Hindi Poem: कुछ एक बुद्धिजीवियों को,साड़ी में गंवई नजर आती है,पर सच कहूं मित्रों मुझे तो,साड़ी में शालीनता नजर आती है। नहीं है कोई दोष हमारे अन्य परिधानों में,पर कुछ झूठे दिखावे की खातिर,क्यों जुटें हैं हम……अपनी पहचान मिटाने में? यह सब साजिश ही है उठीं,संस्कृति हमारी मिटाने को।जो बढ़ावा दे रहे हम,पाश्चात्य परिधानों को। […]
Author Archives: ऋतु गुप्ता
मेरा पहला उपहार-गृहलक्ष्मी की कहानियां
Story in Hindi: कहां तक बखान करूं ए जिंदगी,तूने सौगात है बहुत सी दीं हैं।दिए हैं उतार-चढ़ाव बहुत से जिंदगी में तूने,पर क्यूं मैं याद करूं उन सभी को,जब तूने यादें मीठी भी बहुत दी हैं।बस एक ऐसा उपहार में नहीं भूलना चाहती जिंदगी भरजब ईश्वर ने पहली बार गोद भरी थी,देखकर मां की ममता […]
“जाको राखे साइयां मार सके ना कोई”-गृहलक्ष्मी की कहानियां
Story in Hindi: कई बार कहावतें इतिहास के पन्नों से निकलकर व्यक्ति के जीवन को प्रदर्शित करती हैं, ऐसी ही एक घटना को प्रदर्शित करती मेरी ये कहानी कालबेलिया नृत्य की चिर परिचित नृत्यांगना गुलाबो देवी के जीवन को चरितार्थ करती है, जो राजस्थान के कबीले के लोगों सपेरा जनजाति से सम्बंध रखतीं हैं। कहानी […]
भाग्यलक्ष्मी-गृहलक्ष्मी की कहानियां
Bhagyalakshmi Story: पुष्पा जी अपनी भागौ (भाग्यलक्ष्मी) का सिर गोद में लिए शून्य में देख रही है…उन्हें आज भी याद है जब वो इस घर में दुल्हन बन कर आई थी, जब उनकी सास उनका स्वागत कर उनकी आरती उतार रही थी, तब नन्ही भागौ (भाग्यलक्ष्मी उनकी छोटी नन्द जो दिमाग से जरा सी कमजोर […]
“ऐसी दीपावली जो सबके लिए हो”-गृहलक्ष्मी की कहानियां
Hindi Diwali Story: दीपावली एक ऐसा पर्व है….जिसे सुनते ही हर्षोल्लास से मन प्रफुल्लित हो जाये,सारी जहान भर की खुशियां खरीदने का मन हो जाए। चारों तरफ दीपावली में सजे कतारबद्ध टिमटिमाते दीपक, जो इस अंधकार बनी रात्रि को भी रोशनी से नहला दे, आभास ही ना होने दें कि ये अमावस की रात्रि है! […]
पहचान—गृहलक्ष्मी की कहानियां
Hindi Kahani: कैसी हो ताई सा….. घर में घुसते ही कला ने अपने ससुराल के पड़ोस में रहने वाली ताई सा सावित्री देवी जी को प्रणाम किया। सावित्री देवी छोटी उम्र में ही विधवा हो गई थी,वो अपने घर में अकेली रहती थी ,उनके कोई आस औलाद नहीं थी, पर उन्होंने गांव के हर बच्चे […]
पहले प्यार का पहला गम-गृहलक्ष्मी की कहानियां
Love Story in Hindi: घर में घुसते ही देखा मेज पर एक शादी का कार्ड रखा है, उत्सुकता वश कार्ड खोलकर देखा,कार्ड पर दुल्हन के नाम में अपनी नंदिनी का नाम देखकर जी धक से रह गया, सोचा ये क्या मेरी नंदिनी ही मेरे शहर आ रही है… किसी और की दुल्हन बन कर! पता […]
कुछ पल अपने लिए—गृहलक्ष्मी की कविता
Hindi Poem: कुछ लम्हे सुकून के अपने लिए….बहुत जी लिया दुनिया के लिए,चलो सखियों आज अपने लिए जीते हैं,इस भाग दौड़ भरी जिंदगी में,कुछ लम्हे सुकून के अपने लिए जीते हैं।छुट्टियां तो सबको ही चाहिए,फिर हमें एक इतवार भी क्यों नहीं?चलो बहनों आज यही प्रश्न उठाते हैं,इसी बहाने जिंदगी का कुछ अलग लुत्फ उठाते हैं।आज […]
जब होली की धूम मची थी—हाय मैं शर्म से लाल हो गई
Holi Funny Story: मुझे आज भी याद है वह होली जब मैं दसवीं कक्षा में थी, और बोर्ड के एग्जाम थे,तो मैंने तय किया था कि इस बार होली नहीं खेलूंगी। एक तो मुझे कुछ रंगों से डर लगता था एक इम्तिहान की वजह से कि कहीं बीमार न हो जाऊं।वह बचपन की होली जब भी याद आती है तो होठों पर अपनी नादानी को याद कर मुस्कुराहट […]
आज ब्याज भी चुका दिया..-गृहलक्ष्मी की कहानियां
Hindi Kahaniya: उत्तराखंड का एक छोटा सा गांव सीतामढ़ी आज तीन दिन हुए बारिश लगातार हो रही थी ,हर चीज जलमग्न हो रही थी, नन्हे नन्हे पेड़ पौधे तो इतनी बारिश में अपना वजूद ही खो चुके थे। छोटे-छोटे घर, दुकानों और खेतों में पानी भर चुका है। खेतों की मेंड (किनारियां) टूट चुकी है। […]
