बच्चे को पैदल चलने के लिए कहें। उससे छोटी-छोटी दौड़ लगाएं, सीढ़ियों पर चढ़ें या साथ चलते हुए गाएं। अगर वह आपकी गोद में जाने की बजाए दो कदम भी पैदल चलने को मान जाए तो उसकी तारीफ जरूर करें।
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शिशु की कम होती हलचल को सुनकर घबराएं नहीं
गर्भावस्था में इस समय शिशु की हलचलों के बारे में सोचने या चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है। हलचल कब व कितनी बार होगी, इसका ढांचा काफी हद तक अलग हो सकता है।
गर्भावस्था के समय हो सकती है नजर कमजोर
गर्भावस्था के दौरान आंखों में सूखेपन की वजह से जलन, खुजली व बेचैनी हो सकती है। यदि आंखों में ज्यादा पानी आने लगे तो कांटैक्टलेंस लगाने वाली महिलाओं की नजर धुंधला सकती है। डिलीवरी के बाद सब कुछ पहले की तरह सामान्य हो जाएगा इसलिए कोई भी नया बदलाव लाने से पहले सोच लें।
प्रेगनेंसी में पहनें कम्फर्टेबल और स्टाइलिश फुटवियर
गर्भावस्था में पाँव की सूजन घटाने वाले सुझावों पर अमल करना चाहिए। यदि साइज एक इंच तक बढ़ गया हो तो नए आरामदायक जूते ले लें ताकि गर्भावस्था में आपको नंगे पांव न रहना पड़े। जूते खरीदते समय फैशन से पहले आराम पर ध्यान दें।
गर्भावस्था के दौरान त्वचा में होते हैं ये 7 बदलाव
अक्सर गर्भवती महिलाओं में मस्से की समस्या बढ़ जाती है। त्वचा पर फालतू त्वचा का जमाव-सा हो जाता है। ये दूसरी-तीसरी तिमाही में होते हैं। और डिलीवरी के बाद ठीक हो जाते हैं। यदि नहीं, तो डॉक्टर इन्हें हटा भी सकते हैं।
गर्भावस्था में गर्मी लगना सामान्य है
‘‘मुझे हमेशा गर्मी लगती है और पसीना आता रहता है जबकि बाकी सबको तापमान सामान्य लगता है। यह क्या है?” इन दिनों आप काफी गर्मी महसूस कर रही हैं, यह गर्भावस्था के हार्मोन की वजह से हो रहा है। हम आपकी इस उलझन को सुलझा तो नहीं सकते लेकिन कुछ ऐसे उपाय बता सकते हैं, […]
गर्भपात के बाद मुझे गर्भधारण के नाम पर डर लग रहा है, क्या करूं?
डॉ. निकिता त्रेहन, स्त्री रोग विशेषज्ञ एवं लैपरोस्कोपिक सर्जन सनराइज अस्पताल, नई दिल्ली
प्रेगनेंसी के दौरान वर्कआउट के हैं कई फायदे
आपको अपना आलस छोड़, दिन में कम से कम आधा घंटा तो व्यायाम करना ही चाहिए। ज्यादातर महिलाएँ इस सलाह को अपनाकर फिट रहती हैं। यदि डॉक्टर मना न करें तो आप भी इस सलाह पर अमल कर सकती हैं। आपको पता होना चाहिए कि इस व्यायाम से आपको व शिशु को कितना लाभ हो सकता है।
गर्भावस्था के दौरान भूलने की आदत से घबराएं नहीं
अध्ययनों से पता चला है कि गर्भवती महिलाओं के दिमाग की कोशिकाओं की मात्रा में कमी आती है कहते हैं कि बेटे को जन्म देने वाली मांओं के मुकाबले लड़कियों की माएँ ज्यादा भुलक्कड़ हो जाती हैं। अच्छी बात यह है कि यह सब कुछ अस्थायी तौर पर होता है।
गर्भावस्था है नए जीवन की शुरुआत
कई माता-पिता गर्भावस्था में इस मानसिकता के शिकार हो जाते हैं। उन्हें अपने ही फैसले पर शक होने लगता है। जरा सोचिए न कि इस एक फैसले की वजह से आपकी पूरी जिंदगी बदलने वाली है। आप लोग कब खाएँगे, पीएँगे, सोएँगे या फिर कैसे जीएँगे, यह सब कुछ आने वाला शिशु तय करेगा।
