कथा-कहानी

चाय का नाम लेते ही मन में फुर्ती आ जाती है और चाय पी लेने के बाद शरीर में ताजगी। ऐसा चाय पीने वालों का अनुमान कहता है। सुबह की चाय के साथ ही हमारा दैनिक कार्य प्रारंभ होता है। चाय के बारे में सबके अपने-अपने अनुभव हैं। कुछ लोग तो सुबह उठते ही बिस्तर पर बैठे-बैठे चाय पीते हैं, संभ्रांत परिवार वाले इसे ‘बेड टी’ कहते हैं। ऐसा चाय के बारे में ही नहीं है, सुबह उठते ही शराब पीने वाले भी लोग हैं, जिन्हें सुबह उठते ही शराब से कुल्ला करने वाला शराबी कहते हैं।

रेल से सफर करते समय रेलवे स्टेशन आने पर सबसे पहले चाय वालों की ही आवाज सुनाई देती है। ‘चाय-चाय’ बोलने का उनका एक अलग ही अंदाज़ होता है। पहले जब बच्चों की परीक्षाएं चल रही होती थीं तो उनके माता-पिता सुबह जल्दी उठने पर जोर देते थे और बच्चों को नींद न आए, इसलिए उन्हें स्वयं चाय बनाकर देते थे।

चाय एक पेय नहीं रही, बल्कि हमारी संस्कृति का एक हिस्सा बन गई है। तभी तो घर आए मेहमानों का स्वागत करना हो, कार्यालय में मीटिंग करनी हो या किसी से दोस्ती करनी हो तो चाय सबसे आसान माध्यम होती है। यही नहीं, क्रिकेट के टेस्ट मैच में लंच ब्रेक के साथ टी ब्रेक भी होता है। इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि चाय का स्तर क्या है।

चाय की लोकप्रियता का कोई पैमाना नहीं है। उसकी लोकप्रियता अपार है। गरीब से लेकर अमीर तक इसे पसंद करते हैं। फर्क बस इतना है कि सबका चाय पीने का ढंग या पसंद अलग-अलग है, क्योंकि चाय के प्रकार अब इतने हो गए हैं कि इनकी सूची आपको चाय की दुकान में उसी तरह टंगी मिलेगी, जिस तरह जूस कॉर्नर में विभिन्न प्रकार के फलों के जूस की सूची और दाम अंकित होते हैं। इन जूस कॉर्नर पर गरीब कम ही दिखाई देंगे, पर चाय की दुकान में तो सब प्रकार के लोग दिखाई देंगे।

दूध की पारंपरिक चाय की दुकान को छोड़ दें तो चाय की दुकानें भी अब आलिशान हो गई हैं, क्योंकि वहां कई प्रकार की चाय परोसी जाती हैं, मसलन काली चाय, इलायची की चाय, मसाले वाली चाय, पुदीने वाली चाय के अलावा टी बैग्स वाली चाय, ग्रीन टी, लेमन टी, आइस्ड टी और हर्बल टी वगैरह। ये सब नाम सुनकर आप भी किसी बड़ी दुकान की कल्पना करने लगेंगे। कहते हैं न, दूर के ढोल सुहावने होते हैं, इसलिए आपको भी इन विभिन्न प्रकार की चाय का स्वाद लेना जरूरी है। इन आधुनिक चाय की दुकानों में स्कूल-कॉलेज के लड़के-लड़कियों की भीड़ देखी जा सकती है। कहां मिलना है तो उनके दिमाग में टी कॉर्नर पर ही मिलने की बात होगी।

शादी के सिलसिले में जब हम लड़की वालों के यहां जाते हैं तो रिश्तेदारों के साथ लड़का और उसके मित्र भी होते हैं। लड़की वालों के यहां ड्राइंग रूम में आदर-सत्कार के समय जिस लड़की की शादी होनी है, यानी जिसे हम देखने आए हैं, उसे छोड़कर लड़की की शादीशुदा बड़ी बहन, छोटी बहन नाश्ता आदि लेकर आती हैं। सब नाश्ता करने में लग जाते हैं, पर लड़का बड़ी और छोटी बहन को देखकर अपनी होने वाली मंगेतर के बारे में मन ही मन सोचता है और उसके आने का इंतजार बड़ी बेसब्री से करता है। सबका नाश्ता होने के बाद अंत में लड़की चाय लेकर आती है। सबको चाय देने के बाद वह कुर्सी पर बैठ जाती है और उसके साथ सवाल- जवाब शुरू हो जाते हैं। यहां पर भी चाय सामाजिक संस्कृति के अनुसार सर्व की गई। देखा न आपने कि चाय की महिमा या चाय चक्कर कैसा होता है।

चाय के माध्यम से लोग अपना स्वार्थ भी सिद्ध कर लेते हैं, जिसे आप सब समझते ही हैं। चाय एक ऐसा अमृत है, जो बड़े-बड़े काम करवा देती है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण सरकारी कार्यालय है, जहां पर सभी को किसी न किसी काम से जाना ही पड़ता है, जिस काम से आप कार्यालय में जाते हैं, उस कार्य को करने वाले कर्मचारी से आपकी मुलाकात होती है। आप अपने काम के बारे में जैसे ही बात शुरू करते हैं तो वह कर्मचारी आपको चाय ऑफर करता है। आपको ऐसे लगता है कि काम मेरा है और ये मुझे चाय पिलाने की बात कर रहा है। आपको जब वह बाहर चाय पिलाने ले जाता है तो रास्ते में उसका कोई दोस्त मिल जाता है तो वह उसे भी चाय पीने चलने की बात करता है। तब आपको लगेगा, वाह भाई क्या व्यावहारिक व्यक्ति है। उसी समय ताज़ी-ताज़ी चाय पीकर, पान खाकर लौट रहा उसका मित्र तुरंत खाया हुआ पान थूककर आपके साथ चल देगा। चाय पीते हुए आपसे आपके काम की बात करेगा। आप जब उसे अपने काम की बात बताएंगे तो वह कहेगा कि काम तो आपका हो जाएगा, मगर काम कठिन है। पता नहीं कितना समय लगेगा। आप जब गिड़गिड़ाने लगेंगे तो वह चाय-पानी (रिश्वत) की बात करेगा और कहेगा, इतना पैसा दे दो। काम हो जाएगा, ये पैसा मुझे नहीं चाहिए। मुझे तो ऊपर तक पहुंचाना पड़ता है। काम के बदले आपसे कुछ एडवांस पैसा देने की बात करेगा और उसे आप एडवांस दे भी देंगे। आप उससे कहेंगे कि ‘इतनी सी बातें करने के लिए आप मुझे यहां चाय पिलाने लाए। ये बातें तो आपकी सीट पर भी हो जातीं और आपका समय भी बच जाता।’

तब वह आपसे कहेगा, ‘अरे आपको नहीं मालूम, वहां पर सीसीटीवी कैमरे लगे हैं।’ आप भी घबरा जाएंगे, क्योंकि रिश्वत लेना और देना दोनों दंडनीय अपराध है। जब आप चाय की दुकान से चलने लगेंगे तो वह चाय वाले से कहेगा, ‘साहब से चाय के पैसे ले लेना।’ और आगे पान की दुकान पर जाकर खड़ा हो जाएगा। पान वाले से वह नहीं कहेगा कि साहब से पैसे ले लो, आप समझदार हैं। पान वाले को भी पैसा आप ही देंगे। देखा आपने, चाय के चक्कर के बहाने आपका काम कैसे आसान हो गया।

हमारे देश में शुगर के मरीज बहुत हो गए हैं। जब आपके यहां मेहमान आते हैं तो आप उनसे ‘बिना शक्कर वाली चाय कौन पिएगा?’ का जिक्र जरूर करते हैं। इस बात का कोई बुरा भी नहीं मानता। चाय की दुकान में जब आप बिना शक्कर वाली चाय का ऑर्डर देते हैं तो दुकानदार थोड़ी नाराजगी दिखाएगा, क्योंकि उसे अलग से फिर चाय बनानी पड़ेगी। बनी-बनाई चाय ग्राहक को देना आसान होता है। अपनी इस नाराजगी को दूर करने के लिए वह ग्राहक से ज्यादा पैसे वसूलता है। ग्राहक भी चाय के ज्यादा पैसे देने में परहेज नहीं करता, क्योंकि उसे अच्छी चाय मिलने की आशा रहती है।

कुछ लोग तो चाय के इतने दीवाने होते हैं कि एक बड़े से पॉट में ढेर सारी चाय बना लेंगे और थोड़ी-थोड़ी देर में चाय को गरम करके उसका सेवन कर मजा लेते हैं।

कहते हैं, ‘अति सर्वथ वॢजते’ ज्यादा चाय पीने से आपको नुकसान भी हो सकता है। दूसरी तरफ चाय इतनी फायदेमंद है कि उससे घरेलू इलाज भी किया जाता है। कहते हैं कि 

ज्यादा मोशन हो रहे हैं तो काली चाय फायदा करती है। इसी तरह के कई घरेलू इलाज चाय के द्वारा किए जाते हैं। चाय पीने के चक्कर में ज्यादा न पड़ें। चाय पीने का बहाना बनाकर घंटों होटलों या रेस्तरां में अपना कीमती समय बर्बाद ना करें। चाय पीने की लत न लग जाए, इसका भी ध्यान रखा जाए। यदि आपने चाय को एक अच्छा पेय समझकर लिमिट में चाय पी तो आपको चाय फायदा भी करेगी, कुछ समय के लिए तरोताजा रखेगी। 

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