Poem on Daughter: अहिल्या गार्गी जैसी विदुषियों पर आज आघात पर आघात है,क्या हमारी बच्चियों के भविष्य का सिर्फ यही परिणाम है। टूटा बांध सब्र का अब आता नहीं करार,कर दो अंग-भंग इन भेड़ियो के मोदी जी,करो इन राक्षसों के समूचे वंश का विनाश। जो कर सके रक्षा बेटियों की तुम,तभी तो तुम कहलाओगे सच्चे […]
Author Archives: ऋतु गुप्ता
पेंसिल बॉक्स-जब मैं छोटा बच्चा था
Hindi Short Story: यह बात उन दिनों की जब मैं कक्षा 4 और मेरी छोटी बहन कक्षा 2 में पढ़ती थी हम दोनों के ही इम्तिहान चल रहे थे तब सभी बच्चों को घर से हिसाब से ही पेंसिल रबर वगैराह मिलते थे।ना जाने उस दिन मेरा पेंसिल बॉक्स कहां गुम हो गया था, स्कूल […]
वो गुलाबी साड़ी-गृहलक्ष्मी की कविता
Teej Hindi Poem: मुझे आज भी याद है वो पहली हरियाली तीज चौथ,जब आप गुलाबी साड़ी मेरे लिए लाए थे।कम थे पैसे जेब में पर,मेरे लिए तो जैसे चांँद ही लाए थे।मुझे आज भी याद है…मेरा पूरा करने श्रंगार,गजरे भी तुम संग लाए थे।मुझे आज भी याद है..लाये थे संग में मोती के कंगन,जो मेरे […]
सावन में आया है नैहर से बुलावा-गृहलक्ष्मी की कविता
Hindi Sawan Poem: नैहर से से आयो है बुलावा,नैहर की अमराई बुलाए रही।संग की सहेली बाट निहारे,मईया सिंधारा सजाएं रही।सावन के झूले रहे हैं बुलाए,बाबुल का लाड़ बताए रहे।हरी हरी चूड़ियां हाथों में सज गई,पर अखियां वीरा की राह निहार रहीं ।पिया नाम की मेहंदी रखकर,सज संवर हर सखी इतराए रही।प्रेम का झौंटा दियो मोरे […]
सावन फिर से याद आया—गृहलक्ष्मी की कविता
Sawan Poem: फिर से आज सावन में,वो गुजरा जमाना याद आया आज की बरखा की बूंदों नेफिर वही अमृत बरसाया।वो पहला प्यार का इजहारवो सावन में मधुर मिलन फिर से याद आया।जब हम थे तुमसे मिले,सुमन खुशियों के हमारे बीच खिले।वो किशोरावस्था का अल्हड़पन,वो पहला स्पर्श तुम्हारा आज फिर याद आया।फिर से आज सावन में…थी […]
सुखद हास परिहास पति पत्नी का-गृहलक्ष्मी की कविता
Hindi Poem: पति परमेश्वर ने एक दिन कहा हमसे कि अब तुम बहुत हसीन दिखने लगी हो,आकर उम्र के इस पड़ाव पर अब तुम बहुत खूबसूरत दिखने लगी हो। स्तब्ध थी मैं और अचंभित भी बहुत थी!क्या यह अल्फाज आज उनके ही मुख से थे निकले?जिन्होंने न की कभी तारीफ़ बीस पच्चीस की उम्र में,क्या […]
बात जो दिल को छू गई-पूज्यनीय सास
Short Story in Hindi: बात उन दिनों की है जब मेरी ससुराल से मेरे सास ससुर और पति मुझे पहली बार देखने आए थे। उन लोगों को मै पसंद आ गई।मैं भी ससुराल को लेकर रंगीन सपने सजाने लगी।मैंने भी मन ही मन एक निश्चय किया कि अपने सास-ससुर की अपने माता पिता की तरह […]
गर्मियों की छुट्टियां-हाय मैं शर्म से लाल हुई
Hindi Funny Story: गर्मियों की छुट्टीयों के दिन थे, बुआ घर आई थी, सभी रात को खाना खाने के बाद छत पर बातों में मशगूल थे, छत साफ करके पानी का छिड़काव करके बिस्तर लगाए जा चुके थे, पानी का घड़ा और गिलास भी स्टूल पर सजाया जा चुका था, हाथ के पंखे सभी के […]
“ईमानदारी”-गृहलक्ष्मी की कहानियां
Hindi Kahani: ईमानदारी सर्वश्रेष्ठ नीति है ऐसा तो हम सभी ने सुना है।ईश्वर भी उसका ही साथ देते हैं जो इमानदारी से अपनी राह पर चलकर अपना मुकाम बनाते हैं । बेईमानी की राह में क्षणिक सुख तो संभव है, लेकिन ईमानदारी के साथ चला हुआ हर कदम सफलता के नए आयाम खोलता है।आपने लकड़हारा […]
आशीर्वाद- गृहलक्ष्मी की कहानियां
Kahani in Hindi: घर भर में कोहराम मचा था,तारा जी सीढ़ी से गिर गई थी, सिर पर भारी चोट लगी थी, डाक्टर ने बताया कि शायद दिमाग की कोई नस फट गई थी,जो उन्हें यूं अचानक दुनिया को छोड़ अलविदा कहना पड़ा। यूं तो तारा जी अपनी जिम्मेदारी से मुक्त हो चुकी थी, तीन बेटे […]
