Hindi Poem: निहार रहा चांद गुलाब को अपनेपर नियति उसकी रही कि …कभी उससे मिल ना सका।बिखेर दी चांदनी अपनी-अपने गुलाब पर उसने,जब पल दो मिलन के चांद गुलाब संग पा ना सका।जवां था चांद पूरा,पर प्रियतम के वियोग में,धीरे-धीरे घटता गया।घटना रहा आकार उसका,अमावस के गर्त में वो फंसता गया।उधर गुलाब भी जो जवान सुर्ख लाल था,मिलन की तड़प में चांद […]
Author Archives: ऋतु गुप्ता
संगम पर संगम-गृहलक्ष्मी की कहानियां
Hindi Kahani: अपने पति के साथ कुंभ नहाने आई मुग्धा अचानक सामने बैठी बुजुर्ग स्त्री को देखकर ठिठक गई, वह सावित्री देवी लग रहीं थी, हां हां वह वही तो है… उसने अपने मन में सोचा ये तो सावित्री देवी ही है जिन्हे मै माताजी कहते नहीं थकती थी और वह मुझे दुल्हन दुल्हन कहते। […]
“प्यारा ऋतुराज बसंत है आया”-गृहलक्ष्मी की कविता
Basant Poem: आया जो आज प्यारा ऋतुराज बसंत है,लाया खुशियों की सौगात संग है।जड़ता को चेतना की ओर ले जाता,यह मधुमास श्री कृष्ण का दूत हैं कहाता। नव पल्लव, कोमल कोंपल संग नव पुष्पों का खिलाना,मां वसुंधरा को जेसै स्वर्ण धानी चुंदर उड़ाना। ले आया सारी सृष्टि में सरसों सूरजमुखी गेंदा सनई अरहर की पीली […]
सरस्वती वंदना-गृहलक्ष्मी की कविता
Saraswati Poem: हे मां वीणा वादिनी ऐसा तू वरदान दे,ज्ञान से झोली तू भर दे, ज्ञान का आकाश दे।ज्ञान की गंगा बहे मां, ज्ञान का भंडार दे,ज्ञान की चाशनी में मां तू, हमको भी बस पाक दे। ज्ञान की सरगम सजे मां, ज्ञान का संगीत हो,ज्ञान के नूपुर बजे मां,ज्ञान के ही साज हो।ज्ञान से […]
महाकुंभ-गृहलक्ष्मी की लघु कहानी
Mahakumbh Story: तथाकथित साध्वी हर्षा रिछारिया आज कुंभ की सुर्खियों में छाई है। कोई उनके समर्थन में है तो कोई उनका विरोध कर रहा है। किसी का कहना है की कुंभ हमारी आस्था का प्रतीक है। अध्यात्म का ज्ञान ही कुंभ है ,जहां हृदय को निर्मल और पवित्र करने का प्रयास किया जाता है। शाही […]
आखिर हम चाहते क्या हैं-गृहलक्ष्मी की लघु कहानी
Hindi Short Story: तथाकथित साध्वी हर्षा रिछारिया आज कुंभ की सुर्खियों में छाई है। कोई उनके समर्थन में है तो कोई उनका विरोध कर रहा है। किसी का कहना है की कुंभ हमारी आस्था का प्रतीक है। अध्यात्म का ज्ञान ही कुंभ है ,जहां हृदय को निर्मल और पवित्र करने का प्रयास किया जाता है। शाही स्नान का मतलब यह नहीं कि सिर्फ एक त्रिवेणी में हम एक […]
फटी शर्ट—गृहलक्ष्मी की कविता
Hindi Poem: वो फटी सी शर्ट में बच्चा,शोरूम के बाहर खड़ा था।और अपनी सूनी आंखों सेपुतले को नहीं शर्ट में निहार रहा था। किसी को नहीं तन ढकने को कपड़े जहांवहां पुतले नए कपड़ों में सज रहे।कोई खाता झूठन से बीन कर सड़कों पर,कहीं दावतो मैं यहां छप्पन भोग फिंक रहे। पर यहां भी देखो […]
90 की शादी-गृहलक्ष्मी की कविता
Hindi Poem: 90s की शादी की बात जब कभी भी आती हैहोठों पर एक सुंदर सी मुस्कान खुद ही खुद आ जाती है। शादी में दोस्तों का बिना प्लानिंग का डांस,वो आंखों ही आंखों में दोनों तरफ से रोमांस।हर क्लिक पर खुशी चेहरे पर फैल जाती है,90s की शादी की बात.. वो दूल्हे के गले […]
पुरुष और दर्द-गृहलक्ष्मी की लघु कहानी
Hindi Short Story: आज तक स्त्रियों के दर्द ,स्त्रियों की वेदनाओ के ऊपर काफी कुछ लिखा गया,पढ़ा गया। मैं आज पुरुषों के दर्द के बारे में अपनी राय अपनी कविता के माध्यम से आप सबके समक्ष रख रही हूं। “पुरुष और दर्द” पुरुष हूं तो इसलिए, दर्द ना होने का झूठा दंभ मैं भर जाता […]
सुकून मां की गोद में-गृहलक्ष्मी की कहानियां
Hindi Kahani: मित्रो एक कहानी आज आप सभी को सुना रही हूं। 20 मई 2023 की बात है हम पति-पत्नी को काफी वर्षों के बाद मां वैष्णो देवी ने अपने दर्शन का बुलावा भेजा था। इसे आप चाहे मेरी श्रद्धा कह सकते हैं,मन के भाव या माता की कृपा, बात एक ही है कि जगदम्बा […]
