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स्नेह का बंधन -गृहलक्ष्मी की कहानियां

Hindi Love Story: मां तुम बाबू जी को मना लो ना…. कम से कम एक बार तो अपने बेटे बहू के पास आकर रहें। यदि मन नहीं लगे तो बेशक मैं खुद वापस गांव छोड़ने चला आऊंगा। विभु ने अपनी मां कल्याणी जी से ऐसा कहा तो कल्याणी जी ने जबाव दिया…. बेटा तू तो […]

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स्नेह का बंधन-गृहलक्ष्मी की कहानियां

Hindi Social Story: मां तुम बाबू जी को मना लो ना…. कम से कम एक बार तो अपने बेटे बहू के पास आकर रहें। यदि मन नहीं लगे तो बेशक मैं खुद वापस गांव छोड़ने चला आऊंगा। विभु ने अपनी मां कल्याणी जी से ऐसा कहा तो कल्याणी जी ने जबाव दिया…. बेटा तू तो […]

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मां को बस हमने मां होते हुए देखा-गृहलक्ष्मी की कविता

Mother Poem: सोचती हूं कभी की, क्या कभी मां भी कमसिन रही होगी?क्योंकि हमने तो बस हमेशा मां को सिर्फ मां ही होते देखाना देखा उनका बचपन,ना उन्हें जवां होते देखा,मां को बस हमने मां होते देखा… कितनी खूबसूरत लगी होगी मां मेरी,जब उनके द्वारे पर शहनाई बजी होगी।हर कली मुस्कुराई होगी,जब मेरी मां दुल्हन […]

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बड़ी अम्मी-गृहलक्ष्मी की कहानियां

Hindi Kahani: नजमा तेज बुखार में तप रही थी और छत पर बैठी चुपचाप स्नेह भरी नजरों से नूर को निहार रही थी, जो पास के ही छज्जे पर चढ़ कर पतंग उड़ा रहा था। नजमा नूर से कहना चाहती थी कि बेटा संभाल कर कहीं पतंग के चक्कर में चोट मत मार लेना,पर नूर […]

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मेरी चोरी पकड़ी गई-हाय मैं शर्म से लाल हुई

Hindi Funny Story: बचपन से ही मैं घर में सबसे छोटी ,शैतान और सबकी लाड़ली रही थी । सबसे ज्यादा तो अपने दादाजी की लाड़ली थी, क्योंकि दादाजी के कोई बहन और बेटी नहीं थी और मैं भी अपने तीन भाइयों के बाद घर में जन्मी तीन पीढ़ियों में अकेली लड़की थी।सब लाड़ मे मेरे […]

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साथ निभाऊंगा प्रिया-गृहलक्ष्मी की कहानियां

Hindi Love Story: तुम अब ज्यादा दुखी मत  हुआ करो प्रिया, मां को तो कुछ ना कुछ कहने की आदत है ही, तुम्हारी अब वह हालत नहीं की ज्यादा सोचो। प्रवीण ने प्रिया को संभालते हुए कहा तो प्रिया जो अभी तक अपनी मोटी मोटी आंखों में बड़े बड़े आंसुओं को रोक रही थी ,प्रवीण […]

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जीवनसाथी साथ निभाना-गृहलक्ष्मी की कहानियां

Hindi Kahani: आज हमारी मां पूरे 2 महीने बाद व्हीलचेयर पर बैठकर एंबुलेंस से उतारा तो हम सभी के चेहरे पर थोड़ी मुस्कान थी। हमारा छोटा भाई और पापा सहारा देकर मां को घर के अंदर ला रहे थे तो हम दोनों बहने और हमारी प्यारी भाभी और सभी बच्चों ने चाहें  हमारे बच्चे हो […]

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वो गुलाल प्रियतम का-गृहलक्ष्मी की कविता

Hindi Poem: गुलाल सा वो रंगाजब गालो को,आत्मा तक रंग गया,मेरे प्यासे अधरों का सावन ,वो छलिया फागुन  में बन गया ।निखर गई मैं,बिखर ग‌ई मैं,कैसे अब संभालूं खुद को,जबसे उसका चढ़ा गुलाल,एक नशा सा चढ़ गया।देख रही कभी उसको मै,कभी गालों पर गुलाल देखती हूं,छूटे से कभी छूटे ना,ऐसे रंग मे मुझको ,वो सांवरिया […]

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“अपराजिता है स्त्री”-गृहलक्ष्मी की कविता

Hindi Women Poem: अपराजिता की बेल हूं मैं,कहां दफन हो पाती हूं? चाहें कोई भी मौसम हो, हर हाल में मैं मुस्काती हूं।चाहें कितने पतझड़ आयें,मैं फिर से खड़ी हो जाती हूं। चाहें कितनी चलें आंधियां,चाहें कितने उठे तूफान,अस्तित्व अपना स्वयं बनाती,स्वाभिमान से मैं भर जाती हूं। बड़े-बड़े पौधे (सूरमा) भी मुझसे,प्रेरणा पाते जीवन की,कितनी […]

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औरत पहले हूं…-गृहलक्ष्मी की कहानियां

Women Story in Hindi: चलो जीजी ओर बताओ और क्या बनाना है? अपना राघव आता ही होगा ,पूरे चार बरस बाद आ रहा है,शहर से पढ़ाई करके। बहुत सही करा जीजी जो तुमने उसे सही समय पर पढ़ने  भेज दिया। मुझे तो बहुत फिक्र होती है, अपने बेटे सूरज की । आपके देवर ने उसे शुरू से ही […]

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