बिहार के वैशाली जिले के उस छोटे से कस्बे में आज जश्न का माहौल है। हर कोई उमंग में डुबा हुआ है, और हो भी क्यों नए आखिर एक स्कूल मास्टर की बेटी का भारतीय प्रशासनिक सेवा में चयन जो हुआ है। दीनदयाल सिंंह जी की इकलौती बेटी प्रतिभा ने अपनी अटूट मेहनत और लगन […]
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बरसाने की बारात में चौधरी – गृहलक्ष्मी कहानियां
भले ही खुद के घर में इनकी कौड़ी इज्जत ना हो पर बाहर किसी की मौत हो या शादी, ये अपना ज्ञान बघारने से बिलकुल भी नही चूकते। ऐसी चौधराहट दिखाते हैं कि घर वाले भी बाहर वाले लगने लगते हैं।
जय हो पति देवता
आज सुबह की ही बात है कि पतिदेव नहाने के बाद अपनी शर्ट कहीं रखकर भूल गए। अब जिद भी यही कि उनको वही शर्ट पहनकर भी जानी है। काफी देर तक उनका रिकार्ड सुनने के बाद मैंने शर्ट ढूंढ़कर दे तो दी लेकिन वह पहनने लायक नहीं रह गई थी। जनाब ने तौलिया समझकर […]
वाह रे वाह ‘पॉपकॉर्न-कल्चर
मॉल-कल्चर में मल्टीसिनेप्लेक्स- कल्चर और पॉपकार्न भी समाए होते हैं। पॉपकार्न वैसे देखा जाए तो हमारी देशी संस्कृति मक्का की फुली का ही अंग्रेजी संस्करण है, जो कि मेड बाई भट्टी के स्थान पर मेड बाई मशीन बन गया है। जिस पर अत्यधिक कीमत वाला पॉपकार्न-कल्चर का स्टीकर चिपका दिया जाता है। मक्का की फुली […]
नैना फिर से जी उठी…
नैना परिवार में दूसरी बेटी थी। उसकी बड़ी बहन सीमा उससे उम्र में पांच साल बड़ी थी। वह बहुत ही सुंदर और होशियार थी। उसके जन्म पर उसकी मां को कोई ख़ुशी नहीं हुई थी बल्कि वह एक और बेटी आ जाने से बहुत निराश हो गयी थी। यही कारण था कि बचपन से ही उसे […]
एक नया संकल्प – गृहलक्ष्मी कहानियां
लाख कोशिशों के बाद भी माधवी स्वयं को संयत नहीं कर पा रही थी, मन की उद्विग्नता चरम पर थी। जाते हुए जेठ की प्रचण्ड तपन लहुलुहान मन की पीड़ा से एकाकार होकर जैसे आज जीते जी उसे जला देना चाहते थे। शाम के सात बजने वाले थे, पर दिशाओं में हल्की उजास अब तक कायम थी, यह उजास जैसे माधवी की आंखों में, तन बदन में शोलों की तरह चुभने लगा। वह छुप जाना चाहती थी, अंधेरे में कहीं गुम हो जाना चाहती थी, घर परिवार समाज सबकी नज़रों से दूर, यहां तक कि अपने आप से भी दूर .. बहुत दूर कहीं ओझल हो जाना चाहती थी।
गृहलक्ष्मी की कहानियां – भविष्यफल
गृहलक्ष्मी की कहानियां – उस दिन मन नहीं लग रहा था। बहुत बोरियत महसूस हो रही थी। कालेज की छुट्टियां जो चल रही थीं। लग रहा था मानो जिंदगी पर ही ब्रेक लग गया हो। कुछ करने के लिए हो ही न… और जब काम हो तो काम की थकान, रोज यही इच्छा होती है कि […]
मिलन यामिनी
यामिनी एकाएक असहज हो उठी। वजह भी वाजिब थी- अभी मिले पत्र का अटपटा शुरूआती मजमून और बेतरतीब भाषा। हालांकि पत्र के अंत तक पहुंचते वह नाॅर्मल हो गई थी और चेहरे पर मुस्कान थिरकने लगी थी। ‘‘पतंग-डोर की भांति हम परस्पर जुड़े थे, असंगत हालात ने हमारे बीच दूरियां बढ़ा दीं। तेज हवा के […]
बहके कदम
स्कूल की आधी छुट्टी की घंटी बजते ही बच्चों का एक विशाल समूह ऐसे बाहर लपका, मानो अचानक किसी बाड़े का गेट खुला हो। पता नहीं यह बच्चे ऐसे क्यूं भागते हैं, मानो किसी जेल से छूटे हों। शायद बच्चों के स्वभाव में ही गति होती है। इसी भीड़ में मीनू और गीता बड़े हौले […]
गृहलक्ष्मी की कहानियां : सन्धि वार्ता
गृहलक्ष्मी की कहानियां : टिफिन बन गया कि नहीं ? मुझे देर हो रही है।” राजाराम ने चिल्लाकर राजरानी से कहा। उधर से कोई जवाब नहीं आया। राजाराम अंदर देखने गया राजरानी बिस्तर पर लेटी थी। इसका मतलब था, आज भी खाना नहीं बनेगा। महाभारत की रचना शुरू हो चुकी थी। महारानी लेटी पड़ी है […]
