‘‘सर यहां पर झांसी से कोई वर्मा सर हैं क्या? उनके घर से अर्जेंन्ट फोन आया है कोई सीरियस है, कह दें अविलम्ब घर से सम्पर्क करें। एक व्यक्ति मैसेज देकर चला गया। फाइवर ग्लास वर्किंग पर एक वर्कशाप का आयोजन केन्द्रीय विद्यालय नं. 1 कैन्ट नई दिल्ली में किया गया था।
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गृहलक्ष्मी की कहानियां : ‘देवदूत’
गृहलक्ष्मी की कहानियां : पल्लव आज की डाक में एक खूबसूरत से शादी के कार्ड काे खाेल ही रहा था, उसकी आईएएस बैचमेंट रिया का फोन आ गया। पल्लव, साॅरी मैं तुमसे शादी नहीं कर सकती। मैंने शिवम् से शादी करने का फैसला लिया है। महत्वाकांक्षी रिया ने पल्लव काे पसन्द किया था, क्याेंकि वह आईएएस परिवार से […]
गृहलक्ष्मी की कहानियां – दिल की जीत
श्रेया का बार-बार शादी करने को लेकर इंकार करना, उसके मम्मी-पापा को परेशान कर रहा था, वो श्रेया की नहीं का कारण जानना चाहते थे लेकिन जान नहीं पा रहे थे।
मेरी बीवी की शादी का सच
अपने अधिकारी के प्रति वह इतनी दीवानी हो चुकी थी कि हर बात में मिस्टर यादव ही आते थे। वही उसके सब बने जा रहे थे। उन्हीं के ख्यालों में खोई रहती थी मेरी पत्नी। ख्वाब भी उन्हीं के देखती होगी।
गृहलक्ष्मी की कहानियां : दंगे वाली दुल्हन
मेरे दर्द से आपा का दर्द कुछ कम नहीं था, मगर मैं क्या करूं…? जिस दर्द को मैं भूलना चाहती थी, उसे कोई मुझे भूलने ही नहीं देता।
आकांक्षाएं और अनुभूति
राधिका भीगी आवाज में कहती है- लो मां, फीता खोलो………. उद्घाटन करो। आज आपका व अंकल का स्वप्न पूरा होने जा रहा है। मां नम आखों से फीता खोलकर अनुभूति अस्पताल का उद्घाटन करती है। पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज जाता है। पूरे गांव में अपार हर्ष है। अब अपने गांव में कोई गरीब बिना दवा […]
गृहलक्ष्मी की कहानियां – पाषाण हृदय
गृहलक्ष्मी की कहानियां – मैंने पत्नी से कहा कि पुरुष पाषाण हृदय वाला हो सकता है पर नारी पाषाण हृदय नहीं हो सकती ‘‘नीलिमा दीदी की बात भूल गए क्या? पत्नी ने पूछा” अरे हां उन्हें तो भूल ही गया। पूरी घटना याद आ गई। उनकी बेटी ममता का विवाह था। पंडाल सजा हुआ था, […]
वनवास में वो मिलन
गीली लकड़ी की सुलगती देह को थामे वह भिखारी लड़खड़ाता हुआ फिर वहीं ठिठक गया। एक फटा सा टाट पैरों से हिलाकर बस जम गया उस पांचवी सीढ़ी पर। उस सुप्रसिद्ध धर्मस्थल की वह पांचवी सीढ़ी पांच वर्षों से उसका धाम, काम, नाम उसका स्थायी पता… हां यही सीढ़ी हो गयी थी। देर रात वो […]
गृहलक्ष्मी की कहानियां -अब घर में आएगी एक नन्ही परी
गृहलक्ष्मी की कहानियां –एक बेटी प्रज्ञा पहले से थी इसलिए एक बेटे की ख्वाईश रखना कोई असंगत या अस्वाभाविक नहीं था। इस हेतु विराट ने बाकायदा पूरी तरह प्लानिंग की। वह भी तब जब प्रज्ञा पहली कक्षा में पहुंच गई। यद्यपि सब कुछ पूरी तरह उनके हाथ में नहीं था, इसके बावजूद पूरी तरह ख्याल […]
रिश्तों का ताना-बाना
क्या मां आपको तो मेरी हर बात बकवास ही लगती है, शोभित ने नाराज़गी के साथ शोभा से कहा। बकवास नहीं तो क्या। कहने से पहले सोचा तो करो कि क्या कह रहे हो और क्यों, उसने बेटे से कहा। आप कब समझोगी कि मैं बच्चा नहीं रहा, शोभित ने जवाब दिया। बच्चे नहीं हो, […]
