Fathers Day ka Gift
Fathers Day ka Gift

Hindi Short Story: दोपहर का समय था। सुनील और वंदना अपने कमरे में बैठे आपस में बातें कर रहे थे। तभी दरवाजे पर उनकी लाडली भतीजी परी की आवाज सुनाई दी। परी की आवाज सुन वंदना ने दरवाजा खोला तो देखा नन्ही परी अपने नाजुक कंधों पर एक बड़ा सा थैला टांगे खड़ी थी।
परी को पुचकारते हुए वंदना बोली, “क्या है मेरी लाडली?” इतने में परी ने अपने थैले से टॉफी, बिस्किट और चिप्स के पैकेट निकाले और बोली, “चाची, आज मैं सामान बेच रही हूं। आप लोग भी मुझसे कुछ सामान खरीद लीजिए।”
परी की मासूमियत भरी बातें सुनकर सुनील और वंदना अचरज में पड़ गए कि मेरी नन्हीं परी आज सामान क्यों बेच रही है। पर उसकी बात रखने के लिए दोनों ने सामान लेने की हामी भर दी और बोले, “परी बेटा, तुम जो भी सामान बेच रही हो, उनमें से सब चीजें हमें चाहिए।”
सुनील के इतना कहते ही परी ने अपने थैले से टॉफी, बिस्किट और चिप्स के पैकेट निकाले और उन्हें अपनी चाची के हाथों में देते हुए बोली, “अब आप मुझे पैसे दीजिए।”
परी की बात सुनकर सुनील और वंदना मुस्कुरा कर बोले, “कितने रुपए हुए मेरी लाडली?” परी तपाक से बोली, “चाचा बीस रुपए।”
सुनील ने अपनी शर्ट की जेब से बीस रुपए निकाले और परी के हाथ में दे दिया। चाचा से रूपए मिलते ही परी अपना थैला उठाई और चहकते हुए कमरे से बाहर चली गई।
थोड़ी देर बाद जब सुनील अपने कमरे से बाहर आया, तो देखा परी अपने दादा-दादी को भी सामान देकर उनसे पैसे मांग रही थी। परी की मासूमियत देख सुनील मुस्कुराया और बाइक पर सवार होकर बाजार की ओर चला गया।
रात को जब सुनील और वंदना अपने कमरे में आराम कर रहे थे, तब वंदना ने सुनील को बताया कि आज परी ने घर के सभी लोगों को टॉफी, बिस्किट और चिप्स बेचें हैं। सुनील बोला, “हां, मैंने दोपहर में देखा था। हमारे कमरे से बाहर जाने के बाद परी दादा-दादी को सामान देकर पैसे मांग रही थी।”

इतने में वंदना बोली, “क्या आप जानते हो परी ऐसा क्यों कर रही थी?” सुनील बोला, “हां, हमारी परी अभी बच्ची है, उसे कोई बचपना सूझा होगा, इसलिए ऐसा कर रही थी।”
सुनील की बात सुनकर वंदना बोली, “नहीं, हमारी लाडली कोई बचपना नहीं कर रही थी और न ही कोई खेल खेल रही थी। अगले संडे को फादर्स डे है और हमारी परी अपने पापा को सरप्राइज गिफ्ट देने के लिए सामान बेच कर पैसे इकट्ठा कर रही है।”
वंदना की बात सुनकर सुनील बोला, “अरे वाह, मैं नहीं जानता था कि हमारी नन्हीं परी इतनी बड़ी हो गई है।” वंदना बोली, “और क्या हमारी परी इस बार अपने कमाए रुपयों से अपने पापा को फादर्स डे का गिफ्ट देगी।”