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“पिता हूं मै”-गृहलक्ष्मी की कविता

Poem for Father: पिता हूं मैं मां तो नहीं बन सकता,पर हर सांस में तुझको जिया है मैंने भीगोद में लेकर मेरे लाल तुझे ,लगा क्या अनमोल मिला मुझेअपनी सभी तमन्नाओं का पिता बनते ही पाया आसमान मैंने।जब तूने मेरी पकड़ी  उंगली, लगा रब ने थाम लिया मुझकोखुशियों के दीप जले दिल में,जब अपना नाम […]

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मलाई वाला दही-हाय मैं शर्म से लाल हुई

Funny Story in Hindi: आज जब फुर्सत के कुछ पल पाकर मै अपनी अलमारी संगवा रही थी, तो उसमें एल्बम मिलने पर कुछ बचपन की फोटो देखने बैठ गई, फोटो देखने क्या बैठी कि वक्त का पता ही ना चला । ऐसे ही एक तस्वीर उन सुनहरी यादों को ताजा कर रही थी, उस आनंद […]

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बेटी के नाम एक पिता का पत्र-गृहलक्ष्मी की कविता

Poem for Father: भेज रहा हूंँ बेटी तुझको ,करने पूरे अरमान तेरे।जो पढ़ लिख जाएगी तू,पूरे होंगे सभी सपने तेरे।तेरे संँग संँग अपनी पगड़ी की,लाज भी संँग में भेज रहा।संगत अपनी अच्छी ही रखना,न जाने मन क्यों डर रहा।जब तू लक्ष्य साधेगी अपना,सीना गर्व से चौड़ा होगा मेरा।जब तू खड़ी होगी पैरो पर अपने।छलकेगा का […]

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एहसास-सक्सेस स्टोरी विद गृहलक्ष्मी

Hindi Story: आज मैं जो लिखने जा रही हूं वह एक कहानी ही नहीं हमारी जिंदगी का एक बेहद दुखद हिस्सा रहा। हमारा परिवार बहुत खुश था। हम दो बहने और दो भाई थे।सभी भाई बहनों में मैं सबसे बड़ी और फिर मेरी छोटी बहन रुचि रही। दोनों भाई छोटे थे। हम दोनों बहनों की […]

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वो भी क्या दिन थे…-गृहलक्ष्मी की कविता

Poem in Hindi: जब छतों पर मिलकरसभी दिल का हाल सुनाते थे,बातों ही बातों में दिल के,हर जख्मो पर मरहम लग जाया करते थे। कभी जो छत थीं, मिलती थी आपस में,जहां प्रेम की सीढ़ियों पर रिश्ते चढ़ा करते थे,एक दूसरे के सुख दुख के फूल,जब हर दिल में खिला करते थे । मिलते थे […]

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उतरन-गृहलक्ष्मी की कहानियां

Hindi Kahani: शगुन ने धीरे से शौर्य का हाथ अपने बाजू पर से हटाया और तकिये के नीचे फंसे अपने लंबे बालों को आहिस्ता आहिस्ता से निकाला, और बेड के पास लगे आदमकद आईने में अपना अक्स निहारने लगी। यूं तो वह काफी सुंदर थी ही ,पर आज वह खुद को बेहद खूबसूरत महसूस कर […]

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पंख -गृहलक्ष्मी की कहानियां

Story in Hindi: जब आज संजना को अपनी तीनों बेटियों में सबसे छोटी बेटी पंखुरी का ज्यूडिशरी का रिजल्ट पता चला तो उसकी आंखों से खुशी के साथ-साथ वक्त और अपनों ने दिए जख्मों को याद कर मिश्रित आंसू की झड़ी लग गई। वह दौड़कर घर में बने मंदिर में सिर नवाकर ईश्वर का धन्यवाद […]

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परवरिश-गृहलक्ष्मी की कहानियां

Story in Hindi: चलो बुलावा आया है माता ने बुलाया है, स्पीकर पर काफी तेज माता के भजन चल रहे थे ,सोसायटी के सभी लोग मां की पालकी लिए हर्षोल्लाह से गाने भजन गाते हुए जा रहे थे। तभी समिति के सचिव पुनीत जी ने बिट्टू जी को आवाज़ लगाई ।बिट्टू जी ए बिट्टू जी […]

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नारी तू नारायणी-गृहलक्ष्मी की कविता

Hindi Poem: आज जब मैं नवरात्रि में मां दुर्गा की पूजा अर्चना कर रही थी तो मन में एक विचार आया कि नारी तू नारायणी, नारी तू कल्याणी, नारी तू जगत जननी जैसे शब्द नारी  के लिए लिखे और कहे गये। इतना मान, इतना सम्मान जो एक नारी को मिला वो सिर्फ इसलिए कि नारी […]

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कान्हा की डेरी-गृहलक्ष्मी की कहानियां 

Hindi Kahani: गाय भैंसों के बीच पला बड़ा हुआ कज्जू कब यूं दो-दो सी.ए. बेटों का पिता बन गया समय की रफ्तार में उसे खुद ही पता नहीं चला। आज दो बेटे दो बहुएं और पोते पोतियों से भरा पूरा परिवार है उसका। कभी समय था कि जिस समय बचपन में बालक को सबसे ज्यादा […]

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