आज का समय ही कुछ ऐसा हो चला है, जिसमें हर कोई अपना वजन कम करने की जद्दोजहद में रहता है। वजन कम करना कोई सीधी खीर नहीं। ये काफी मुश्किल हो सकता है। इसके लिए जितना जरूरी सही वेट लॉस प्लान,संतुलित भोजन करना है, उतना ही जरूरी हार्मोस के बीच संतुलन होना भी है। 

अक्सर मोटापे के पीछे सबसे ज्यादा हाथ बिगड़े हुए हार्मोन्स का ही होता है। इसमें उतार चढाव आया तो मोटापे की समस्या का होना भी आम है। बात महिलाओं की करें तो उन्हें अपने जीवन में कई ऐसी स्टेज से गुजरना पड़ता है जिसमें पीएमएस, मेनोपॉज, तनाव और प्रेगनेंसी जैसी वजहें शामिल हैं। वजन कम करने के लिए आप चाहे कितनी भी डायटिंग या योग जैसी चीजें क्यों ना कर लें, लेकिन जब तक आप हार्मोन्स को सही तरीके से संतुलित नहीं करेंगी तब तक आपको सही परिणाम नहीं मिलेंगे। 

आज इस लेख के जरिये ऐसे हार्मोन्स के बारे में जानेंगे जो हमारे शरीर के वजन को काफी हद तक प्रभावित करते हैं और इन्हें समय रहते कैसे रोका जाए, आइये जानते हैं।

1. एंडोमेट्रियोसिस– शरीर में यह एक ऐसी स्थिति है को एंडोमेट्रियल ऊतक का कारण बनती है, जो यूट्रस के अंदर के हिस्से में पाया जाता है। पीरियड्स के दौरान ये दर्द का कारण बनता है। इससे शरीर में सूजन के साथ वजन बढ़ना आम है। मेडिकल कंडीशन में इसका मतलब है कि आपका एस्ट्रोजन का स्तर बहुत अधिक है और प्रोजेस्टेरोन बहुत कम है। अधिक एस्ट्रोजेन लेवल का उत्पादन करने के लिए, शरीर वसायुक्त कोशिकाओं को निकालता है और ग्लूकोज के लेवल को बनाए रखने के लिए एनर्जी को फैट्स में बदल देता है। जो कि वजन बढ़ने का एक खास कारण है। एस्ट्रोजन के स्तर को संतुलित रखने के लिए, आपको शराब के सेवन, प्रोसेस्ड मीट से बचना चाहिए और नियमित रूप से वर्कआउट करना चाहिए। इसके अलावा, ताजे फल और सब्जियों का सेवन आपको एस्ट्रोजन के स्तर को बनाए रखने में मदद कर सकता है।

2. पीसीओएस– शरीर में समान हार्मोन का असंतुलन पॉलीसिस्टिक अंडाशय सिंड्रोम का कारण बनता है। इससे दर्द, सूजन और वजन बढ़ने के कारण जुड़े होते हैं। ऐसा जरूरी नहीं है कि पीसीओएस में वजन बढ़े। लेकिन अगर पहले से ही आपका वजन ज्यादा है तो इससे आपको काफी मुश्किल हो सकती है। जिन महिलाओं में पीसीओएस की समस्या है उनमें हार्मोन असंतुलन जैसे कि इन्सुलिन रेजिस्टेंस जोकि टाइप टू डायबिटीज का एक बड़ा कारण है और एंड्रोजन की मात्रा में वृद्धि जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

3. मेनोपॉज– हर महिला को एक ना एक दिन जीवन के इस चरण से गुजरना ही पड़ता है। ऐसे में एस्ट्रोजन का स्तर लगातार कम होता चला जाता है । जिससे कई तरह की शारीरिक तकलीफें बढ़ने लगती हैं। जिससे स्वाभाविक तौर पर वजन भी बढ़ने लगता है। मेनोपॉज के बाद अक्सर उनको दिल की बिमारी और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है।

नियमित रूप से व्यायाम करना चाहिए।

4. कोर्टिसोल- शरीर में ये हार्मोन्स महिलाओं और पुरुषों दोनों में ही वजन बढ़ाने कारण बनता है। जब भी हम तनाव में होते हैं तो हमारे शरीर में कोर्टिसोल का स्तर बढ़ने लगता है। जब ये लेवल बढ़ जाता है तो शरीर को हानि पहुंचाने लगता है। ऐसे में पेट चेस्ट या कमर पर चर्बी बढ़ने लगती है साथ ही क्रेविंग और शुगर इनटेक एक बढ़ जाता है। इस तरह की परेशानी से बचने के लिए आप आहार में हरी सब्जियां लें।

5. थायराइड- पुरुषों से ज्यादा महिलाओं में थायराइड की समस्या देखी जाई है। ये ग्रंथि हार्मोन्स के स्तर को बढ़ाने का कारण बनती है। और शरीर के कई हिस्सों को प्रभावित करती है। इससे वजन तेजी से बढ़ता है। साथ ही बढ़ा हुआ वजन कम करने में काफी मशक्कत करनी पडती है। जिसमें थकान, डाईजेशन, रुखी त्वचा , शरीर में दर्द, बालों का झड़ना जैसी परेशानियां शामिल हैं।  आप इसके लिए डॉक्टर की सलाह लें। आप आयोडीन युक्त नमक का सेवन, विटामिन डी लेने, अच्छी तरह से पका हुआ भोजन लेने और जिंक की मात्रा से भरपूर भोजन का सेवन करके इसे रोक सकती हैं।

6. कैसे करें बढ़े हुए वजन को कंट्रोल?- अगर आपको ऐसा लगता है कि हार्मोन्स की वजह से आपको वजन घटाने में काफी तकलीफों का सामना करना पड़ रहा है तो, आप हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी की मदद ले सकती हैं। आप बॉडी चेकअप कराएं और तनाव से खुद को जितना दूर हो सके उतना दूर रखने की कोशिश करें। वजन का बढ़ना और वजन का कम होना कई सारे कारकों को काफी प्रभावित करता है। कभी कभी ये हार्मोन्स नियंत्रित हो जाते हैं तो कभी नहीं हो पाते।

ऐसा कई बार होता है जब मोटापा बढ़ता चला जाता है और उसे कंट्रोल करना बेहद मुश्किल हो जाता है। शरीर में कई हार्मोन्स का उतार चड़ाव लगातार बढ़ते हुए वजन का कारण बनता है। इसलिए समय रहते इन हार्मोन्स के इशारों को समझिये और डॉक्टर से परामर्श लें। क्योंकि सही समय पर सही इलाज और सही देखभाल आपको मोटापे से बचा सकता है।

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