन को उठा हमेशा के लिए वो घर छोड़कर अपने पिता के घर चली गई।
ये सारी कहानी सुनने के बाद श्वेता ने सोनल की तारीफ करते हुए कहा, “तेरा फैसला बिल्कुल सही है सोनल। दुनिया में किसी भी इंसान को अपने चरित्र पर उंगली उठाने का हक नहीं देना चाहिए। फिर वो अपने माता-पिता हों, दोस्त हों या वो जिससे हम प्यार करते हैं। मैं जल्द से जल्द तुझे तलाक दिलवाऊंगी। और तगड़ी एलिमनी भी।”
“नहीं श्वेता, मुझे राजन का एक पैसा नहीं चाहिए। सिर्फ तलाक चाहिए। ऐसी घटिया सोच रखने वाले इंसान के पैसों से मैं अपने चुनमुन को बड़ा नहीं करूंगी।”
श्वेता ने सोनल की सोच को सलाम किया और तीन माह में उसका और राजन का तलाक करा दिया।
आज सोनल अपने बेटे के साथ भले ही कम में गुजारा कर रही है। पर अपने दामन पर कीचड़ उछालने वाले से दूर अपनी ज़िंदगी को सम्मानपूर्वक जी रही है।
