Veer Hanuman Cast: सोनी सब का पौराणिक शो वीर हनुमान दर्शकों को भगवान हनुमान के बचपन की अनसुनी कहानियों से जोड़ रहा है जिसमें चंचलता है, साहस है, और ईश्वर भक्ति की गहराई है। इस शो ने मारुति के बाल रूप में दर्शकों को उनके चमत्कारों और दिव्य उद्देश्य की खोज से मंत्रमुग्ध कर दिया है।
हनुमान जयंती के पावन पर्व से पहले, शो के प्रमुख कलाकार महिर पंधी (बालि और सुग्रीव की भूमिका में) और हिमांशु सोनी (भगवान विष्णु की भूमिका में) राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली पहुंचे। यहां उन्होंने अपने चाहने वालों से सीधा संवाद किया और हनुमान जयंती के उत्सव में भक्तों के साथ भक्ति का रंग घोला।
इस दौरान दिल्ली के दर्शकों से मिले जबरदस्त स्नेह से कलाकार भावविभोर हो उठे। भीड़ में उठते जयकारों, मंत्रोच्चारण और आंखों में श्रद्धा की चमक ने माहौल को दिव्यता से भर दिया।
महासप्ताह की भव्य शुरुआत
हनुमान जयंती के पावन अवसर पर, दर्शक 7 से 12 अप्रैल तक शो में एक विशेष महासप्ताह का आनंद ले सकेंगे, जिसमें भक्ति, वीरता और दिव्यता की गाथाओं को भव्य रूप में दिखाया जा रहा है। यह श्रृंखला दर्शकों को ईश्वर के प्रति समर्पण और जीवन की उच्च भावनाओं से जोड़ेगी।
महिर पंधी ने कहा, “बालि और सुग्रीव जैसे दो विपरीत पात्रों को निभाना मेरे लिए एक गहन और समृद्ध अनुभव रहा है। दिल्ली में दर्शकों से मिलकर यह यात्रा और भी खास बन गई। बालि और सुग्रीव दोनों ही जटिल किरदार हैं। दर्शकों ने जैसे इन भूमिकाओं को स्वीकार किया है, उसके लिए मैं बेहद आभारी हूं। हनुमान जयंती का ये समय दर्शकों के साथ इस जुड़ाव का उत्सव मनाने का एक सुनहरा अवसर है।”
हिमांशु सोनी ने इस मौके पर कहा, “हनुमान जयंती से पहले दिल्ली आना मेरे लिए बेहद खास अनुभव रहा। वहाँ लोगों के दिलों में हनुमान जी और भगवान विष्णु के लिए जो प्रेम और श्रद्धा देखी, वह भावुक कर देने वाला था। वहाँ की ऊर्जा, जयकारे, मंत्र सब कुछ दिल को छू जाने वाला था। इसने मुझे याद दिलाया कि यह भूमिका सिर्फ एक किरदार नहीं, बल्कि एक माध्यम है, उन करोड़ों लोगों से जुड़ने का जो आस्था रखते हैं, प्रार्थना करते हैं और इन दिव्य कहानियों से शक्ति पाते हैं। यह यात्रा दर्शकों से हमारे गहरे संबंध की एक सुंदर झलक थी।”
भावनाओं की गहराई और आस्था की रोशनी से सजा ‘वीर हनुमान’ आज हर दिल की धड़कन बन चुका है। हर सोमवार से शनिवार, शाम 7:30 बजे, सिर्फ सोनी सब पर, एक ऐसी कथा जो सिर्फ़ देखी नहीं, महसूस की जाती है।
