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पंद्रह साल का इंतज़ार- गृहलक्ष्मी की कहानियां

Short Story in Hindi: राखी को अपने पिता की धुंधली-सी याद थी। वह सिर्फ़ छह साल की थी, जब माँ और पिता अलग हो गए। उस छोटे से मन में बस इतना ही बैठा था कि पापा कहीं चले गए हैं । उसके बाद माँ ने ही उसका पूरा संसार बना दिया। माँ के साथ […]

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फादर्स डे का गिफ्ट-गृहलक्ष्मी की लघु कहानी

Hindi Short Story: दोपहर का समय था। सुनील और वंदना अपने कमरे में बैठे आपस में बातें कर रहे थे। तभी दरवाजे पर उनकी लाडली भतीजी परी की आवाज सुनाई दी। परी की आवाज सुन वंदना ने दरवाजा खोला तो देखा नन्ही परी अपने नाजुक कंधों पर एक बड़ा सा थैला टांगे खड़ी थी।परी को […]

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अधूरी खामोशियां-गृहलक्ष्मी की कहानियां

Hindi Short Story:शालिनी और अंशुल की शादी को दस साल हो चुके थे। शुरुआत में उनका रिश्ता उतना ही चमकदार था जितना कोई नया रंगीन सपना। पर वक्त के साथ रोज़मर्रा की ज़िम्मेदारियों, काम के दबाव और छोटे-छोटे मनमुटावों ने उनके बीच एक अजीब सी खामोशी ला दी थी। कभी घंटों बातें करने वाले दोनों […]

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ये कैसी नफरत – गृहलक्ष्मी की कहानियां

Sad Story in Hindi: प्रियंका अपने माँ-पापा की आँखों का तारा थी। हर किसी की लाड़ली, समझदार, पढ़ाई में होशियार और दिल से बहुत कोमल। लेकिन उसका अपनी दादी के साथ रिश्ता ऐसा था जिसमें वो कभी अपनापन महसूस नहीं कर पाई। दादी उसके प्रति सख्त थीं, बात-बात पर टोका-टोकी करतीं, और सबसे बड़ी बात, […]

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दो गुलाब—गृहलक्ष्मी की लघु कहानी

Hindi Prem Kahani: मेट्रो में अंदर घुसते ही ऋतुराज ने चारों तरफ बैठने के लिए जैसे ही नजर दौड़ाई तो उसकी नजर कोने की सीट पर बैठी एक लड़की चश्मा लगाए एक पत्रिका पढ़ती नजर आई। पत्रिका के कवर पर“दो गुलाब” लिखा देख ऋतुराज के चेहरे पर मुस्कान आ गई और वह पढ़ने वाली लड़की […]

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ब्यूटीफुल-गृहलक्ष्मी की कहानियां

Hindi Short Story: “क्या मैं ब्यूटीफुल लगती हूं?” ये सवाल मीरा ने पहली बार अपनी मम्मी से तब पूछा था जब वो नौ साल की थी। मम्मी रसोई में थीं, बेसन के लड्डू बना रही थीं और उनके हाथ बेसन से सने हुए थे। मीरा उनके पास जाकर खड़ी हो गई और सीधा वही सवाल […]

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बिना शब्दों के प्रेम-गृहलक्ष्मी की लघु कहानी

Short Romantic Story: शीतल रोज़ सुबह की तरह मेट्रो में सफर कर रही थी। चेहरे पर हल्की थकान, हाथ में ऑफिस का बैग, और मन में वही रोज़ का प्रश्न – क्या इस भागदौड़ में कोई ऐसा है जो संवेदनाओं को समझ सके?मेट्रो के कोने में बैठे एक बुज़ुर्ग सज्जन, सफेद खादी कुर्ता और धोती […]

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मेट्रो वाली मिसअंडरस्टैडिंग—गृहलक्ष्मी की लघु कहानी

Short Story in Hindi: शिवम रोज ऑफिस जाने के लिए ब्लू लाइन मेट्रो पकड़ता था। उसकी आदत थी, मेट्रो में घुसते ही सबसे पहले अपनी जगह पक्की करना और फिर मोबाइल पर इंस्टाग्राम खोलकर रील्स स्क्रॉल करना।उसी मेट्रो में रोज एक लड़की आती थी — काव्या। बड़े-बड़े चश्मे, हाथ में किताब, और चेहरे पर इतनी […]

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लव इन ए मेट्रो—गृहलक्ष्मी की लघु कहानी

Hindi Short Story: रोज़गार की तलाश में सुबह शाम कभी किसी दफ़्तर के चक्कर लगा रहा था तो कभी किसी दफ़्तर के। पर मन में एक विश्वास था कि एक न एक दिन ज़रूर कोई ऐसी नौकरी मिल जाएगी कि मैं अपना और अपनी माँ का अच्छी तरह से ध्यान रख सकूंगा। रोज़ दौड़ते भागते […]

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अब और नहीं – गृहलक्ष्मी की कहानियां

Sad Story in Hindi: रूपल की ज़िंदगी बीते कुछ सालों से एक खालीपन से भरी थी। उसके और अमन के रिश्ते में धीरे-धीरे दूरियाँ आ गई थीं। अमन को लगता था कि रूपल बेवजह की बातें करती है, हर समय नेगेटिव सोचती है। अमन महीने में मुश्किल से 4-5 दिन घर रहता था, बाकी समय […]

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